
रटें नहीं बल्कि कॉन्सेप्ट को समझें Publish Date : 21/10/2026
रटें नहीं बल्कि कॉन्सेप्ट को समझें
प्रो0 आर. एस. सेंगर
रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) ने अपनी ग्रुप-डी की कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) की तारीख घोषित कर दी है। हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में कामयाबी पाने के लिए एक जैसी किताबें पढ़ते हैं, एक जैसे यूट्यूब चैनल देखते हैं और वही पुराने शॉर्टकट ट्रिक्स भी सीखते हैं। चूंकि, इस परीक्षा में प्रतिस्पर्धा बेहद कठिन होती है। ऐसे में, आपको यह सोचना चाहिए कि आप परंपरागत तैयारी के साथ ऐसा क्या नया करें, जो आपकी कम्पटीशन में दूसरों से आगे खड़ा कर दे।
नया चैप्टर या टॉपिक पढ़ने से बचें
कई अभ्यर्थी परीक्षा नजदीक आते ही नई किताबें खरीदना शुरू कर देते हैं। कोई नया यूट्यूब चैनल, नई पीडीएफ या नए ट्रिक्स खोजने लगते हैं। आप ऐसा करने से बचें। परीक्षा से लगभग एक महीना पहले से कोई भी नया चैप्टर या टॉपिक न पढ़ें। अगर आपने किसी विषय को तीन बार पढ़ लिया है, तो चौथी बार उसका रिवीजन किसी नए अध्याय को पढ़ने से कहीं ज्यादा लाभ मिलेगा।
रटना छोड़कर, विजुअलाइज करें
अब इस परीक्षा में विज्ञान से सीधे सवाल नहीं पूछे जाते। इसके बजाय, एनसीईआरटी की किताबों के बीच में जो ‘क्या आप जानते हैं?’ वाले बॉक्स होते हैं या जो वैज्ञानिक प्रयोग दिए होते हैं, सीधे सवाल वहीं से उठते हैं। उन पर फोकस करें। रसायन विज्ञान में केमिकल रिएक्शन बैलेंसिंग और भौतिकी में छोटे सूत्रों पर आधारित पांच न्यूमेरिकल रोज हल करें। रटने के बजाय, कॉन्सेप्ट को समझना सीखें। रीजनिंग और गणित में इतना अभ्यास करें कि कई सवाल बिना पेन के दिमाग में ही हल हो जाएं। साथ ही यूनिट डिजिट, डिविजिबिलिटी रूल्स और विकल्पों से उत्तर का अनुमान लगाने की तकनीक सीखें, जिससे कम समय में अधिक अंक मिल सकते हैं।
करंट अफेयर्स की ‘पिन-पॉइंट’ तैयारी
अगर आप रोज दो घंटे केवल करंट अफेयर्स की वीडियो देखने में बिता रहे हैं, तो यह केवल समय की बर्बादी है। ग्रुप-डी के लिए ‘पिन-पॉइंट’ तैयारी की जरूरत होती है। पिछले पेपर्स का विश्लेषण बताता है कि रेलवे ज्यादातर कुछ खास टॉपिक्स से ही सवाल पूछता है-जैसे प्रमुख खेल और उनके आयोजन स्थल (जैसे ओलंपिक, फीफा, खेलो इंडिया), प्रमुख देशों के राष्ट्रपति/प्रधानमंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री और राज्यपाल तथा नियुक्तियां (खासकर इसरो, डीआरडीओ आदि सरकारी संस्थाओं के प्रमुख)। इसलिए, पिछले एक वर्ष के केवल इन्हीं चुनिंदा टॉपिक्स के नोट्स बनाएं और रिवीजन करते रहें।
निर्णय लें, आगे बढ़ें
मान लीजिए कोई प्रश्न कठिन लग रहा है। वहीं दो तरह के विद्यार्थी अलग हो जाते हैं। पहला छात्र उसी प्रश्न पर तीन मिनट लगा देता है, जबकि दूसरा उसे छोड़कर आगे बढ़ जाता है और पहले आसान प्रश्नों को हल करता है। नतीजतन, वह अधिक प्रश्न हल कर लेता है और चयनित हो जाता है। याद रखें परीक्षा में किसी कठिन सवाल को छोड़कर आगे बढ़ने का निर्णय, उसे जबरदस्ती हल करने के निर्णय से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।
- रिवीजन को ही सबसे बड़ी रणनीति बनाएं।
- सटीकता और स्पीड, दोनों पर बराबर काम करें।
- पिछले एक साल के महत्वपूर्ण करंट अफेयर्स के नोट्स बनाएं।
- कमजोर विषयों पर अतिरिक्त समय दें, लेकिन मजबूत विषयों का अभ्यास भी जारी रखें।
हर दिन को नया बनाएं
नई चुनौतियां न केवल कौशल विकास को गति दे सकती हैं, बल्कि दिन-प्रतिदिन आपकी सोचने की क्षमता को भी बढ़ा सकती हैं
जब आप लंबे समय तक किसी काम में लगे रहते हैं, तो स्वाभाविक रूप से उसमें बहुत अच्छे हो जाते हैं। समय के साथ आप अपने काम में इतना अनुभव और कौशल हासिल कर लेते हैं कि लोग आपको उस क्षेत्र का विशेषज्ञ मानने लगते हैं। आप खुद भी अपनी इस महारत पर गर्व महसूस करते हैं। लेकिन इसके साथ ही एक समस्या धीरे-धीरे सामने आती है। जब आप बहुत माहिर हो जाते हैं, तो कई बार आपकी सोच सीमित हो जाती है। आप नए प्रयोग करने या रचनात्मक तरीका अपनाने में कतराने लगते हैं, क्योंकि आपकी आदत पुराने और तरीका पक्का हो चुका होता है। खेल और नया सीखने का जो उत्साह शुरू में था, वह धीरे-धीरे कम होने लगता है। यह थकान (बर्नआउट) नहीं है, बल्कि एक सूक्ष्म स्थिति है, जिसमें आप दोहराव और दिनचर्या के जरिए अच्छे तो बने रहते हैं, लेकिन नई खोजों का आनंद खोने लगते हैं। इसीलिए, श्रणनीतिक शौकियाश् बनने की बात कही जाती है। इसका मतलब है कि आपको हमेशा हर चीज में महारत हासिल करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, बल्कि बार-बार किसी नए क्षेत्र में शुरुआती स्तर से सीखने की आदत डालनी चाहिए। अगर आप सिर्फ सीखने के लिए शुरुआत करें, तो यह आपके लिए एक नई ऊर्जा और रचनात्मक सोच का रास्ता खोल सकता है।
नए शौक अपनाएं
अपने क्षेत्र की महारत से बाहर निकलने के लिए ऐसी गतिविधि चुनें, जिसका आपके पेशे से कोई संबंध न हो। इसके लिए काम के अलावा कोई नया शौक अपनाएं, जैसे-नई भाषा सीखना, वाद्य यंत्र बजाना आदि। ऐसा काम चुनें, जहां न आपको पहले से कोई अनुभव हो और न ही उपलब्धि मापने का दबाव। इससे आपका दिमाग नई तरह से सोचने और सीखने के लिए तैयार होगा।
प्रतिबद्ध रहें
अक्सर लोग कुछ नया सीखने के लिए सेवानिवृत्ति या खाली समय का इंतजार करते हैं और अगर शुरुआत भी करते हैं, तो बीच में छोड़ देते हैं। इससे बचने के लिए अपने नए लक्ष्य को सहकर्मियों, दोस्तों या परिवार के साथ साझा करें। इससे आप अपने सीखने की प्रतिबद्धता को लेकर अधिक सजग रहेंगे। ध्यान रखें, इसे प्रदर्शन नहीं, बल्कि सीखने की प्रतिबद्धता के रूप में पेश करें। आप नया लक्ष्य कुछ भी रख सकते हैं। नई चुनौतियां न केवल आपके कौशल को बढ़ाती हैं, बल्कि रोजमर्रा के कामों में आपकी सोचने की क्षमता को भी बढ़ाती हैं।
सीखने को प्रगति का हिस्सा बनाएं
खुद को बेहतर बनाने के लिए, आरामदायक दायरे से बाहर निकलकर नई चुनौतियां अपनाएं। कुछ नया सीखें और इसे अपनी प्रगति का हिस्सा मानें, न कि कमजोरी का संकेत। अगर कोई चुनौती आसान लगे, तो लक्ष्य और बड़ा करें। धीरे-धीरे यह आदत आपको नई सकारात्मक ऊर्जा देगी।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।