
ग्रीष्मकालीन चूसक कीटों बचाव के लिए विशेष एडवाइजरी Publish Date : 01/06/2026
ग्रीष्मकालीन चूसक कीटों बचाव के लिए विशेष एडवाइजरी
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं गरिमा शर्मा
अपनी फसल को बचाएं, उपज बढ़ाएं समय पर पहचान, सही नियंत्रण- अधिक उत्पादन की गारंटी।
एनपीके
- चूसक कीटों की समय पर पहचान करें, नुकसान से बचें।
- सही प्रबंधन से उपज हानि को रोकें।
- खेत में नमी का संतुलन बनाए रखें।
- संतुलित उर्वरक प्रयोग से पौधों की शक्ति बढ़ाएं।
- अनुशंसित कीटनाशकों का सही समय पर छिड़काव करें।
काला चिट्टा (ब्लैक बग)

थ्रिप्स: प्रमुख ग्रीष्मकालीन चूसक कीट एवं लक्षण
सैनिक कीट (पत्ती खाने वाला कीट): काले रंग का कीट पील व शिशु दोनों पत्तियों का रस चूसता है।
- पत्तियां पीली होकर उन पर कवाई रंग के धब्बे पाएं जाते हैं।
- अधिक तापमान व शुष्क मौसम अप्रैल से जून में पैदी करने में अधिक प्रभावी दिखाई देता है।
- इसके शिशु प्रवकंडुक एवं गन्ने के गाँठ के मध्य पाएं जाते है, जो पत्तियों का रस चूसते हैं जिससे कारण गन्ने की बढ़वार रुक जाती है।
- थ्रिप्स आकार में लगभग 2-3 मिमी. के होते हैं। मादा कीट गहरे भूरे रंग के व नर कीट हल्के रंग के होते हैं।
- थ्रिप्स पत्ती की ऊपरी सतह के अंदर अंडा देते हैं व निम्स निकलकर पत्ती का रस चूसते हैं। जिससे पत्ती का अपम्माग घुड़कर सूबीला हो जाता है।
- प्रभावित पत्तियों ऊपर से नीचे की ओर सफेद / पीली व खांबी जैसी लगती है।
- वर्षा के प्रारम्भ होते ही इनकी संख्या कम होने लगती है।
- इस कीट की सूंडी अवस्था गन्ने की पत्तियों को खाती है।
- मादा कीट एककंड में एक समूह में अंडे देती है। इन अंडों समूहों से 4-5 दिनों बाद छोटी-छोटी सूड़ियां निकलकर शाम के समय पत्तियों को भांति समूह में पत्तियों को खाती है। दिन के समय सूडियां जमीन के अंदर सूखी पत्तियों, प्रवकरके एवं गाँठ में छिपी रहती है।
- पैदी फसल में इस कीट का प्रकोप अधिक होता है।
चूसक कीटों के नियंत्रण हेतु उपाय

- नियमित अंतराल पर सिंचाई करें और खेत में नमी बनाए रखें।
- खेत को खरपतवार एवं सूखी पत्तियों से मुक्त रखें।
- अनुशंसित कीटनाशक, सुबह या शाम को निम्न में से किसी एक कीटनाशक का प्रति हैक्टेयर की दर से लगभग 625 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
- साइपरमेथ्रिन, कीटनाशक का छिड़काव सुबह या शाम के समय करें।
- प्रति हेक्टेयर लगभग 625 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
किसानों से अनुरोध है कि इस एडवाइजरी का व्यापक स्तर पर पालन करें, नियमित रूप से अपने खेत की निगरानी करें और समय रहते उपरोक्त उपाय अपनाकर अपनी फसल को सुरक्षित रखें व अधिक उत्पादन प्राप्त करें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
