
तार्किक गणित भी दिलचस्प लगे Publish Date : 08/11/2026
तार्किक गणित भी दिलचस्प लगे
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
गणित को केवल सूत्रों और जटिल हल याद करने तक सीमित रखने से कई छात्रों में डर पैदा हो जाता है और वे इसके वास्तविक उपयोग को समझ नहीं पाते। इसीलिए 'मैथ-ईश थिंकिंग' (Math-ish Thinking) पद्धति को अपनाना जरूरी है, जिसमें सवालों को व्यावहारिक तरीके से समझने पर जोर दिया जाता है, न कि सही उत्तर पाने पर। इससे गणित आसान, रोचक और रोजमर्रा की जिंदगी में उपयोगी लगने लगता है।
क्या हैं इसके मायने:
यह तरीका आपको यह समझने में मदद करता है कि जिन नियमों और सूत्रों का आप उपयोग कर रहे हैं, वे वास्तव में आपको समझ में आ रहे हैं या नहीं। यह पद्धति केवल सही उत्तर पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आपकी सोच और समझ को व्यापक बनाने पर जोर देती है। उदाहरण के तौर पर, किसी जगह तक पहुंचने का समय हम अक्सर सटीक नहीं, बल्कि अनुमान के आधार पर तय करते हैं-जैसे लगभग पांच घंटे तीस मिनट। इस तरह की सोच गणित को सिर्फ परीक्षा तक नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी उपयोगी बनाती है।
प्रयास के स्थान पर अनुमान:

हर बार बिल्कुल सटीक उत्तर निकालने पर ध्यान देने के स्थान पर, पहले अनुमान लगाकर सोचने की आदत ज्यादा उपयोगी होती है। इससे आप यह समझ पाते हैं कि सही उत्तर किस दायरे में होगा और उसी आधार पर जल्दी व सही निर्णय ले सकते हैं। खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं या समय-सीमित परिस्थितियों में यह तरीका बेहद मददगार साबित होता है, क्योंकि आप कई गलत विकल्पों को तुरंत हटा सकते हैं। उदाहरण के लिए, जब आपसे दो भिन्नों को जोड़ने के लिए कहा जाता है, तो सीधे लंबी गणना करने के बजाय आप पहले ही उनका अनुमान लगा सकते हैं कि उत्तर लगभग कितना होगा।
'क्यों' की तलाश:
गणित में केवल नियम याद करना ही काफी नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि हम उन्हें क्यों अपनाते हैं। 'मैथ-ईश थिंकिंग' इसी समझ पर जोर देती है, जिससे आप भिन्नों और अन्य अवधारणाओं को वास्तविक जीवन से जोड़कर आसानी से समझ पाते हैं। इससे गणित रटने वाला विषय नहीं रहता, बल्कि समझने और इस्तेमाल करने का कौशल बन जाता है।
साथ ही, आप इस पद्धति को रोजमर्रा की जिंदगी में सहजता से लागू कर पाते हैं, जिससे यह विषय अधिक सरल और रोचक लगता है।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।