जैविक कीट प्रबंधन में अति उपयोगी है अँड परजीवी ट्राइकोग्रामा      Publish Date : 08/02/2026

जैविक कीट प्रबंधन में अति उपयोगी है अँड परजीवी ट्राइकोग्रामा

                                                                                                                             प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

जैविक कीट प्रबंधन करने में बहुत उपयोगी होता है अँड परजीवी ट्राइकोग्रामा। वर्तमान में सम्पूर्ण विश्व में रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को देखते हुए जैविक खेती पर बहुत ही अधिक जोर दिया जा रहा है और इस कार्य हेतु अँड परजीवी ट्राइकोग्रामा एक वरदान रूपी कीट नियंत्रक है, क्योकि यह जैविक कीट प्रबंधन का एक सटीक साधन है। विश्व में इस अँड परजीवी (ट्राइकोग्रामा) की 18 प्रजातियों का नाशीजीव प्रबंधन में सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है।

इस मित्र कीट का प्रयोग रसायन-मुक्त कीट नियंत्रण का एक कारगर उपाय है, जिसमें शत्रु-कीटों का उनके अंडावस्था में ही सर्वनाश हो जाता है तथा फसल की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। साथ ही कीटनाशक दवाओं पर होने वाला खर्च भी काफी हद तक कम हो जाता है और विष-मुक्त अनाज एवं सब्जियां आसानी से उगाई जा सकती है।

अँड परजीवी,ट्राईकोग्रामा एक अतिसूक्ष्म आकार का एक किसान मित्र कीट है, जिन्हें खेतो में आसानी से देख पाना बहुत ही कठिन होता है, परन्तु प्रयोगशालाओं में इन्हें आसानी से सूक्ष्मदर्शी यंत्र के माध्यम से देखा जा सकता है। इसका बहुगुणन प्रयोगशालाओं में किया जाता है तथा बाद में इन्हें खेतो में छोड़ दिया जाता है। यह एक प्रकार का अंड-परजीवी किसान मित्र कीट है, जो शत्रु कीट के अण्डों में अपना अंडा देकर उन्हें अंडावस्था में ही नष्ट कर देते है और शत्रु कीट के अंडे से मित्र कीट ट्राइकोग्रामा का वयस्क कीट बाहर निकाल आता है, जो पुनः शत्रु कीट में अपना अंडा देता है।

                                            

इनका जीवन चक्र बहुत छोटा होता है तथा एक फसल अवधि में इसकी अनेक पीढ़ियाँ पूरी हो जाती हैं। इस प्रकार इनकी संख्या शत्रु कीट की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है, तथा ये शत्रु कीटों के अण्डों को खेतों में नष्ट करके उनकी संख्या को काबू में रखता है।

हमारे देश में ट्राईकोग्रामा की प्रायः दो प्रजातियों का बहुतायात से प्रयोग होता हैः

  • ट्राइकोग्रामा चिलोनिस (T. chilonis): यह भारत में सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली प्रजाति है, जो गन्ने के बेधक (borer), कपास की सुंडी और अन्य फसलों के कीटों पर प्रभावी है।
  • ट्राइकोग्रामा जैपोनिकम (T. japonicum): धान के स्टेम बोरर (तना छेदक) और अन्य फसलों के लिए प्रमुख।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।