नीम खलीः आवश्यक एवं उपयोगी खाद      Publish Date : 27/01/2026

               नीम खलीः आवश्यक एवं उपयोगी खाद

                                                                                                                                   प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

पौधों के लिए नीम की खली एक उपयुक्त और लाभदायक जैविक खाद और कीटनाशक है, जिसे डालने से पौधों में अच्छा विकास एवं रोगों से सुरक्षा मिलती है। यह प्राकृतिक खाद हमारे पर्यावरण पर बिना किसी प्रकार का नुकसानदायक प्रभाव डाले हुए, लाभकारी होता है। भारत सरकार भी नीम खली युक्त खाद को बढ़ावा दे रही है।

नीम के पेड़ पर वर्ष में एक बार फल आते हैं, और इनका आकार छोटे-छोटे अंगूर की तरह होता है। इन फलों के अन्दर बीज होता है जो कि कड़ा एवं दलहनी प्रकार का होता है। नीम के बीज को सुखाकर मशीन द्वारा तेल निकाल लिया जाता है और बचे हुए अंश (खली) को नीम की खली के रूप में जाना जाता है।

यह एक प्रकार की जैविक खाद है जिसका प्रयोग हर प्रकार की फसलों पर किया जा सकता है। इसमें पौधों के लिए आवश्यक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस, तथा पोटैशियम जैविक कार्बन आदि तत्व प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। भारत सरकार की मानकीकरण की संस्था ब्यूरो आफ इंडियन स्टैंडस से नीम की खली को पौधों के लिए एक असरदार खाद के रूप में मान्यता मिली है।

1. नीम खली के प्रमुख फायदे

                                                 

नीम खली में पौधों की बढ़वार के लिए जरूरी पोषक तत्व पाये जाते हैं, जो कि निम्न प्रकार हैं:

नाइट्रोजन 2.0% से 5.0%

फास्फोरस : 0.5% से 1.0%

पोटैशियम : 1.0% से 2.0%

कैल्शियम : 0.5% से 5.0%

मैग्नीशियम 0.3% से 1.0%

गंधक : 0.2% से 3.0%

जस्ता : 15 पीपीएम से 60 पीपीएम

तांबा : 4 पीपीएम से 20 पीपीएम

आयरन : 500 पीपीएम से 1200 पीपीएम

मैंगनीज : 20 पीपीएम से 60 पीपीएम

इनके अलावा, सल्फर कम्पाउण्ड और कड़वे लिमोनायड्स की प्रचुर मात्रा नीम की खली में पायी जाती है।

2. कीटों एवं रोगों से बचाव

पौधों / फसलों में नीम की खली का प्रयोग करने से जड़ों में लगने वाली चीटियां, दीमक, फफूंद आदि जो जड़ों को नुकसान पहुंचाते है उनसे काफी हद तक बचा जा सकता है। नीम की खली में करीब 8-10% तेल की मात्रा पायी जाती है जो कि प्राकृतिक कीटनाशी का कार्य करता है, और इसके प्रयोग से फसलों पर कीड़ों का प्रकोप कम हो जाता है।

3. मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाये रखने में सहयोगी

नीम की खली में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्वों की उपलब्धता मृदा के स्वास्थ्य को उपजाऊ बनाती है। नीम की खली का प्रयोग करने से पौधों में क्लोरोफिल की मात्रा भी बढ़ती है जिससे पौधों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया बढ़ जाती है और पौधों में सर्वागीण विकास भी होता है, जिससे फसल से अपेक्षित उपज प्राप्त होती है।

4. नीम की खली डालने से मृदा में पोषक तत्वों की उपलब्धता देर तक बनी रहती है, क्योंकि यह मिट्टी में मिलनें के बाद लम्बे समय तक पोषक तत्व को धीरे-धीरे छोड़ता है, इससे पौधों में वृद्धि लगातार और अच्छी बनी रहती है। जिसके कारण फसलों को जल्दी-जल्दी खाद देने की जरूरत नहीं पड़ती।

5. नीम की खली एक किफायती खाद है, इसमें उपलब्ध माइक्रो व मैक्रो पोषक तत्व, जैविक यौगिक एक बार फसल में देने से फसल को पूरे जीवन चक्र में धीरे-धीरे मिलते रहते है, जिससे बार-बार खाद देने के खर्चों से बचा जा सकता है।

6. नीम की खली खेतों में प्रयोग करने से पोषक तत्व के साथ-साथ पौधों को रोगों एवं कीटाणुओं से भी बचाता है। जिससे पौधों की बढ़त के साथ-साथ आने वाले रोग/कीटकी समस्याओं से भी छुटकारा मिल जाता है। नीम के खली के प्रयोग द्वारा उत्पन्न खाद्य पदार्थों में घुन और भण्डारण कीट लगने की सम्भावना कम हो जाती है।

7. मिट्टी में नीम की खली मिलाने से उसकी क्षारीयता को भी कम किया जा सकता है, क्योंकि इसके प्रयोग से फैटी एसिड्स, एल्डिहाइड्स, कीटोन्स, अमीनो एसिड्स, कार्बोहाइड्रेट्स, मुक्त सल्फर भी मिट्टी में पहुंचता है, जो कि पौधों के सर्वागीण विकास के लिए हितकारी होता है।

8. नीम की खली को यूरिया से बेहतर बताया गया है, क्योंकि यूरिया मिट्टी से पोषक तत्वों को खींचने का कार्य करता है, जिसके कारण कुछ समय बाद मिट्टी की संरचना बदलने लगती है। वही नीम की खली प्रयोग करने से मृदा को भरपूर पोषक तत्व के साथ-साथ मृदा को उपजाऊ बनाता है।

9. इसके प्रयोग से मृदा की संरचना में सुधार के साथ-साथ पानी रोकने की क्षमता भी बढ़ती है जो कि पौधों के सर्वागीण विकास के लिए बहुत आवश्यक होता है।

                                                       

10. रसायनिक कीटनाशक कीटों के नर्वस सिस्टम पर असर डालते है। लेकिन लगातार रसायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से इनका असर कीटों पर कमजोर पड़ने लगता है। जबकि नीम की खली कीटों पर हार्मोनल प्रभाव डालता है जिससे कीटों का पौधों को खाना, प्रजनन करना रूक जाता है, साथ ही कीटों के अन्दर इसके प्रतिरोधी गुण नहीं बन पाते।

पौधों में नीम की खली डालने की प्रयोग विधि

  • नीम की खली पट्टी या पाउडर के रूप में मिलती है। इसे खाद व कीटनाशक दोनों प्रकार से प्रयोग किया जा सकता है।
  • यदि इसका प्रयोग गमलों में किया जाना है तो माह में एक बार अवश्य करें।
  • प्रयोग संतुलित मात्रा में करना चाहिए, बहुत ज्यादा डालने की आवश्यकता नहीं।
  • इसका प्रयोग गमलों में पौध लगाते समय मिट्टी में मिलाकर एवं बाद में ऊपर से भी दिया जा सकता है।
  • मिट्टी की गुड़ाई करके पानी मिट्टी की ऊपरी परत को खोदकर नीम की खली चूर करके मिला देना चाहिए।
  • नीम की खली को पानी में घोलकर पौधों पर छिड़काव करें। जिससे रोग व कीटों से बचा जा सकता है।

सारांश

इन दिनों घर का स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण युक्त होना महत्वपूर्ण हो गया है, जिसके कारण विभिन्न प्रकार के पौधों को घर के बाहर व अन्दर लगाया जाने लगा है, जिससे घर में अच्छी हवा और शुद्ध पर्यावरण के साथ अच्छी सज्जा का कार्य किया जा सकता है। लेकिन मानसून के मौसम में पौधों की देखभाल करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है, क्योंकि इस मौसम में पौधों को अनेक समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है और लोग परेशान हो जाते है। अगर आप इस प्रकार की समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो आप अपने घर के आस-पास लगे पौधों के साथ-साथ इनडोर पौधों की सफलतापूर्वक उगाने एवं देखरेख के लिए नीम की खली/पाउडर का प्रयोग करके पौधों के उचित बढ़वार के साथ-साथ विकास में सहयोग प्रदान कर सकते हैं।

नीम का प्रयोग खेती-बाड़ी में लगातार बढ़ता जा रहा है। बाजार में अब नीम खली के साथ-साथ नीम कोटेड यूरिया आने लगा है। नीम तेल के लेप से जहां यूरिया की उपयोगिता बढ़ी है, वही यूरिया की काला बाजारी पर भी रोक लगी है। इस प्रकार से नीम की खली के साथ-साथ अन्य उत्पाद भी फसलों के लिए उपयोगी के साथ-साथ हमारे स्वास्थ्य के लिए भी अत्यन्त उपयोगी है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।