सुधारें अपनी प्रेजेंटेशन स्किल्स      Publish Date : 25/08/2026

           सुधारें अपनी प्रेजेंटेशन स्किल्स

                                                                                                          प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

"प्रेजेंटेशन किसी एजेंडे के साथ-साथ खुद को भी व्यक्त करने की कला है। इसके जरिए आप अपने संगठन या कंपनी में में ऊंचा मुकाम हासिल कर र सकते हैं। थोड़ी सी कोशिश और कुछबातों को ध्यान में रखते हुए आप इस कला को सीख सकते हैं"।

बाजार के बारे में एक आम कहावत है कि नो दिखता है यही बिकता है हा है। यह चात कार्यस्थल पर भी। लागू होती है। आप जो काम कर रहे हैं या करने वाले हैं, वह तभी लोगों की समझ में आएगा जब आप चेहतर तरीके से अपनी बात उनके सामने रखेंगे। माध्यम चाहे जो भी हो, यही कला प्रेजेंटेशन कहलाती है। करियर की सफलता में इसकी अहम भूमिका है। आपको ऐसे कई लोग मिलेंगे, जिनकी प्रेजेंटेशन अक्सर गड़बड़ा जाती है या वे विषय से भटक जाते हैं। एक सर्वे में जब सी लोगों से से पूछा गया कि कार्यस्थल में आपको सबसे अधिक हर कब लगता है ती 90 लोगों को यही जवाब था कि अगर लोगों की भीड़ या कुछ लोगों के बीच उन्हें बोलना जाए तो उनकी हथेली से पसीने छूट जाते हैं। उनका यह डर नौकरी में तरक्की में आड़े आता है। आत्मविश्वास गिरता है यह अलग।

ऐसी स्थिति में सबसे पहले कुछ बुनियादी तैयारी की जरूरत होती है, ताकि प्रेजेजेंटेशन स्किल्स में सुधार लाया जा सके। बेहतर प्रेजेंटेशन के दो मुख्य पक्ष होते हैं। पहला अच्छे तरीके से लिखा गया कंटेंट और उसे बोलने का प्रभावशाली तरीका। इसके अलावा कुछ टिप्र, जिनों अच्छी प्रेजेंटेशन के लिए अपनाया न्क सकता है-

विषय व तथ्यों की समझा

जिस विषय पर प्रेजेंटेशन देना है, उसकी गहरी समझ होनी आवश्यक है। बेहतर प्रेजेंटेशन दर्शकों या श्रोताओं को विषय के बारे में सिर्फ सही जानकारी न देकर अतिरिक्त जानकारी देता है। यदि उस दौरान किसी ओता ने सवाल कर दिए तो जानकारी के अभाव में आपको अपमानित भी होना पड़सकता है।ऐसे में विषय व तथ्यों की पूरी जानकारी आपका आत्मविश्वास नजबूत बनाएगी। इसके अलाव्ज यदि पावर प्वॉइंट प्रेजेंटेशन दे रहे हैं, तो उसके सभी टूल्स की जानकारी होनी चाहिए।

प्रेजेंटेशन का स्ट्रक्चर बनाएं

सफल प्रेजेंटेशन के लिए पहले उसका खाका तैयार किया जाता है। यानी प्रेनेंटेशन के आसपास एक कहानी सुनते हुए शुरुआत करें और उसे पूरा करें। इससे आप विषय पर केंद्रित रहेंगे और आपके पास एक स्पह विचार होगा कि आप क्या वाहना चाहते हैं। हैं और आपको बोलना कब चाहिए। इन सबबिन्दुओं को पिरोते हुए आप न सिर्फ धमाकेदार तरीके से शुरुआत कर सकेंगे, बल्कि अंत तक श्रोताओं व दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहेंगे। इन सब के बीच अभ्यास भी बहुत जरूरी है।

आकर्षक व मनोरंजक शैली

आपली प्रेजेंटेशन तभी लोगों का ध्यान खीध पाएगी, जब उसकी शैली आकर्षक व मनोरंजक हो। पहले ही वह कंपनी की वार्षिक क्यों ना हो। कहने का मतलब साफ है कि आंकड़ों व तथ्यों की अधिकता होते हुए भी आप सामग्री को कुछ इस रूप में लोगों के सामने लाएं कि उससे बोरियत न हो। यहां काम आते हैं आपके कम्युनिकेशन स्किल्स।जिसके माध्यम से आप अपनी लुभावनी बातों या जुमलों से लोगों को तथ्यों व आंकड़ों की भरमार के बीच में भी उत्साहित होकर सुनने को मजबूर कर सकते हैं।

गलती होने पर न घबराएं

प्रेजेंटेशन के दौरान कई बार ऐसी भी स्थिति अती है, जब शब्दों का गलत उच्चारण हो जाता है या बात अटक जाती है। इससे घबराने की बजाय उसे शांत तरीके से संभालने की जरूरत होती है। इसका सबसे अच्छा तरीका है कि 'माफ कीजिएगा' बोलते हुए अपनी बात को किसी चुटकुले या हास्य व्यंग्य की ओर मोड़ दें। कुछ देर में माहौल सामान्य होने पर मूल विषय पर वापस आ जाएं, लेकिन अपनी गलती समझ आ जाने पर अ अड़ने के बजाय माफी मांगने में कोई बुराई नहीं है। किसी सवाल परे जवाब सोचने के लिए 'आपका सवाल अच्छा है' जैसे जुमले काम आते हैं।

समय का ध्यान रखें

यदि आपने प्रेजेंटेशन का अभ्यास किया है तो आपको समय का पूरा-पूरा अंदाजा होगा। अधिक देर तक प्रेजेंटेशन का लोगों पर नकारात्मक असर जाता है। सभी के पास समय की कमी होती है, इसमें कोशिश यह करनी होगी कि प्रेजेंटेशन का अभ्यास कुछ इस प्रकार करें कि यह तय समय से कुछ मिनट पूर्व खत्म हो जाए। इससे लोगों को सवाल पूछने का कुछ समय मिल जाएगा। इसे प्रेजेंटेशन की सफलता ता से जोड़कर देखाजाना चाहिए। इस दौरान यदि कोई जरूरी बिंदु है, तो वहां बोलने की रफ्तार कुछ कम कर दें।

अंत में धन्यवाद जरूर दें

'धन्यवाद' को दुनिया के सबसे अच्छे शिष्टाचारों में से एक माना जाता है। प्रेजेंटेशन समाप्त होने पर कंपनी के बॉस या, टीम लीडर, आयोजकों, श्रोताओं/दर्शकों आदि को ने उनके सहयोग के लिए धन्यवाद देना न भूलें। कुछ लोग धन्यवाद से पहले अच्छे कोट या शावरी का प्रयोग करते हैं। कुछ लोग पावर प्वॉइंट प्रेजेंटेशन के दौरान किसी फनी वीडियो के जरिए बैंक्स शब्द का प्रयोग करते हैं। ये सब ऐसी चीजें हैं, जिनका असर लम्बे समय तक रहता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।