
ताकि मतभेद की गुंजाइश ही न रहे Publish Date : 17/08/2026
ताकि मतभेद की गुंजाइश ही न रहे
प्रो0 आर. एस. सेंगर
आप और आपके बॉस की सफलता की परिभाषा अलग हो सकती है, लेकिन समय पर खुलकर बातचीत करना उत्पादकता के लिए जरूरी है किसी परियोजना के दौरान बॉस और कर्मचारी के बीच मतभेद होना सामान्य है। अक्सर इसकी वजह सफलता की अलग-अलग परिभाषाएं, अपेक्षाओं की अस्पष्टता यां संवाद की कमी होती है। ऐसे मतभेद यदि समय रहते स्पष्ट न किए जाएं, तो वे असफलता का कारण बन सकते हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों के साथे बेहतर तालमेल के लिए आवश्यक है कि सही समय पर खुलकर और ईमानदारी से बातचीत की जाए। परियोजना के लक्ष्यों पर आपसी सहमति बनाना और अपने विचारों को स्पष्ट, आत्मविश्वासपूर्ण तथा प्रामाणिक तरीके से रखना टीम को एक ही दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करता है।
काम की दिशा स्पष्ट रहे
प्ररियोजना की शुरुआत में ही यह स्पष्ट करना बेहद जंरूरी है कि सफलता का अर्थ क्या होगा, ताकि आप और आपके बॉस दोनों एक ही अपेक्षा पर सहमत हों। इसके लिए प्रमुख प्रदर्शन संकेतक और अपेक्षित परिणाम पहले से तय किए जाने चाहिए। ऐसा करने से काम की दिशा स्पष्ट रहती है, गलतफहमियों की संभावना कम होती है और यह सुनिश्चित होता है कि पूरी टीम उसी लक्ष्य की ओर प्रयास करे, जिससे अंत में परियोजना का मूल्यांकन भी निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से किया जा सके।
खुलकर चर्चा करें
नियमित संपर्क बनाए रखना किसी भी कार्य या परियोजना की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए समय-समय पर आमने-सामने की बैठकें तय करनी चाहिए, ताकि प्रगति से जुड़े अपडेट साझा किए जा संकें, किसी भी चिंता या समस्या पर खुलकर चर्चा हो सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि दोनों पक्ष उद्देश्यों और प्राथमिकताओं को लेकर एकमत हैं।
दृष्टिकोण को समझना
अपने प्रबंधक के लक्ष्यों, जिम्मेदारियों, दबावों और उनकी पसंदीदा संचार शैली को समझने के लिए समय निकालना आवश्यक है, क्योंकि इससे आप उनकी प्रतिक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं और अपनी बात उसी रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं, जो उन्हें स्पष्ट और प्रभावी लगे। जब आप यह जान लेते हैं कि आप के प्रबंधक किन बातों को प्राथमिकता देते हैं, किन परिस्थितियों में वे दबाव महसूस करते हैं और वे किस तरह की बातचीत को पसंद करते हैं (जैसे संक्षिप्त, तथ्य-आधारित या विस्तार से), तो आप अपनी जानकारी और सुझाव उसी अनुसार उसी अनुसार रख सकते हैं। इससे आपके विचारों को स्वीकार किए जाने की संभावना बढ़ती है।
दस्तावेजीकरण है जरूरी
दस्तावेजीकरण कार्य प्रक्रिया को स्पष्ट और व्यवस्थित बनाए रखने का एक प्रभावी तरीका है। बैठकों के बाद लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों, हुई सहमतियों और तय किए गए अगले कदमों को लिखित रूप में दर्ज करना चाहिए। ऐसा करने से भविष्य में किसी भी तरह के भ्रम या मतभेद की संभावना कम होती है और यह सुनिश्चित होता है कि सभी पक्ष एक ही समझ के साथ आगे बढ़ें।
लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
