
नीम के माध्यम से निमेटोड (सूत्रकृमि) की समस्या का समाधान Publish Date : 19/11/2025
नीम के माध्यम से निमेटोड (सूत्रकृमि) की समस्या का समाधान
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता
निमेटोड क्या है?

निमेटोड एक प्रकार का बहुत ही सूक्षम धागा नुमा कीट होता हैं जो कि धरती के अन्दर पाया जाता है। निमाटोड्स विभिन्न प्रकार के होते हैं और प्रत्येक किस्म के निमाटोड नामक ये कीट फसलो को बर्बाद करने के लिए कुख्यात है, यह वर्षों तक मिटटी के नीचे दबे रह सकते है और पौधो को नुकसान पहुचाते है। यह पौधो की जडो का रस चूसते है, जिसके कारण पौधे को भूमि से खाद पानी या पोषक तत्व आदि पूरी मात्रा में नही मिल पाते और पौधे की बढवार रुक जाती है।
निमेटोड लगने से पौधों की जड़ो में गांठ बन जाती है, जिससे पौधे का विकास पूरी तरह से रुक जाता है जिससे पौधा मर भी सकता है। संसार की प्रत्येक फसल पर इनका प्रकोप होता हैं -जड गांठ रोग़, पुटटी रोग, निम्बू का सूखा रोग, जड गलन रोग, जड फफोला रोग इत्यादि रोग प्रमुख हैं।
निमाटोड की समस्या से ग्रस्त होने वाली फसलें-
निमेटोड द्वारा प्रभावित होने वाली मुख्य फसलें हैं गेंहू, टमाटर, मिर्च, बैंगन, भिण्डी, परमल, धान इत्यादि व फलो में अमरूद, सीताफल, अनार, निम्बू, किन्नू, अंगूर एवं समस्त प्रकार के फलों के व अन्य प्रकार के लगभग सभी पौधों में।
निमाटोड की पहचान?

यदि फसल के पौधे बढ़ न पा रहे हों, पौधे सुखकर मुरझा जाते हैं तथा उनकी जड़ों में गांठे पड़ गई हो व उनमे फल और फूल की संख्या बहुत कम हो गई हो तो फसल में नीमाटोड की समस्या हो सकती है।
नीमाटोड का जैविक समाधान व पौध संरक्षण-
मिटटी में रसायन छिड़क कर मारने का प्रयास महंगा ह़ी नहीं बल्कि निष्प्रभावी भी हो सकता है। निमेटोड और दीमक आदि कीड़ो को प्रभावी रूप से समाप्त करने के लिए नीम खाद पाउडर का उपयोग किया जा सकता है, इसके लिए नीम खली का तेल युक्त होना आवश्यक है। वास्तव में होता यह है कि नीम खाद नीम खली के उपयोग से नेमाटोड बनना रूक जाते है। नीमखाद का प्रयोग करने से उपज में 40 प्रतिशत तक की वृद्धि भी होती है और फूलो का ज्यादा बनना तथा फलो की संख्या भी बढती है तथा फल अधिक स्वादिस्ट, चमकदार एवं आकार बड़ा और अधिक वजनदार बनते है।
उपचार-
फसलो की लिए- गर्मी के मौसम में मिट्टी की गहरी जुताई करें तथा 1 हफ्ते के लिए खेत को खुला छोड़ दें। बीज की बुवाई से पहले नीम खली 2 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से डाल कर एकबार फिर से जुताई करे इसके बाद ही बुवाई करें।
फलो में- अनार, निम्बू, किन्नू, अंगूर एवं समस्त प्रकार के फलों के व अन्य पोधे के रोपण के समय एक मीटर गहरा गड्ढा खोद कर नींम खली एवं सड़े गोबर की खाद/बकरी की मींगनी आदि को मिट्टी में अच्छी तरह मिला कर पौध रोपण करना चाहिए। अगर पोधे पहले से लगा रखे है तो भी पौधो की उम्र के हिसाब से नीम खाद की मात्रा संतुलित करें।
एक से दो साल तक के पौधे में 1 किलो एवं 3 से 5 साल तक के पौधे में 2 से 3 किलो प्रति पौधे की दर से डाल कर पौधे की जडो के पास थाला बना कर मिट्टी में अच्छी तरह मिला कर पानी देना चाहिए तथा नीम तेल घुलनशील ड्रिप के साथ ही देना चाहिए।
किसान मित्रो बुवाई के पूर्व जमीन तैयार करते समय जमीन में पाए जाने वाले सभी प्रकार के कीट, दीमक, फंगस, वायरस, निमटोड्स, व्हाइट ग्रब, सूत्र कृमि व जमीन में अन्य पाए जाने वाले सभी शत्रु कीटो पर प्रभावी नियंत्रण और भूमि के पोषण के लिए (नीम खली में सभी 16 प्रकार के सूक्ष्म तत्व (Micronutrients) पाए जाते हैं, और सभी प्रकार की फसलों के ऊपर जैसे कपास, सोयाबीन, मक्का, आलू, लहसुन, प्याज, तरबूज, खरबूज, बैगन, मिर्च, टमाटर, भिंडी, टिन्डे व अन्य सभी सब्जियों में सभी प्रकार के रस चूसक कीटो, वाइरस, इल्ली, थ्रिप्स, माईट, वाइट फ्लाई, माहू, तेला, मिलीबग, अन्य सभी प्रकार की बीमारियों के रोगथाम के लिए प्राकृतिक रूप से उपलब्ध सबसे सस्ता और प्रभावी उपचार है।

नीम तेल का स्प्रे, नीम खली व पाउडर से भूमि उपचार ओर पीले-नीले कार्ड का उपयोग, सोलर ट्रैप का उपयोग सबसे सस्ता और प्रभावी है। अनार, अमरूद, अंगूर, जामुन, सीताफल, आम, एपल, बेर, चीकू और अन्य फलदार पौधों में नीम खली देने का समय आ चुका है।
वर्षा के समय
जड़ गलन, सड़न, फंगस निमेटोड और दीमक से बचाव के लिए बढ़िया क्वालिटी की नीम खली जो कि 12 प्रतिशत से अधिक तेल की मात्रा से युक्त होती है।
मात्रा:-
- एक साल तक के पौधे में एक किलो प्रति पौधा।
- एक साल से दो साल तक के पौधे में दो किलो प्रति पौधा।
इसी अनुपात में जितने साल का पौधा हो उतनी ही नीम खली डाल कर मिट्टी में मिला कर सिंचाई करे। इसके अलावा नीम तेल घुलनशील पानी में मिला कर या ड्रिप की वेंचुरी में डाल कर चलाएं और नीमेटॉड से छुटकारा पाएं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
