आम का तना छेदक कीट, पहचान, हानि और प्रबन्धन      Publish Date : 17/06/2026

आम का तना छेदक कीट, पहचान, हानि और प्रबन्धन

                                                                                        प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

आम को फलों का राजा कहा जाता है और भारत, विश्व में आम उत्पादन करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। देश के उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और पश्चिम बंगाल आदि राज्यों में बड़े पैमाने पर आम की खेती की जाती है। आम न केवल एक स्वादिष्ट फल है, बल्कि यह किसानों की आय का भी एक महत्वपूर्ण स्रोत है। परंतु आम की फसल पर अनेक प्रकार के कीट एवं रोग भी आक्रमण करते रहते हैं, जिससे आम का उत्पादन और उसकी गुणवत्ता दोनों प्रभावित होते हैं।

इन हानिकारक कीटों में सबसे आम “आम का तना छेदक कीट” जो कि अत्यंत विनाशकारी माना जाता है। आम का तना छेदक कीट एक प्रकार का भृंग (Beetle) है, और इसका वैज्ञानिक नाम Batocer a rufomaculata है। यह कीट मुख्य रूप से आम के पेड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन कभी-कभी अन्य फलदार एवं वन वृक्षों पर भी पाया जाता है। इस कीट की सूंडी अवस्था सबसे अधिक हानिकारक होती है, क्योंकि सूंडी तने के अंदर प्रवेश करके पेड़ की लकड़ी को खाती रहती है। यह कीट सामान्यतः पुराने एवं कमजोर पेड़ों पर अधिक आक्रमण करता है, परंतु अनुकूल परिस्थितियों में स्वस्थ पेड़ भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। जिन बागों की उचित साफ-सफाई नहीं की जाती तथा पेड़ों की नियमित देखभाल नहीं की जाती, वहाँ इसका प्रकोप अधिक देखने को मिलता है।

कीट की पहचानः

                                  

1. अंडा: मादा कीट पेड़ की छाल की दरारों या कटे हुए भागों में अंडे देती है। अंडे सफेद रंग के तथा आकार में छोटे होते हैं। एक मादा कई अंडे दे सकती है।

2. सूंडी:

  • इस कीट की सूंडी हल्के पीले या क्रीम रंग की होती है।
  • कीट का शरीर मोटा एवं मुलायम होता है।
  • कीट का सिर भूरा तथा मजबूत जबड़ों वाला होता है।
  • यही अवस्था सबसे अधिक नुकसान पहुँचाती है। सूंडी तने के अंदर सुरंग बनाकर लकड़ी खाती रहती है। इसके कारण पेड़ की पोषक तत्वों को ले जाने की क्षमता प्रभावित होती है।

3. प्यूपा: सूंडी कुछ समय बाद तने के अंदर ही प्यूपा अवस्था में परिवर्तित हो जाती है। यह अवस्था संक्रमण की अंतिम अवस्था होती है।

4. वयस्क कीट:

  • यह बड़े आकार वाला भृंग होता है।
  • इसका शरीर धूसर या भूरे रंग का होता है।
  • कीट के शरीर पर सफेद या पीले धब्बे पाए जाते हैं।
  • इसकी लंबी मूंछें इसकी मुख्य पहचान हैं। वयस्क कीट रात में अधिक सक्रिय रहता है तथा पेड़ों की छाल पर बैठा दिखाई देता है।

कीट का जीवन चक्र: आम का तना छेदक कीट अपना जीवन चक्र चार अवस्थाओं में पूरा करता है। अंडा, सूंडी, प्यूपा एवं वयस्क।

अंडा अवस्था: मादा कीट तने की दरारों में अंडे देती है। लगभग 1-3 सप्ताह में अंडों से सूंडी निकलती है।

                                    

सूंडी अवस्था: यह इस कीट की सबसे लंबी एवं विनाशकारी अवस्था होती है। सूंडी तने के अंदर घुसकर लकड़ी को खाती है तथा सुरंग बनाती रहती है। यह अवस्था कई महीनों तक चल सकती है।

प्यूपा अवस्था: पूर्ण विकसित सूंडी तने के अंदर ही प्यूपा बन जाती है। कुछ समय बाद इससे वयस्क कीट निकलता है।

वयस्क अवस्था: वयस्क कीट बाहर निकलकर पुनः प्रजनन करता है और नया जीवन चक्र शुरू हो जाता है।

तना छेदक कीट से होने वाला नुकसान

1. तने में छेद: सूंडी तने के अंदर लंबी सुरंगें बनाती है, जिससे पेड़ कमजोर होने लगता है।

2. बुरादा निकलना: तने के छेदों से भूरे रंग का चूरा या बुरादा निकलता दिखाई देता है। यह इस कीट की प्रमुख पहचान है।

3. शाखाओं का सूखना: प्रभावित शाखाओं में पोषक तत्वों का प्रवाह रुक जाता है, जिससे शाखाएँ सूखने लगती हैं।

4. फल उत्पादन में कमी: पेड़ कमजोर होने के कारण फल कम लगते हैं तथा उनकी गुणवत्ता भी खराब हो जाती है।

5. पेड़ का मरना: अत्यधिक प्रकोप होने पर पूरा पेड़ सूख सकता है।

समग्र कीट प्रबंधन: तना छेदक कीट के नियंत्रण के लिए केवल रासायनिक दवाओं पर निर्भर रहना ही उचित नहीं होता है। अतः इसके लिए समग्र प्रबंधन अपनाया जाना चाहिए।

1. सस्यन नियंत्रण:

बगीचे की साफ-सफाई: सूखी एवं संक्रमित शाखाओं को काटकर नष्ट करना चाहिए। इससे कीट का प्रसार कम होता है।

संतुलित पोषण: पेड़ों को उचित मात्रा में खाद एवं उर्वरक देने से उनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।