समय नहीं, गुणवत्ता पर दें ध्यान      Publish Date : 01/11/2026

         समय नहीं, गुणवत्ता पर दें ध्यान

                                                                                                                  प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

  • आप कितने घंटे पढ़ते हैं यह नहीं, महत्वपूर्ण है कि आप कितनी गहनता से विषय को समझते हैं-

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अधिकांश विद्यार्थी एक समस्या का सामना तकरीबन हर रोज करते हैं। सुबह वे कई लक्ष्य बनाते हैं- सामान्य ज्ञान, करेंट अफेयर्स, गणित आदि विषय पढ़ने हैं, मॉक टेस्ट देना है और उत्तर लेखन का अभ्यास भी करना है। लेकिन दिन खत्म होने पर अहसास होता है कि कुछ काम तो रह गया। पूरा दिन व्यस्त रहने के बावजूद संतुष्टि नहीं मिलती। इसका वजह समय की कमी नहीं, बल्कि प्राथमिकताओं का स्पष्ट न होना है। प्रतियोगी परीक्षा में सफलता केवल अधिक घंटे पढ़ने से नहीं मिलती, बल्कि सिलेबस को समझकर व अपनी कमियों को जानकर, उसी अनुसार रणनीति बनाकर उस पर काम करने से मिलती है।

अपनी प्राथमिकता तय करें

                              

अक्सर विद्यार्थी जरूरी और आसान काम में अंतर नहीं कर पाते। वे सबसे पहले वही काम शुरू कर देते हैं, जो उन्हें पसंद होता है या जिसमें वे पहले से अच्छे होते हैं। कठिन विषय, मॉक टेस्ट या उत्तर लेखन जैसे महत्वपूर्ण कार्य बाद के लिए छोड़ दिए जाते हैं। ऐसा करने से बचें। दिन की शुरुआत हमेशा उस काम से करें, जिसका परीक्षा में सबसे अधिक महत्व है और जिसे टालने की आदत बन चुकी है। स्वयं से केवल एक सवाल पूछिए, 'अगर आज मैं सिर्फ एक ही काम पूरा कर पाऊं, तो वह कौन-सा होना चाहिए?' यही सवाल आपकी प्राथमिकता तय कर देगा।

भटकाव से बचें

आज सबसे बड़ी समस्या पढ़ाई की नहीं, बल्कि ध्यान भटकने की है। कभी कोई नया यूट्यूब वीडियो, कभी किसी टॉपर की नई रणनीति, तो कभी नई किताब की चर्चा, इन सबके बीच विद्यार्थी अपनी तय योजना भूल जाते हैं। हर सलाह आपके लिए सही हो, यह जरूरी नहीं है। बार-बार किताबें, नोट्स या रणनीति बदलने से तैयारी मजबूत नहीं होती, बल्कि कमजोर पड़ जाती है। सीमित और विश्वसनीय अध्ययन सामग्री चुनिए, उसी पर भरोसा रखिए और बार-बार दोहराइए। परीक्षा में सफलता अधिक संसाधनों से नहीं, बल्कि उनके सही उपयोग से मिलती है।

पढ़ाई के घंटे न गिनें

                                    

कई विद्यार्थी रोज 10 से 12 घंटे पढ़ने का लक्ष्य तो पूरा कर लेते हैं, लेकिन कुछ सप्ताह बाद भी उन्हें लगता है कि तैयारी आगे नहीं बढ़ रही। इसका कारण यह है कि वे केवल पढ़ रहे हैं, सीख नहीं रहे। हर मॉक टेस्ट के बाद गलतियों का विश्लेषण करना, कमजोर विषयों पर अतिरिक्त समय देना, नियमित पुनरावृत्ति करना और सीखी हुई बातों को दोबारा याद करना ऐसे प्रयास हैं, जिनका लाभ लगातार बढ़ता जाता है। यदि रोज थोड़ा-सा सुधार भी हो रहा है, तो वही आगे चलकर बड़ा अंतर पैदा करेगा, और इसका असर आपके परीक्षा परिणाम में भी दिखेगा।

मुश्किल विषय से न भागें

हर विद्यार्थी का कोई न कोई कमजोर विषय होता है। कोई गणित से डरता है, कोई रीजनिंग से, तो कोई उत्तर लेखन या अंग्रेजी से बचता है। अधिकांश छात्र यही सोचकर कठिन विषय टालते रहते हैं कि पहले आसान हिस्सा पूरा कर लें, बाद में इसे देखेंगे। यही आदत सबसे बड़ी गलती बन जाती है। स्वयं से ईमानदारी से पूछिए कि क्या आप किसी विषय को इसलिए छोड़ रहे हैं, क्योंकि वह महत्वपूर्ण नहीं है या इसलिए क्योंकि वह कठिन लगता है? यदि कारण कठिनाई है, तो समझिए कि आपकी सफलता उसी चुनौती के पीछे छिपी है। याद रखिए, प्रतियोगी परीक्षा में सफल वही विद्यार्थी होते हैं, जो पूरे दिन हर काम करने की कोशिश नहीं करते, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण काम को सबसे पहले पूरा करते हैं।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।