
बिजनेस स्कूलों के लिए इंडस्ट्री के मानक Publish Date : 12/07/2026
बिजनेस स्कूलों के लिए इंडस्ट्री के मानक
प्रो0 आर. एस. सेंगर
भारत में विजनेस स्कूलों की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला एक गुप्त मंत्र है-प्रबंधन संस्थानों को अपने संबंधित विशेधाता के क्षेत्र में इंडस्ट्री के साथ संपूर्ण संबंध बनाने की क्षमता। वास्तव में एमबीए इंस्टीट्यूट्स की समग्र प्रतिष्छा और ब्रांड में बी-स्कूलों के चारे में इंडस्ट्री का अनुभव बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। एकेडमिका विशेषज्ञ अक्सर इसे उजरअंदाज कर देते हैं।
इंस्टीट्यूट किय-2017 सर्वे में उद्योग जगत के अनुभव को महत्वपूर्ण पहलू के तौर पर शामिल किया गया है। इसके लिए, हमने शॉर्टलिस्ट किए एबी-स्कूलों के प्लेसमेंट अभियान में हिस्सा लेने जीआर-अलग कंपनियों के एचआर कर्मियों से बातचीत की। उन्होंने थी-स्कूलों के बारे में इंडस्ट्री के अनुभव पर ही होने वाले कारकों के बारे में हमसे कुछ बहुमूल्य बातें साझा की।
सॉफ्ट स्किल्स
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में आर किसी की भी व्यक्तिगत सफलड, किसी कंपनी की सफलता या यहां तक कि किया इंडस्ट्री की सफलता में सॉफ्ट स्किल्स की नियांयक भूमिका होती है। एक बी-स्कूल के बारे में इंडस्ट्री के अनुनयों को प्रभावित करने वाले सबसे प्रमुख कारक के तौर पर छात्रों की सॉफ्ट स्किल्स का सामने आना आश्चर्य की बात नहीं है। सभी वित्तीय उपकरणों और प्रबंधकीय कौशलों के बावजूद यदि एमबीए ग्रेजुएट्स को कम्युनिकेशन कौशल का प्रशिक्षण नहीं दिया जाता है, तो इससे साफ पता चलता है कि इंस्टीट्यूट ने एक बहुत महत्वपूर्ण पहलू पर ध्यान नाई दिया है।
छात्रों की समग्र गुणवत्ता

भारत में बी-स्कूलों के बारे में हमसे बात करने के दौरान कई एचआर मैनेजरों ने छात्रओं की गुणवत्ता के बारे में बात की। एक व्यापक स्पेक्ट्रम मैट्रिक्स होने के नाते उन्होंने विशेष उदाकारी दी, जैसे कि प्रबंधन के सैद्धांतिक और प्रायोगिक दोनों पहलुओं की अचाही जानकारी, वित्तीय सिद्धांतों पर मजबूत पकड़ और नेतृत्व के गुण जैसे कारक छात्रों की समा गुणवता को आकार देते हैं।
इंडस्ट्री इंटरफेस की गुणवत्ता
हालाकि भारत में इसे अक्सर नजरअंदाज किया ताता है, लेकिन जब बात बी-स्कूलों के यर्थीकरण की हो, तो इंडस्ट्री इंटरफेस महत्वपूर्ण कारक माना जाता है। एबी इस्टीट्यूट्स द्वारा कराए जाने कले मेस्ट लेक्चर्स इंडस्ट्री इंटरैक्शन के अलावा इंडस्ट्री इंटरफेस कई अन्य पहलुओं को भी कवर करता है, जैसे संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं, फील्ड केसेज और और ओपन मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम्स। वे सभी संबंधित इंडस्ट्री के विशेषज्ञों के सहयोग से कराए जाते हैं। सरल शब्दों में कहा जाए, ती यया एक तरह से इंडस्ट्री इंटरफेस थी- स्कूल की बौद्धिक पूंजी को दर्शाता है। यह एक ऐसा पहलू है. जिसमें भारत के बड़े बी- स्कूल भी अच्छा अंक लाने में विपरत रहे हैं।
इंडस्ट्री अनुभव
क्षम जिस प्रतिस्पर्धी माहौल में जी रहे हैं, उसवर मतलब साफ है कि कैंपस से पासआउट होकर निकालने वाले एमबीए ग्रेजुएट्स के पास नौकरी लगने के बाद अपने हनीमून पीरियड का लुत्फ उठाने की आजादी नहीं है। उन्हें पहले दिन से ही काफी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। इसलिए इंडस्ट्री के विशेषज्ञ ऐसे छात्रों की तलाश में रहते हैं, जी नौकरी करने के लिए बिल्कुल तैयार हों, जिन्हें इंडस्ट्री का कुछ अनुभव हो। बी-स्कूलों द्वारा कराए जाने यखाने इंटर्नशिप प्रोग्राम, समर प्रोजेक्ट्स और इससे जुड़े अन्य प्रशिक्षण कार्यों के अलावा, इंडस्ट्री के साथ नियमित इंडस्ट्री चलन बी-स्कूलों के स्टूडेंट्स को मैनेजमेंट के गुर सीखने का माहौल उपलब्ध कराते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
