गन्ने में पायरिला कीट का प्रकोप एवं बचाव      Publish Date : 30/05/2026

  गन्ने में पायरिला कीट का प्रकोप एवं बचाव

                                                                                           प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

अभी Pyrilla (फड़का) के प्रकोप की बहुत खबरे आ रही है। जिन क्षेत्रों में गन्ने के पौगले छोड़े जाते है वहां इसका अधिक प्रकोप देखने को मिल रहा है। इनके अधिक संख्या में होने से किसान परेशान भी दिख रहा है। इसी कारण से कुछ किसान भाई कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करते भी देखे गए। अभी हाल ही में मैंने कुछ मिलो का दौरा करने पर पाया कि फड़का का परजीवी देखने को मिला है जैसा कि नीचे के फोटो में देखा जा सकता है।

                               

ऐसी स्थिति में किसानो को क्या करना चाहिए, यह सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैः

1.   फड़का के लिए किसानों को किसी भी रसायन/कीटनाशक का छिड़काव नहीं करना चाहिए। क्योंकि कीटनाशक का प्रयोग करने से फड़का बगल के खेतों में चला जाता है और फसल पर दवा का प्रभाव खत्म होने पर पुनः वापस आ जाता है।

2.   कीटनाशक का प्रयोग करने से किसानों के दो तरह के नुकसान होते हैं। इनमें पहला है धन का नुकसान और दूसरा है कि इससे फड़का का परजीवी मर जाता है।

3.   इससे बचाव के लिए किसानों को केवल खेतों की नियमित रूप से सिंचाई करते रहना है। ऐसा करने से इसका परजीवी तेजी से बढ़ता है।

4.   अतः मेरी सभी किसान भाईयों से अपील हैं कि वह पायरिला पर कीटनाशकों का छिड़काव कदापि नहीं करे, खेतों में सिंचाई करते रहे बाक़ी सब फड़का के परजीवी एवं भगवान पर छोड़ दे तथा अपनी फसल एवं नुकसान से बचाएं।

पायरिला कीट के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी

                                

वैज्ञानिक नामः Pyrilla perpusilla

अन्य नामः गन्ने का पादप हॉपर

प्रकारः यह एक प्रकार का पंखवाला कीट है जो पौधों की पत्तियों का रस चूसता है।

नुकसानः यह कीट गन्ने की फसल को भारी नुकसान पहुंचाता है, जिससे पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और फसल की वृद्धि रुक जाती है।

कीट का जीवन चक्रः

अंडेः हल्के पीले रंग के, अंडाकार, पत्ती की निचली सतह पर लगभग 20 अंडों के समूहों में पाए जाते हैं।

निम्फः शुरू में हरे रंग के होते हैं, बाद में हल्के भूरे, पंख रहित और सफेद फुल्की मोमी सामग्री से ढके तंतुओं की एक जोड़ी के साथ रहते हैं।

वयस्कः भूरे से भूरे रंग के होते हैं, 7-8 मिमी लंबे, नुकीले थूथन वाले छेदने वाले और चूसने वाले मुंह वाले हिस्से होते हैं।

कीट के प्रकोप का समयः गर्मियों के दिनों में, विशेष रूप से अप्रैल से अक्टूबर तक कीट का प्रकोप अधिक देखा जाता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।