
नेचुरोपैथी : दूसरों की सेहत सुधारकर संवारें अपना कॅरियर Publish Date : 08/07/2026
नेचुरोपैथी : दूसरों की सेहत सुधारकर संवारें अपना कॅरियर
प्रो0 आर. एस. सेंगर
“नेचुरोपैथी एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है, जिसमें सर्जरी या एलोपैथिक दवाओं के इस्तेमाल के बजाय होम्योपैथी, हर्बल उपायों और एक्यूपंचर के जरिए शरीर की रोग- प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जाता है। नेचुरोपैथ मरीजों के इलाज के लिए खानपान और दिनचर्या में बदलाव का भी सहारा लेते हैं। जो लोग चिकित्सा के क्षेत्र में कॅरियर बनाने की ख्वाहिश रखते हैं, लेकिन चीर-फाड़ करने से डरते हैं, उनके लिए नेचुरोपैथी एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है”।
नेचुरोपैथी इलाज में प्रकृति के पांच तत्वों-मिट्टी, जल, वायु, अग्नि और सूर्य की रोशनी के इस्तेमाल पर जोर देती है। यह एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जिसका मकसद बीमारियों से लड़ने और उनसे बेहतर ढंग से उबरने की प्रतिरोधक तंत्र की क्षमता बढ़ाना है। एलोपैथिक उपचार में लोगों की बढ़ती दिलचस्पी और चिकित्सा क्षेत्र में होने वाले तकनीकी विकास के कारण पिछले कुछ दशकों में नेचुरोपैथी की लोकप्रियता में कमी आई थी। हालांकि एलोपैथिक दवाओं के साइडइफेक्ट्स को देखते हुए लोग एक बार फिर इसकी तरफ रुख कर रहे हैं। नेचुरोपैथी चिकित्सा क्षेत्र में 'दनेचर क्योर', 'द नेचुरल मैथड्स', 'द न्यू साइंस ऑफ हीलिंग' और 'हीलिंग फ्रॉम विदिन' जैसे नामों से भी जानी जाती है।
कार्य स्वरूप

नेचुरोपैथ का पहला काम बीमारी कीजड़ तक पहुंचना होता है। मरीज की ओर से बताए गए लक्षणों को समझना, उसकी मानसिक स्थिति को भांपना, परिवार के चिकित्सकीय इतिहास को परखना और उसके हिसाब से सही इलाज ढूंढना नेचुरोपैथ के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। उसे मरीज के अंदर विश्वास जगाना होता है कि वह ठीक हो सकता है। साथ ही मरीज को खुद की देखभाल करने की कला सिखानी पड़ती है। नेचुरोपैथ को उन हानिकारक तत्वों और आदतों की भी पहचान करनी होती है, जो इलाज में बाधक बन सकते हैं। इलाज किसी साइडइफेक्ट का कारण न बने, यह सुनिश्चित करना भी नेचुरोपैथ की जिम्मेदारी होती है।
लोकप्रियता
सुरक्षित और असरदार होने के कारण नेचुरोपैथी दुनिया भर में लोकप्रिय हो रही है। भारतीय घरों में तो इसका इस्तेमाल सदियों से चला आ रहा है। लोग मानतेहैं कि स्वास्थ्य संबंधी ज्यादातरसमस्याएं गलत खानपान का नतीजा होती हैं। इसलिए डॉक्टर के पास जाने से पहले वे घरेलू नुस्खों के जरिए इस पर काबू पाने की कोशिश करते हैं।
संभावनाएं
नेचुरोपैथी में कॅरियर दौलत और रुतबा, दोनों कमाने का मौका देता है। ज्यादातर नेचुरोपैथ निजी तौर पर प्रैक्टिस करते हैं। हालांकि उनके लिए सरकारी-निजी अस्पतालों, स्पा, ब्यूटी क्लीनिक, शोध संस्थानों, स्वास्थ्य केंद्रों, रिटेल उद्योग और खाद्य उद्योग में भी नौकरी की बेहतरीन संभावनाएं हैं। नेचुरोपैथ चाहें तो त्वचा व प्रजनन संबंधी समस्याओं, बालरोग, उदररोग और स्पोर्ट्स इंजरी जैसे विषयों में स्पेशलाइजेशन भी हासिल कर सकते हैं।
प्रमुख संस्थान
• गवर्नमेंट नेचुरोपैथी मेडिकल कॉलेज, हैदराबाद (आंध्र प्रदेश)
• नारायण योग ऐंड नेचुरोपैथिक मेडिकल कॉलेज, नेल्लोर (आंध्र प्रदेश)
• देव्स योग ऐंड नेचुरोपैथी मेडिकल कॉलेज, रंगारेड्डी (आंध्र प्रदेश)
• महावीर कॉलेज ऑफ नेचुरोपैथी ऐंडयोग ड्रग, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
• मोरारजी देसाई इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरोपैथी ऐंड योग, वडोदरा(गुजरात)
• एसडीएम कॉलेज ऑफ नेचुरोपैथी ऐंडयोगिक साइंसेज, उजिर (कर्नाटक)
• अल्वास कॉलेज ऑफ नेचुरोपैथी योग, मूदबिदरी (कर्नाटक)
• गवर्नमेंट नेचर क्योर ऐंड योग कॉलेज, पीकेटीआर हॉस्पिटल, मैसूर (कर्नाटक)
• कॉलेज ऑफ नेचुरोपैथी ऐंड योगिक साइंसेज, स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु (कर्नाटक)
• संत हिरदाराम मेडिकल कॉलेज ऑफ नेचुरोपैथी ऐंड योगिक साइंसेज, भोपाल (मध्य प्रदेश)
• सांची नेचुरोपैथी कॉलेज, रायसेन (मध्य प्रदेश)
• जेएसएस इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरोपैथी ऐंड योगिक साइंसेज, कोयंबटूर (तमिलनाडु)
• शिवराज नेचुरोपैथी ऐंड योग मेडिकल कॉलेज, सलेम (तमिलनाडु)
• गवर्नमेंट नेचुरोपैथी ऐंड योग मेडिकल कॉलेज, चेन्नई (तमिलनाडु)
• आरके मेडिकल कॉलेज ऑफ नेचुरोपैथी ऐंड योग, कन्याकुमारी (तमिलनाडु)
यहां मिलेगा रोजगार
• शिक्षण संस्थान
• शोध संस्थान
• मैनेजमेंट और प्रशासनिक क्षेत्र
• अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र
• स्वास्थ्य परामर्श केंद्र
• नेचुरोपैथी संस्थान

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
