पर्यावरण को सहेजने में करियर      Publish Date : 01/07/2026

          पर्यावरण को सहेजने में करियर

                                                                                                                         प्रो0 आर. एस. सेंगर

प्रकृति के साथ संतुलन साधने के लिए आजकल हर स्तर पर प्रयास हो रहे हैं। इसके लिए पर्यावरण संरक्षण, पर्यावरण के अनुकूल निर्माण कार्य, ग्रीन एनर्जी या ग्रीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे इस क्षेत्र में पर्यावरण से जुड़े प्रोफेशनल्स/इंजीनियर्स की जरूरत लगातार बढ़ रही है। कैसे आप भी इस ग्रोइंग सेक्टर में करियर बना सकते हैं।

ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बीते दिनों केंद्र सरकार की ओर से ई-20 (इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) ईंधन की एक नई पहल शुरू की गई, ताकि तेल के आयात पर निर्भरता को कम करने के साथ ही पर्यावरण प्रदूषण को कम किया जा सके। इसी तरह देश में ईवी के इस्तेमाल को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। ग्रीन एनर्जी की क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ये सभी कदम कहीं न कहीं पर्यावरण को ही ध्यान में रखकर उठाए जा रहे हैं।स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरमेंट रिपोर्ट 2026 के अनुसार, अपना देश इस समय गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। जलवायु परिवर्तन, चरम मौसमी घटनाएं (लू, भारी वर्षा, बाढ़ व शीत लहरें), वायु प्रदूषण और मानव-वन्यजीव संघर्ष के साथ विकास व पारिस्थितिक संतुलन के बीच की खाई लगातार गहरी हो रही है। देश के बड़े शहरों में वायु और जल प्रदूषण खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। ऐसे में पर्यावरण प्रबंधन के विभिन्न क्षेत्रों में एनवायरमेंटल प्रोफेशनल्स के लिए मौके बढ़ने की उम्मीद की जा रही है, जो प्रदूषण के बीच सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ हवा, रहने लायक स्वच्छ माहौल आदि को बरकरार रखने में कुशल होते हैं।

                                

बढ़ रही संभावनाएं: आज चाहे इंडस्ट्री स्तर पर एनवायरमेंटल क्लियरेंस की बात हो या कंस्ट्रक्शन साइट्स व हाउसिंग सोसाइटी आदि के लिए क्लियरेंस की बात हो, पर्यावरण प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए आगे चलकर स्थानीय लेवल पर भी ऐसे एनवायरमेंटल प्रोफेशनल्स की काफी जरूरत पड़ेगी, जो वॉटर ट्रीटमेंट, सीवेज ट्रीटमेंट, इंडस्ट्रियल एफ्लुएंट ट्रीटमेंट, वेस्ट मैनेजमेंट, बायो डायवर्सिटी, डी-फॉरेस्टेशन और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे एरिया में काम करने की विशेषज्ञता रखते हैं।

नौकरी के अनेक अवसर: एनवायरमेंटल साइंस एवं मैनेजमेंट जैसे कोर्स करने के बाद आप इंडस्ट्रीज, सरकारी प्रतिष्ठानों और राज्य स्तरीय पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड्स में अपनी सेवाएं दे सकते हैं। पाल्यूशन कंट्रोल सिस्टम लगाने की अनिवार्यता के बाद इंडस्ट्रीज में भी आजकल ऐसे लोगों की बहुत मांग है, क्योंकि इस तरह का सिस्टम लगाने, उसे आपरेट करने या उसके मेंटेनेंस के लिए ऐसे प्रोफेशनल्स चाहिए, जो एनवायरमेंट की बारीकियों को जानते हों और इससे जुड़ी तकनीक को इस्तेमाल कर सकते हों। रेस्टोरेंट, होटल्स, मॉल्स व हाउसिंग सोसाइटीज जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में पर्यावरण के मानकों को मेंटेन रखने के लिए भी एनवायरमेंटल एक्सपर्ट्स की सेवाएं ली जाने लगी हैं। आप चाहें तो इस क्षेत्र में कंसल्टेंसी सेवाएं भी दे सकते हैं। एनवायरमेंटल विषय की पढ़ाई के बाद आप एनवायरमेंटल इंजीनियर, एनवायरमेंटल मैनेजर, एनवायरमेंटल एक्सपर्ट या सस्टेनेबिलिटी मैनेजर के रूप में इस फील्ड में अपना करियर शुरू कर सकते हैं।

कोर्स एवं योग्यता: एनवायरमेंट प्रबंधन के क्षेत्र में आने के लिए आप इससे संबंधित समुचित कोर्स कर सकते हैं। अभी एनवायरमेंट विषय की पढ़ाई के लिए डिग्री, पीजी डिग्री और डिप्लोमा स्तर के कई कोर्स कराए जा रहे हैं, जैसे कि एमएससी इन एनवायरमेंटल साइंस एंड मैनेजमेंट। यह दो वर्षीय कोर्स है, जिसे बीएससी और बीटेक पृष्ठभूमि के युवा कर सकते हैं। इसी तरह एमएससी इन एनवायरमेंटल साइंस, एमएससी/एमटेक इन एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग, एमएससी इन एनवायरमेंटल साइंस एंड रिसोर्स मैनेजमेंट, पीजी डिप्लोमा इन एनवायरमेंटल साइंस जैसे कोर्स भी ऑफर हो रहे हैं। कुछ संस्थान बीएससी इन एनवायरमेंटल साइंस जैसे कोर्स भी करा रहे हैं, जिन्हें 12वीं के बाद किया जा सकता है। इस तरह के कोर्स में वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, वॉटर ट्रीटमेंट, सीवेज ट्रीटमेंट, वेस्ट मैनेजमेंट आदि की जानकारी और उसके समाधान के बारे में गहराई से पढ़ाया जाता है।

प्रमुख संस्थान

आईआईटी, दिल्लीhttps://home.iitd.ac.in

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली www.jnu.ac.in

जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्लीwww.jmi.ac.in

टेरी स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज, नई दिल्लीwww.terisas.ac.in

खुल रहे नए-नए अवसरों के द्वार

                               

"पर्यावरण और इसके प्रबंधन में करियर तलाशने वालों के लिए हमेशा से ही एनवायरमेंटल स्टडीज एक खास विषय रहा है। यह बात अलग है कि पहले इस क्षेत्र में करियर विकल्प सीमित थे। आज के दौर में जहां रोजगार सृजन एक बड़ी चिंता का विषय है, वहीं यह क्षेत्र युवाओं की पहली पसंद बनने की दिशा में है। मुझे नहीं लगता कि करियर के लिहाज से इसे कमजोर क्षेत्र कहा जा सकता है। तमाम तरह के प्रदूषण, पर्यावरण विनाश और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में इस बात को स्वीकार भी किया जा रहा है कि हमारी दुनिया को बचाने की तत्काल जरूरत है। इसकी गंभीरता समझते हुए सरकारों और कानून बनाने वालों ने काम करना शुरू कर दिया है। कारपोरेट जगत भी इसके अनुसार प्राथमिकताओं को फिर से तय कर रहा है। इस तरह जैसे-जैसे दुनिया अपनी पर्यावरणीय चिंताओं और जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है, वैसे-वैसे इस क्षेत्र में नए-नए अवसरों के द्वार भी खुल रहे हैं। हमें यह भी समझना जरूरी है कि अब यह हमारे अस्तित्व का सवाल है, क्योंकि अगर आज हमने अपने पर्यावरण को गंभीरता से नहीं लिया तो कल बहुत देर हो चुकी होगी।"

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।