
डायग्नोस्टिक मेडिकल सोनोग्राफी में बेहतरीन कॅरियर Publish Date : 20/07/2026
डायग्नोस्टिक मेडिकल सोनोग्राफी में बेहतरीन कॅरियर
प्रो0 आर. एस. सेंगर
अगर आप हेल्थ केयर के क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाना चाहते हैं तो सोनोग्राफी एक बेहतर विकल्प है। हॉस्पिटल और केयर सेंटर में इससे जुड़े कार्यों को करने के लिए डायग्नोस्टिक मेडिकल सोनोग्राफर्स की काफी मांग है। डायग्नोस्टिक मेडिकल सोनोग्राफी के क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए अभ्यर्थियों के पास कई रास्ते हैं। इस क्षेत्र में पेशेवर होने के लिए इच्छुक अभ्यर्थियों को संबंधित क्षेत्र में स्नातक डिग्री प्राप्त करनी होती है। छात्र किसी भी यूनिवर्सिटी, कॉलेज, वोकेशनल टेक्निकल इंस्टीट्यूट, हॉस्पिटल और आर्म्डफोर्सेस से ट्रेनिंग ले सकते हैं। इस कैरियर के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान कर रहे हैं हमारे कॅरियअर विशेषज्ञ डॉ0 आर. एस. सेंगर-
सोनोग्राफी, रेडियोग्राफी की वह शाखा है जिसका इस्तेमाल बीमारियों के के सही तरीके से निदान के लिए किया जाता है। इसके माध्यम से विभिन्न अंगों की जांच की जाती है। दरअसल, सोनोग्राफी एक तकनीक है जो आंतरिक अंगों की असामान्यताओं का पता लगाने में मदद करती है। साथ ही इस तकनीक के जरिए पेट, प्रसूति, स्त्री रोगों और मांसपेशियों से संबंधित जांच भी की जाती है। जाहिर है कि महिला प्रजनन अंगों या गर्भस्थ शिशु की सभी प्रक्रियाओं की जानकारी हासिल करने के लिए सोनोग्राफी तकनीक का ही प्रयोग किया जाता है।
यह तकनीक वैज्ञानिक परीक्षण करने में मददगार साबित होती है। इसके माध्यम से दिल और नाड़ी संबंधित रोग, गुर्दे में पथरी, ट्यूमर, कैंसर, पीलिया और टीबी जैसे विभिन्न विकारों का भी पता लगाया जाता है।
कौन होता है सोनोग्राफर

जो प्रशिक्षित चिकित्सक ट्रांसड्यूसर जैसे आधुनिक चिकित्सीय उपकरण के माध्यम से मेडिकल सोनोग्राफी करने के लिए अल्ट्रासाउंड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं उन्हें डायग्नॉस्टिक मेडिकल सोनोग्राफर कहा जाता है। बता दें कि ट्रांसडदूसर एक उपकरण है जो मानव शरीर में उच्च आवृत्ति ध्वनि तरंगों का उत्सर्जन करता है। नियोक्ता की अपेक्षा और कार्यस्थल के हिसाब से इन पेशेवरों के कार्य अलग-अलग प्रकार के हो सकते हैं। उन्हें विभिन्न प्रकार की जिम्मेदारियां निभाने में सक्षम होना चाहिए।
योग्यता
मान्यता प्राप्त शिक्षा बोर्ड से बायोलॉजी विषय के साथ बारहवीं कक्षा पास होना जरूरी है। बारहवीं पास करके आप डायग्नॉस्टिक सोनोग्राफी प्रोग्राम में दाखिला ले सकते हैं। यह कोर्स देश के कई संस्थानों या कॉलेज में उपलब्ध है। फिर किसी भी हॉस्पिटल या केयर सेंटर में संबंधित क्षेत्र में कार्य अनुभव प्राप्त करें। इसके बाद डायग्नॉस्टिक मेडिकल सोनोग्राफर की जॉब तलाश करें।
इनमें कर सकते हैं स्पेशलाइजेशन
• हेल्थ साइंस फिजिक्स
• फाउंडेशन कोर्स ऑफ सोनोग्राफी
• एनाटॉमी ऐंड फिजियोलॉजी स्पेशलाइजेशन
• सोनोग्राफिक फिजिक्स ऐंड इंस्ट्रूमेंटेशन
• मेडिकल टर्मिनीलॉजी
• अल्ट्रासाउंड फिजिक्सा
• फॉर्माकोलॉजी
• वैस्क्यूलर सोनोग्राफी
• एब्दोमिनल सोनोग्राफी
• मेडिकल लेजिस्लेशन
जरूरी विशेषताएं
• मरीजों को संभालने में सक्षम हों।
• विभिन्न परिस्थितियों का सामना धैर्यता के साथ करने में दक्ष हों
• मरीजों के साथ विनम्रता से बातचीत करने का कौशल हो
• कार्य के प्रति समर्पित हों
• शांत स्वभाव हो
रोगियों में आत्मविश्वास बढ़ाने का गुण हो
• नई तकनीक और कौशल सीखने की इच्छा हो
• शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ औरमजबूत हो
• दोनों हाथों से काम करने में निपुण हों यानी एकहाथ से मशीन को ऑपरेट और दूसरे हाथ से स्कैन करने की क्षमता हो।
संभावनाएं
वर्तमान में हेल्थ केयर सेंटर और हॉस्पिटल काफी तेजी से खुल रहे हैं। इसके चलते सोनोग्राफर की मांग भी लगातार बढ़ रही है। पॉप्युलर हेल्थ ऑर्गनाइजेशन द्वारा की गई एक रिसर्च के मुताबिक, इस क्षेत्र में 2016 तक चालीस प्रतिशत से अधिक रोजगार बढ़ने की संभावनाएं हैं। आप चाहें तो सरकारी या निजी अस्पताल, हेल्थ केयर सेंटर, निजी क्लीनिक, नर्सिंग होम, लेबोरेटरी, रिहाब सेंटर के अलावा टेक्निकल कॉलेज में नौकरी प्राप्त कर सकते हैं।
ये हैं जिम्मेदारियां
• सोनोग्राफी उपकरणों का सही इस्तेमाल करना होता है। साथ ही अच्छे-से संभालना भी होता है।
• अलग-अलग तरहके तकनीकी कार्य करने होते हैं।
• डॉक्टर से मरीज की जांच के बारे में चर्चा करनी होती है।
• नसबंदी प्रक्रिया का सही से पालन करना होता है
• अल्ट्रासाउंड तस्वीरों को सुगमता से प्रस्तुत करना होता है।
• ट्रांसड्यूसर और अन्य चिकित्सीय उपकरणों के प्रयोगके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त होनी चाहिए। मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड को संभालने का दायित्व निभाना होता है।
• अल्ट्रासाउंड जेल ठीक तरह से लगानी होती है
• मरीज की साफ- सफाई का पूरा ख्याल रखना होता है।
प्रमुख संस्थान
• मेडऑल केयर सेंटर, चेन्नई, वेबसाइट: http://www.medall.in
• भावा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस ऐंड रिसर्च, भुवनेश्वर, वेबसाइट: http://bimar.ac.in
• सेंट जॉन्स नेशनल अकेडमी ऑफ हेल्थ साइंसेज, बंगलुरु, वेबसाइट: http://www.stjohnt.in
• रामा डेंटल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल ऐंड रिसर्च सेंटर, कानपूर, वेबसाइट: http://ramadental.tripod.com
• पारकर मेडिकल फाउंडेशन स्कूल ऑफ नर्सिंग, रत्नागिरि, वेबसाइट: www.pm/nursingschool.org

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
