
सिनेमेटोग्राफी में कॅरिअरः दृश्यों को जीवंत रूप देने का सीखें हुनर Publish Date : 20/08/2026
सिनेमेटोग्राफी में कॅरिअरः दृश्यों को जीवंत रूप देने का सीखें हुनर
प्रो0 आर. एस. सेंगर
अगर आप फिल्में, विज्ञापन और डॉक्यूमेंट्री आदि को देखने में रूचि लेते हैं तो यह आपके कॅरियर के लिहाज से बेहद अच्छा हो सकता है। जाहिर है कि हमारे देश में हर साल अलग-अलग भाषाओं में कई फिल्में बनती इस वजह से एक सिनेमा बनाने में कई सारे लोगों का योगदान होता है। एक्टर और डायरेक्टर के अलावा पर्दे के पीछे और आगे बहुत सारे लोग काम करते हैं। इन्हीं में से एक है सिनेमेटोग्राफर, जिसका काम फिल्म में जान डालना होता है।
यह क्षेत्र ग्लैमर से जुड़ा है इसलिए यहां नाम और शोहरत की कोई कमी नहीं है लेकिन यह सब कमाने के लिए अन्य पेशों की तरह यहां भी संघर्ष करना होता है। इस क्षेत्र में कदम रखने के लिए कल्पनाशीलता, तकनीक के प्रति रुझान, दृश्यों और लाइटिंग की अच्छी समझ होना भी बहुत जरूरी है।
क्या है सिनेमेटोग्राफी
जब चलते-फिरते दृश्यों को लाइटिंग का ध्यान रखते हुए डिजिटल कैमरे में कैद किया जाता है, तो उसे ही सिनेमा की भाषा में सिनेमेटोग्राफी कहते है। यह एक तकनीकी क्षेत्र है। इसमें मोशन पिक्चर कैमरे का उपयोग होता है, जो सामान्य कैमरों से अलग होता है। सिनेमेटोग्राफी एक ऐसा टेक्निकल काम है, जो दृश्यों को जीवंत बना देता है। एक अच्छा सिनेमेटोग्राफर कहानी के हिसाब से सीन और डायरेक्टर के अनुसार कैमरा व लाइटिंग व्यवस्थित करने का काम करता है। उसे विजुलाइजेशन और लाइटिंग की सटीक जानकारी होती है। उसके पास व्यावसायिक तकनीकी ज्ञान और रचनात्मकता का भी समायोजन भी होता हैं।
कोर्स और योग्यता
- सिनेमेटोग्राफी के लिए डिप्लोमा और शॉर्ट टर्म, दोनों तरह के कोर्स उपलब्ध हैं। किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से बारहवीं या उसके समकक्ष योग्यता प्राप्त करने के बाद आप डिप्लोमा या शॉर्ट टर्म कोर्स में दाखिला ले सकते हैं।
- इसके अलावा आप संबंधित क्षेत्र में स्नातक डिग्री प्राप्त कर सकते हैं। इसके बाद स्नातकोत्तर डिग्री भी हासिल कर सकते हैं।
- कोर्स के दौरान छात्रों को कैमरा हैंडलिंग, कैमरा शॉट, एंगल, मूवमेंट, लाइटिंग और कम्पोजीशन के अलावा टेक्निकल जानकारी दी जाती है।
कैमरे का ज्ञान होना बहुत जरूरी होता है-
सिनेमेटोग्राफी में मोशन पिक्चर कैमरे की जरूरत होती है, जो अन्य कैमरों से कहीं अलग होता है। इसका बखूबी उपयोग वही कर सकता है जिसने इसका अच्छे से प्रशिक्षण लिया हो। सिनेमेटोग्राफर डायरेक्टर के साथ सीन को विजुलाइज करता है। दिन, रात, सुबह, शाम, बारिश और आंधी जैसे सीन को कब और किस एंगल से लेना है, इसमें उसे महारथ हासिल होती है।
वर्तमान में, स्टंट सीन सिनेमेटोग्राफी का बढ़िया उदाहरण हैं। ऐसे दृश्यों का अधिकांश फिल्मों में बहुत उपयोग हो रहा है। फिक्शन, ऐंडवरटाइजिंग और डॉक्यूमेंट्री फिल्म के लिए कैमरे का कैसे प्रयोग करना है, इसकी भी उसे पूरी-पूरी जानकारी होती है।
इस तरह होती है शुरुआत
शुरुआत में आपको किसी जाने-माने सिनेमेटोग्राफर के साथ असिस्टेंट के रूप में काम करना होता है। इससे आप न केवल काम करने का तरीका जान पाएंगे, बल्कि आपके काम में निखार भी आता जाएगा। इस तरह आपके काम की तारीफ फिल्म डायरेक्टर या प्रोडक्शन तक पहुंचेगी और वे लोग आपको हायर करना शुरू करेंगे।
जरूरी दक्षता
यह काम पूरी तरह तकनीक और कल्पना पर आधारित है, जो अपनी कल्पना के जरिए दृश्यों को जीवित करने की काबिलियतरखता है और जिसे कैमरे की बारीकियों की अच्छी जानकारी है यह क्षेत्र उसके लिए बेहतर है। इसके साथ ही टेक्नोलॉजी से अपडेट रहना भी बेहद जरूरी है।
संभावनाएं
सिनेमेटोग्राफी के जानकार लोगों की मांग फिल्म इंडस्ट्री से लेकर टीवी चैनलों और विज्ञापन फिल्मों के निर्माण कार्यों में खासतौर से होती है। यही नहीं, न्यूज चैनलों में तो और भी बड़ी संख्या में इनकी नियुक्तियां की जाती हैं। इसमें केवल प्राइवेट चैनल्स ही नहीं, दूरदर्शन के विभिन्न राज्यों में स्थित विभिन्न केंद्रों में भी बेहतरीन अवसर हैं। इसके अलावा विदेशी चैनलों में भी अच्छे मौके रहते है।
प्रमुख संस्थान
- फिल्म ऐंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे, वेबसाइट: www.ftiindia.com
- सत्यजित रे फिल्म ऐंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट कोलकाता, वेबसाइट: http://srftl.ac.in
- सेंट्रल फॉर रिसर्च आर्ट ऑफ फिल्म ऐंड टेलीविजन, दिल्ली वेबसाइट: 2%2%2%22craft.org/%22http://logHYPERLINK%20%22http://log2craft.org/%222HYPERLINK%20%22http://log2craft.org/%22craft.org%222HYPERLINK%20%22craft.org/%22http://logHYPERLINK%20%22http://log2craft.org/%222HYPERLINK%20%22http://log2craft.org/%22craft.org%22craft.org"http://logHYPERLINK "craft.org/%22craft.org%22http://logHYPERLINK%20%22craft.org/%22http://logHYPERLINK%20%22http://log2craft.org/%222HYPERLINK%20%22http://log2craft.org/%22craft.org%222HYPERLINK%20%22craft.org/%22http://logHYPERLINK%20%22http://log2craft.org/%222HYPERLINK%20%22http://log2craft.org/%22craft.org%22craft.org"2HYPERLINK "craft.org/%22craft.org%22http://logHYPERLINK%20%22craft.org/%22http://logHYPERLINK%20%22http://log2craft.org/%222HYPERLINK%20%22http://log2craft.org/%22craft.org%222HYPERLINK%20%22craft.org/%22http://logHYPERLINK%20%22http://log2craft.org/%222HYPERLINK%20%22http://log2craft.org/%22craft.org%22craft.org"craft.org
- एशियन अकादमी ऑफ फिल्म ऐंड टेलीविजन, नोएडा, वेबसाइट: http://aaft.com
लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
