
खेत में गन्ने की सूखी पत्तियों को न जलाएं किसान Publish Date : 28/11/2025
खेत में गन्ने की सूखी पत्तियों को न जलाएं किसान
प्रायः देखा गया है कि कुछ किसान भाई अज्ञानतावश गन्ने की पत्तियों को खेत में जलाकर नष्ट कर देते हैं, जिससे आर्थिक एवं पर्यावरणीय हानि होती है। गन्ने में सूखी पत्ती की मात्रा गन्ने की प्रजाति, फसल उम्र, मिट्टी के प्रकार और मौसम आदि कारकों पर निर्भर करती है। वैसे आमतौर पर यह फसल के कुल बायोमास का लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक होती है। किसान भाईयों को सलाह इी जाती है कि वह गन्ने की पत्ती का कुशल प्रबन्धन कर उसका जैविक खाद बनाएं और अपनी भूमि की उर्वरता को बढ़ाएं।
गन्ने की पत्ती को जलाने से होने वाली हानियां-

- खेत में गन्ने की पत्ती को जलाने से जमीन का तापमान बढ़ जाता है जिससे कृषि मित्र कीट समाप्त हो जाते हैं।
- भूमि के अंदर रहने वाले सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और उनकी संख्या कम हो जाती है।
- गन्ने की पत्ती को खेत में जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति कम होती है।
- खेत में पत्ती जलाने से अगली फसल की पानी की माँग बढ़ जाती है।
- खेत में गन्ने की पत्ती को जलाने से हमारा वायुमण्ड़ल प्रदूषित हो जाता है।
- इस क्रिया से किसानों को वैधानिक समस्या से भी जूझना पड़ सकता है।
गन्ने की पत्तियों का उचित प्रबन्धन करने से प्राप्त लाभ
- मृदा की नमी को बनाए रखने में सहायक है। इससे 30 से 40 प्रतिशत तक सिंचाई के पानी की बचत की जा सकती है।
- पत्ती का उचित प्रबन्धन करने से खरपतवारों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है जिससे निराई-गुड़ाई आदि के व्यय में कमी आती है और किसान के लाभांश में बढ़ोत्तरी होती है।
- मृदा के अंदर जीवांश पदार्थ की बढ़ोत्तरी होती है, पत्ती का लगातार दो वर्ष तक उचित प्रबन्धन करने से मृदा में 0.2 से 0.5 प्रतिशत तक जीवांश की बढ़ोत्तरी होती है।
- मृदा के अंदर कृषि मित्र कीटों एवं केंचुओं की संख्या में व्यापक बढ़ोत्तरी होती है।
- गन्ने की प्रति टन पत्ती से 54 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 13 कि.ग्रा. फॉस्फोरस तथा 31 कि.ग्रा. पोटाश का लाभ प्राप्त होता है।
- गन्ने की पत्ती का उचित प्रबन्धन करने से किसानों को किसी वैधानिक चुनौति का सामना भी नहीं करना पड़ता है।
