
कोरियाई भाषा के जानकारों की बढ़ती मांग Publish Date : 22/10/2026
कोरियाई भाषा के जानकारों की बढ़ती मांग
प्रो0 आर. एस. सेंगर
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कोरियाई भाषा का अध्ययन करना केवल एक भाषा से सम्बन्धित कौशल नहीं, बल्कि युवाओं के लिए एक अच्छा करियर निवेश भी बन चुका है।
पिछले कुछ वर्षों में कोरियाई संस्कृति की लहर, जिसे ह ल्यू भी कहा जाता है, दुनिया भर में फैल चुकी है और भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है। कोरियाई भाषा मात्र मनोरंजन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे कई युवा कोरियन भाषा सीखने के लिए प्रेरित हुए हैं। आने वाले समय में भारत और कोरिया के बीच व्यापार, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और पर्यटन के बढ़ते संबंधों से कोरियाई भाषा सीखने वालों के लिए मौके और बढ़ेंगे।
इसलिए कोरियाई भाषा का अध्ययन केवल एक भाषा कौशल नहीं, बल्कि एक अच्छा करियर निवेश बन गया है। कोरियाई भाषा सीखने से भारतीय युवाओं को सांस्कृतिक समझ बढ़ाने के साथ-साथ नए रोजगार और करियर अवसर भी मिल रहे हैं।
कोरियाई भाषा के गुण
भाषा की सरल संरचना
आज कोरियाई भाषा केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्र इसे गीतों, सबटाइटल्स और ऑनलाइन कोर्सों के माध्यम से भी सीख रहे हैं। कोरियाई लिपि हांगुल की तार्किक और सरल संरचना कई लोगों को आकर्षित करती है। कई विद्यार्थी अपने नाम हांगुल में लिखने का अभ्यास करते हैं और ‘अन्योंगहासेयो’ (नमस्ते) तथा ‘खामसाहामनिदा’ (धन्यवाद) जैसे बुनियादी अभिवादन भी सीखते हैं।
नए कोरियाई पाठ्यक्रम

भारतीय विश्वविद्यालयों और सांस्कृतिक संस्थानों ने इस बढ़ती रुचि को पहचानते हुए कोरियाई भाषा के पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। नई दिल्ली स्थित कोरियाई सांस्कृतिक केंद्र और कई शैक्षणिक संस्थान कोरियाई भाषा की कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। वहीं, कई विश्वविद्यालयों में प्रथम वर्ष के बीटेक छात्रों के लिए कोरियाई भाषा का पाठ्यक्रम भी शामिल किया गया है।
कोरियाई भाषाः एक संस्कृति
कोरियाई संस्कृति का प्रभाव केवल भाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक संवेदनशीलता और सहानुभूति को भी बढ़ाता है। कोरियाई समाज में पारिवारिक संबंध, बड़ों का सम्मान और सामाजिक सामंजस्य जैसे मूल्य पाए जाते हैं, जो भारतीय परंपराओं से काफी हद तक मेल भी खाते हैं। हालांकि, सोशल मीडिया से सीखी गई भाषा की अपनी सीमाएं भी होती हैं।
इसलिए, शिक्षक सलाह देते हैं कि विद्यार्थियों को सोशल मीडिया से सीखने के साथ-साथ कक्षा शिक्षण को भी जोड़ना चाहिए, ताकि भाषा का सही ज्ञान प्राप्त हो सके।
नौकरियों की भरमार

भारत में सैमसंग, हुंडई, एलजी, किआ और पोस्को जैसी बड़ी कोरियाई कंपनियों में ऐसे कर्मचारियों की जरूरत होती है, जो कोरियाई भाषा, संचार शैली और कार्य संस्कृति को अच्छे से समझते भी हों। इसके अलावा अनुवादक, दुभाषिया, टूर गाइड और अंतरराष्ट्रीय व्यापार सलाहकार जैसे क्षेत्रों में भी कोरियाई भाषा के जानकारों की मांग बढ़ रही है।
कोरियाई दूतावास, कोरियाई सांस्कृतिक केंद्र और कई शिक्षण संस्थान भी प्रशिक्षित शिक्षकों की तलाश करते रहते हैं। साथ ही फ्रीलांसिंग, ऑनलाइन शिक्षण, वर्चुअल कंटेंट निर्माण और मीडिया सब-टाइट्लिंग जैसे क्षेत्रों में भी इस भाषा का ज्ञान लाभदायक साबित हो रहा है।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।