खनिज संपदा को बचाने की कला माइनिंग इंजीनियरिंग      Publish Date : 12/06/2026

खनिज संपदा को बचाने की कला माइनिंग इंजीनियरिंग

                                                                                                                     प्रो0 आर. एस. सेंगर

“धरती के नीचे मौजूद खनिज संपदा हमारे जीवन के लिए अनमोल है। ऐसे में आए दिन गलत अवैज्ञानिक और अनुचित तरीके से होने वाला दोहन पर्यावरणीय असंतुलन की स्थिति उत्पन्न कर रहा है। ऐसे में अब ऐसे युवाओं की तलाश की जाने लगी है जो प्राकृतिक संपदा को निकालने के काम में प्रशिक्षित एवं दस हैं। युवाओं में धरातल के अंदर की समझ विकसित करने की कला को ही खनन इंजीनियर तथा माइनिंग इंजीनियरिंग कहते है”।

भारत में खनिज संपदा का प्रचुर भंडार मौजूद है। पश्चिम बंगाल, झारखंड, मध्यप्रदेश, असम, बिहार, उड़ीसा व मध्य प्रदेश जैसे राज्य अपनी कोख में भारी मात्रा में खनिज पदार्थ समेटे हैं। देश की अर्थव्यवस्था में खनिज संपदा का महत्वपूर्ण स्थान है। अतः देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए शिक्षित-प्रशिक्षित खनन इंजीनियरों की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है।

क्या है खनन इंजीनियरिंग

                                   

खनन इंजीनियरिंग के तहत खनिज, पेट्रोलियम तथा अन्य भूगर्भीय पदार्थ शामिल होते हैं। देश में खनन कार्यों में आई भारी तेजी के कारण यह क्षेत्र इंजीनियरिंग की एक प्रमुख शाखा बन चुका है। खनन इंजीनियरिंग के अंतर्गत धरती के भीतर खनिज पदार्थों की मौजूदगी का पता लगाना तथा सुरक्षित तरीके से उनकी खुदाई कर धरती से बाहर निकालना शामिल है। खनन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कॅरियर बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण एवं कौशल की जरूरत होती है। जिन युवाओं की खनन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में गहन रुचि हो केवल उन्हें ही इस क्षेत्र में कदम आगे बढ़ाना चाहिए क्योंकि इस क्षेत्र में काफी चुनौतियां है।

इंजीनियरिंग का कार्यक्षेत्र

खनन इंजीनियरिंग के कार्यक्षेत्र में प्रमुख रूम से उत्खनन, कच्चे खनिज पदार्थों का शुद्धिकरण आदि आते हैं। खनन इंजीनियर न केवल खनिजों से धातु और मिश्रधातु का उत्पादन करते हैं, बल्कि इस प्रक्रिया के दौरान वातावरण पर पड़नेवाले नकारात्मक प्रभावों को भी कम करने का प्रयास करते हैं।

                                 

सामान्य रूप से खनन प्रक्रिया एक सुनियोजित भू-प्रायोगिक सर्वे के बाद ही प्रारंभ की जाती है। जिससे यह पता चल जाता है कि पृथ्वी के अंदर कितनी मात्रा में खनिज पदार्थ मौजूद हैं। एक तरीका यह भी है कि सर्वे के अंतर्गत चिह्नित क्षेत्र के किसी भी भू-भाग से पत्थरों को निकालकर उनका त्रिस्तरीय अध्ययन कर प्रतिशत का आकलन किया जाता है।

कौन-कौन से हैं कोर्स

• माइनिंग इंजीनियरिंग में डिप्लोमा।

• माइनिंग इंजीनियरिंग में बीई/बीटेक।

• माइनिंग इंजीनियरिंग में एमइ एमटेक।

• माइनिंग में मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी।

• ओपन कॉस्ट माइनिंग में मास्टर डिग्री।

• मशीनरी इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री।

आवश्यक कौशल

• संसाधन

• स्वतंत्र विचारक समस्या को सुलझाने की काबीलियत

• बात करने में कौशल

यहां करें कोर्स

• भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई।

• भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर।

• भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर।

• भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली।

• भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गुवाहाटी।

• इंडियन स्कूल ऑफ माइस, धनबाद, झारखंड।

• इंस्टिट्यूट ऑफटेक्नोलॉजी, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी।

• बिहार इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सिंदरी, बिहार।

• कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी ऐंड इंजीनियरिंग, उदयपुर, राजस्थान।

• विवसवर्या रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज,नागपुर, महाराष्ट्र।

• गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, रायपुर, छत्तीसगढ़।

कहां मिलती है जॉब

रोजगार की दृष्टि से खनन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अनुभवी व्यक्तियों की सदैव मांगबनी रहती है। सरकारी अथवा प्राइवेट दोनों ही सेक्टरों में रोजगार के पर्याप्त और उजले अवसर विद्यमान है। इस क्षेत्र में शिक्षण अथवा शोध की दिशा में भी कदम बढ़ाया जा सकता है। देश की प्रतिष्ठित कंपनियों जैसे कोल इंडिया लिमिटेड, आईपीसीएल, भारतीय खान ब्यूरो, टाटा आयरन ऐंड स्टील, रिलायंस, इंडियन ऑयल, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया, यूरेनियम कॉपोरेशन ऑफ इंडिया आदि में रोजगार के अवसर हैं

कोर्स के लिए जरूरी

खनन इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए उम्मीदवार को बारहवीं की परीक्षां भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र एवं गणित विषय से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात ही बीटेक, बीई (माइनिंग), बीएससी (माइनिंग इंजीनियरिंग) में प्रवेश दिया जाता है। खनन इंजीनियरिंग के विभिन्न स्नातक पाठ्यक्रमों की अवधि तीन से पांच वर्ष निर्धारित है। इसके बाद छात्र स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम अर्थात एमटेक या एमई जो दो वर्ष का होता है, में प्रवेश के लिए अधिकृत हो जाते हैं। खनन इंजीनियरिंग का पाठ्यक्रम संचालित करने वाले संस्थानों में प्रवेश परीक्षा के आधार पर ही प्रवेश दिया जाता है। इसके लिए विभिन्न संस्थान अखिल भारतीय स्तर पर लिखित परीक्षा का आयोजन करते हैं। लिखित परीक्षा मुख्यतः बारहवीं स्तर के फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स व इंग्लिश आदि विषयों पर आधारित होती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।