ग्राफिक डिजाइनिंग में हाई-फाई कॅरियर ग्राफ      Publish Date : 29/06/2026

ग्राफिक डिजाइनिंग में हाई-फाई कॅरियर ग्राफ

                                                                                                                 प्रो0 आर. एस. सेंगर

“अगर आप थोड़ा भी क्रिएटिव है और दूसरों से हटकर सोचते हैं तो ग्राफिक डिजाइनिंग का क्षेत्र आपके लिए किसी सुनहरे विकल्प से कम नहीं होगा। हाल में आई रिपोर्ट के अनुसार अगर इस बार कुछ क्षेत्रों में नौकरी के विकल्प खुल रहे हैं तो उसमें ग्राफिक डिजाइनिंग की दुनिया भी शामिल है। वर्ष 2015 से ही ग्राफिक डिजाइनर की मांग हर ओर बढ़ने लगी है और वर्ष 2016 के अंत तक यह मांग दोगुनी हो गई। देश में ही नहीं विदेशों में भी रोजगार के अवसर बहुत अधिक बढ़ने वाले हैं। ऐसे में अगर आप हर दिन कुछ अलग सोच के साथ कुछ नया करना चाहते हैं तो ग्राफिक डिजाइनिंग आपके लिए एक अच्छा कैरियर साबित होगा”।

                                  

जो बात आप बोलकर नहीं समझा सकते उसे लोगों तक पहुंचाने के लिए ग्राफिकली और विजुअली प्रदर्शित करना होता है। ग्राफिक डिजाइन की दुनिया लगातार विस्तार रूप लेती जा रही है। भले ही यह कहा जाने लगा हो कि अखबार और पत्रिकाओं की दुनिया सिमटने वाली है लेकिन यहां पर ध्यान देने की जरूरत है कि अब किसी भी सनान के ऊपर प्रिंट होने वाली तस्वीर भी ग्राफिक का ही हिस्सा है और इस क्षेत्र में लगातार ग्राफिक डिजाइनर की मांग बढ़ रही है। आज के समय में जो चीज बाहर से खूबसूरत नहीं दिखती उसे खरीदार भी नहीं मिलते इसलिए सभी कंपनियां अपने प्रोडक्ट को तैयार करने में जितना ध्यान देती है, उससे कहीं ज्यादा उसको देखने में खूबसूरत बनाती हैं। यही कारण है कि ग्राफिक डिजाइनिंग के क्षेत्र में युवाओं के लिए मौके बढ़ते जा रहे हैं।

आवश्यक योग्यता

ग्राफिक डिजाइनिंग के क्षेत्र में अपना कॅरियर शुरू करने के लिए न्यूनतम योग्माता किसी भी वर्ग से 12वीं है। ग्रेजुएशन करने के बाद अगर छात्र न चाहे तो इसमें पोस्ट ग्रेजुएशन, डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा और और सर्टिफिकेट कोर्स कर सकता है। इन सभी कोर्सों को अवधि 6 महीने से लेकर 3 वर्ष तक समयावधि के है।

कुछ कोर्स

  • बैचलर इन फाइन आर्ट्स।
  • पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन डिजाइन।
  • ग्रेजुएट डिप्लोमा इन डिजाइन।
  • विजुअल कम्युनिकेशन डिजाइन।
  • ऐंडवरटाइजिंग ऐंड विजुअल कम्युनिकेशन।
  • एप्लाइड आईस ऐंड डिजिटल आर्ट्स।
  • प्रिंटिंग ऐंड मीडिया इंजीनियरिंग।

निर्धारित पाठ्यक्रमः

इस कोर्स में हर कॉलेज का अपना पाठ्यक्रम है, जिसमें छात्रों को सबसे पहले मुख्य डिजाइनों के बारे में जानकारी दी जाती है। इन कोर्स में थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल पर ध्यान दिना जाता है। ग्राफिक डिजाइनिंग के के कोर्स में छात्रों को कंप्यूटर से डिजाइनिंग की भी ट्रेनिंग दी जाती है क्योंकि अब डिजाइनिंग पूरी तरह कंप्यूटर पर ही आश्रित है। साथ ही विज्ञापन का ले-आउट अखबार का ले-आउट, पोस्टर्स, बैनर्स, कार्टून और वेबपेज की डिजाइनिंग का भी खासतौर से प्रशिक्षण दिया जाता है।

ग्राफिक डिजाइनर के कार्य

                                

ग्राफिक डिजाइनर का काम किसी अखबार, पत्रिका या वेबपेज को ऐसे रचनात्मक तरीके से बनाना है, जिससे उस चीज को एक अलग पहचान मिल सके। उदाहरण के तौर पर कोई कंपनी बच्चों की पत्रिका का फ्रंट पेज बनवा रही है, तो यह चाहेगी कि वह पन्ना इतना आकर्षक बने कि लोगों की पहली नजर पड़ते ही उस ब्रांड की वाहवाही हो जाए। एक ऐसा साप, को ग्राहकों के सामने आते ही उनको प्रेरित करे। इस काम के लिए रोज नई थीम सोचने की शक्ति, क्रिएटिविटी बहुत जरूरी है। इसके अलावा किस तरह का ट्रेंड चल रहा है, आधुनिक सॉफ्टवेयर्स की जानकारी, पेशेवर सोच और काम को ठीक समय पर करने की एबिलिटी का होना भी बहुत जरूरी है।

वेतनः

ग्राफिक डिजाइनिंग के क्षेत्र में वेतन की कोई समस्या नहीं है। अगर आप एक जबरदस्त क्रिएटर है तो कंपनी आपको कितना भी वेतन देने में नहीं हिचकिचाएगी। इस कॅरिसर में शुरुआती दौर में एक डिजाइनर को 10 से 15 हजार रुपये आसानी से मिल जाते हैं। अनुभव के आधार पर यह वेतन बढ़कर लाख रुपये तक हो सकता है। फ्रीलांसिंग में यह वेतन रोज के हिसाब से मिलता है। एक फ्रीलांसर ग्राफिक डिजाइनर एक दिन में 3 से 5 हजार रुपये तक आसानी से कमा लेता है।

रोजगार के विकल्पः

आज वैश्वीकरण के इस दौर में ग्राफिक डिजाइनिंग के क्षेत्र में कैरियर और रोजगार को उच्छी संभावनाएं हैं। आज चाहे कंपनी छोटी हो या बड़ी हर कंपनी अपना सामान लोगों तक पहुंचाने के लिए बिलकुल नए तरीके पर विशेष ध्यान देती है। अगर आपके अंदर क्रिएटिविटी है, तो आपका कैरियर हमेशा चमकता रहेगा।

अलग थीम की जरूरतः

भीड़ में अपनी पहचान बनाने के लिए छात्रों को अपनी सोच को सकारात्मक बनाना होता है तभी कुछ अलग थीम सामने आ पाती है। आज दिन प्रतिदिन नए डिजाइनों का आगमन हो रहा है, जो इन्हीं ग्राफिक डिजाइनरों की देन हैं। क्लाइंट का रुख भी समय के साथ बदलता रहता है। उनकी डिमांड को ध्यान में रखते हुए डिजाइन, करना बेहतर रहता है। ग्राफिक डिजाइनर का काम कंप्यूटर पर आधारित है, जबकि पहले यह काम हाथ से, स्केच और कार्टून बनाकर किया जाता था।

प्रमुख संस्थान:-

  • इंडस्ट्रियल डिजाइन सेंटर, आईआईटी,मुंबई www.idc.iitb.ac.in
  • डिपार्टमेंट ऑफ डिजाइन, आईआईटी गुवाहाटी www.itg.ernet.in/design
  • आईआईटी कानपुर www.jitk.ac.in
  • निफ्ट, नई दिल्ली www.nilt.ac.i
  • नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन,अहमदावाद www.nid.edu
  • एजेके मास कम्यूनिकेशन रिसर्च सेंटर, नई दिल्ली www.ajkkmerc.org
  • सहि स्कूल ऑफ आर्ट डिजाइन पेड टेक्नोलॉजी, बंगलुरु www.arishti.ac.in
  • महाराष्ट्र इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी www.mitpune.com
  • सिम्बायोसिस इस्टीट्यूट ऑफडिजाइन, पुणे www.sid.edu.in 

कहां मिलेगी नौकरी

• पब्लिकेशन हाउस

• ऐंडवरटाइजिंग एजेंसी

• वेब

• पैकेजिंग कंपनी

• फिल्म ऐंड टेलीविजन इंडस्ट्री

• मीडिया हाउस

• गेम्स कंपनी

• एमएनसी

• पोस्टर मेकिंग

सॉफ्टवेयर:

वर्तमान समय में ग्राफिक डिजाइन करने के लिए कई तरह के संपिटवेयर्स का उपयोग किया जा रहा है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।