क्या है एटॉर्नी जनरल सॉलिसीटर जनरल?      Publish Date : 24/06/2026

    क्या है एटॉर्नी जनरल सॉलिसीटर जनरल?

                                                                                                               प्रो0 आर. एस. सेंगर

लम्बा अनुभव रखने वाले विधि विशेषज्ञों को केंद्र सरकार महान्यायवादी (एटॉर्नी जनरल) और महाधिवक्ता (सॉलिसीटर जनरल) के पदों पर नियुक्त करती है। इनका काम सुप्रीम कोर्ट या समकक्ष न्यायालयों में आश्यकतानुसार सरकार का पक्ष रखना होता है। राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर आगे बढ़ते समय कानूनी पहलुओं पर सरकारें इनके साथ विचार-विमर्श भी करती है।

सरकारी और निजी वकील

लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट एक दीवानी, फौजदारी, रेवेन्यू या अन्य मामाले से जुड़े मुकदमों की पैरवी के लिए विवाद से जुड़े दोनों पक्षों के अपने वकील होते है। पुलिस या अन्य जांच एजेंसियों द्वारा चलाये जाने वाले मुकदमों की पैरवी करने के लिए लोक अभियोजक यानी सरकारी वकील होते हैं। जिला स्तर पर विधि अधिकारियों का एक पूरा विभाग ही होता है, जिसका नेतृत्व एसपीओ यानी सीनियर प्रांजिक्यूटिंग अफिसर करते है।

बचाव पक्ष की तरफ से निजी भी वकील कोर्ट में मुकदमे की पैरवी करते है। आपसी विवादों में दोनों पक्षों की तरफ से प्राइवेट वकील ही बहस करते हैं। बार कौन्सिल में रजिस्टर्ड होने के बाद ही ऐडवोकेट के रूप में प्रैक्टिस की जा सकती है। विशेषज्ञ और अनुभवी वकीलों को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश पद भी ऑफर भी दिया जाता है।

कॉरपोरेट सेक्टर में बढ़ती मांग

                                          

हाल के वर्षों में कॉरपोरेट कंपनियों के विस्तर के साथ-साथ मल्टीनेशनल कंपनियां भी भारत में तेजी से अपने पांव पसार रही है। इसके अतिरिक्त, स्टार्ट-अप्स के रूप में हर दिन कई नई कंपनियां भी सामने आ रही है और इन सभी को बड़े पैमाने पर लीगल एक्सपर्ट्स की जरूरत होती है। ऐसे में ये कंपनियां बाहर से वकील या विशेषज्ञ हायर करने के बजाए खुद का लीगल विभाग ही बना लेते है, जिसमें अलग-अलग मामलों के विधि विशेषज्ञ शामिल शामिल होते हैं। ये विशेषज्ञ लीगल डॉक्यूमेंटेशन से लेकर सरकारी विभागों और न्यायालयों तक में कंपनी के हितों की देखभाल करते हैं। कंपनियों के बंद होने में भी लीगल एक्सपर्ट्स की जरूरत होती है। कॉपोर्रेट कंपनियों में विशेषज्ञों को आकर्षण सैलरी और इंसेंटिव दिया जाता है।

लीगल फर्स्ट

कानूनी मामलों की लगातार बढ़ रहे मुकदमों को देखते हुए हाल के वर्षों से दुनिया भर में तमाम लीगल कारण सामने आये है। भारत के दिल्ली मुंबई और अन्य बड़े शहरों में भी इस तरह की कंसल्टेंसी देने वाली कंपनियां खुली है। यह अपने क्लाइंट को विधिक सलाह देने के साथ-साथ उनके मुकदमों को भी स्थानीय या अपार कोर्ट में नियमित रूप से देखती है। इसलिए इन फॉर्म में अलग-अलग लीगल एक्सपर्ट्स रखे जाते हैं।

साइबर एक्सपर्ट

ऑनलाइन के प्रसार के चलते इन दिनों साइबर क्राइम की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में साइबर अपराधों के जानकारों की मांग भी तेजी से बढ़ रहीं है। इसमें विशेषज्ञता के लिए लॉ साइबर लॉ का पार्ट-टाईम कोर्स करके अपनी योग्यता का बढ़ा सकते हैं।

अध्ययन-अध्यापन

विधि क्षेत्र में रुचि रखने वाले जो युवा इसमें टीचिंग से जुड़ना चाहते है। ये एलएलबी के बाद एलएम और पीएपी करके कॉलेजों और विश्वद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर से अपने कॅरिअर शुरुआत कर सकते हैं। अनुभव के बाद वह एसोसिएट प्रोफेन्सर और प्रोफेसर ऐंड हेड तक भी बन सकते है।

सामाजिक सरोकार

                                    

अगर आप विधि क्षेत्र में सामानित पेशे से जुड़े काम भी करना चाहते है तो इसके लिए भी पर्याप्त अवसर है। ग्रामीण क्षेत्र के तमाम लोग जमीनों के विवाद को लेकर लम्बे समय तक कोर्ट के चक्कर लगाते हैं। ऐसे कई लोगों की अर्थिक स्थिति ऐसी नहीं होती कि वे अपने मुकदमों को आगे बढ़ा सके। ऐसे लोगों को आप कानूनी सहायता प्रदान कर सकते है या फिर उनके मुकदमों की पैरवी कर सकते हैं। इसके अलावा जेलों में बंद अर्थिक रूम से अक्षम कैदियों को कानूनी सहायता प्रदान कर सकते है, जो सुधरना और मुख्य धारा में शामिल होता चाहते है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।