धान में थ्रिप्स प्रबंधनः नर्सरी की सुरक्षा      Publish Date : 03/08/2026

      धान में थ्रिप्स प्रबंधनः नर्सरी की सुरक्षा

                                                                                         प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

धान में थ्रिप्स प्रबंधन: नर्सरी की सुरक्षा के प्रभावी उपाय क्योंकि थ्रिप्स धान की फसल की शुरुआती अवस्था में पहुंचाते हैं नुकसान।

धान की नर्सरी में थ्रिप्स पत्तियों का रस चूसकर पौधों की वृद्धि को प्रभावित करते हैं। अतः फसल की शुरुआती अवस्था में ही इनका नियंत्रण स्वस्थ पौध तैयार करने के लिए बहुत अधिक महत्वपूर्ण होता है।

                                 

इसके सम्बन्ध में ICAR-CRRI के द्वारा थ्रिप्स की रोकथाम और नियंत्रण दोनों के लिए ही कुछ उपाय बताए हैं। जिनमें से पहला है-

बीज उपचार कर बुवाई करें

बुवाई के समय बीज का उपचार-

थायमेथोक्साम 70 Ws /1.5 मि.ली./किग्रा बीज की दर से बीजोपचार करने की सलाह दी गई है।

फसल में थ्रिप्स का प्रकोप होने के बाद

यदि नर्सरी में थ्रिप्स दिखाई दें तो इनमें से किसी एक का प्रयोग आप कर सकते हैं-

  • एजाडिरैक्टिन 0.15%
  • लैम्ब्डा-सायहेलोथ्रिन 5 EC
  • थायमेथोक्साम 25 WG

अनुशंसित मात्रा में 200 लीटर पानी प्रति एकड़ के साथ छिड़काव करने से लाभ मिलता है।

नियमित रूप से निगरानी करें

                                    

नर्सरी का समय-समय पर निरीक्षण करने से थ्रिप्स का प्रारंभिक अवस्था में नियंत्रण संभव होता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।