अट्रैक्शन इन लॉ प्रोफेशन      Publish Date : 11/06/2026

              अट्रैक्शन इन लॉ प्रोफेशन

                                                                                                           प्रो0 आर. एस. सेंगर

लीगल प्रोफेशन में आकर्षण हमेशा से ही बना रहा है। देश-दुनिया के तमाम जाने-माने लोग इस प्रोफेशन से जुड़ रहे हैं। यहां तक कि आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले महात्मा गांधी से लेकर पण्ड़ित मोतीलाल नेहरू और जवाहर लाल नेहरू सहित तमाम राजनेताओं ने भी वकालत में अपनी पहचान बनाई थी। आजादी से ठीक पूर्व लाल किले में आइएनए के मुकदमे की पैरवी के लिए जवाहर लाल नेहरू ने फिर से काला चोगा पहना था। इस पेशे में वकील और जज के रूप में सम्मानजनक कार्य का अवसर तो है ही, साथ ही कॉरपोरेट लॉयर और लीगल कंसल्टेंट के रूप में भी होनहार युवाओं के बीच इसका आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। इतना ही नहीं, सरकार और नौकरशाही से निराशा बढ़ने की सूरत में सबकी नजरें न्यायपालिका पर ही टिकती हैं।

                               

हाल के वर्षों में न्यायपालिका की सक्रियता के कई उदाहरण भी देखने को हमें मिल चुके है। ताजा मामला उत्तराखंड राज्य का है. जहां सर्वोच्च न्यायालय के सक्रिय हस्तक्षेप से हरीश रावत सरकार बहाल हो सकी। सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ हाईकोर्ट, एनजीटी और यहां तक कि सेशन कोर्ट में जन-सरोकारों, प्रदूषण, स्वच्छता और पर्यावरण को लेकर अपने फैसलों के कारण लगातार चर्चा में बने रहे हैं। इसके चलते केंद्र और राज्य-सरकारों को कोई में फैसला लेने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है। न्यायपालिका की सक्रियता के कारण ही लोगों का विश्वास न्यायपालिका पर सदैव ही रहा है।

कोर्ट से कॉरपोरेट तक प्रत्येक स्तर पर काम करने के अवसर

लीगल प्रोफेशन में रुचि रखने वाले युवाओं के लिए इस फील्ड में सरकारी और निजी क्षेत्र में सन्मानजनक तरीके से काम करने और कामयाबी की ऊंचाई तक पहुंचने के अपार अवसर उपलब्ध है। इसके लिए लॉ में डिग्री हासिल कर और बार काउंसिल में पंजीकरण कराके अपने सफर की शुरुआत की जा सकती है। सरकारी और निजी दोनों ही क्षेत्रों में आगे बढ़ने के कई रास्ते हैं। न्यायपालिका में सेशन कोर्ट के जज से शुरुआत करके बढ़ते अनुभव के साथ विशेष न्यायालयों और हाईकोर्ट में सुप्रीम कोर्ट तक का न्यायामीश बनने की राह पर बढ़ा जा सकता है। इसके अलावा, एटॉनी और लोक अभियोजक यानी सरकारी वकील तक बनने का विकल्प होता है। निजी क्षेत्र में लीगल ऐंडवाइजर कॉरपोरेट लांघर के रूप में काम करने के अलावा अन्य फर्म में भी काम करने का अवसर होता है। इसके अलाक, साइजर लॉ, पेटेट लॉ, इंटेलेक्चुअल प्रोपटी राइट्स, कंपनी लॉ आदि में स्पेशलाइजेशन करके इन उभरते क्षेत्रों में भी पहचान बनाई जा सकी है।

एक जज के रूप में

यदि आप एक ग्रेजुएट है और एक अधिवक्ता के रूप में अपने कॅरियर की शुरुआत करना चाहते हैं, तो राज्य लोक सेवा आयोगों द्वारा आयोजित की जाने प्रॉविशियत सिविल सर्विसेज- गुडिशियल (पीसीएस-वे) परीक्षा पास करनी होगी। इसे क्वालिफाई करने के बाद सत्र या विल न्यायालय में न्यायधीश के रूप में नियुक्ती होती है। बेहतर काम और आवश्यक अनुभव के आधार पर कुछ वर्षों के बाद हाईकोर्ट के जज के रूप में भी चयन हो सकता है। इसी तरह विभिन्न राज्यों के हाईकोर्ट में कार्यरत क वरिष्ठता के आधार पर सुत्रीम कोर्ट में अधिवक्ता नियुकत हो सकते हैं। इसके अलाव, जांच आयोगों का अध्यक्ष या विशेष न्यायालयों। (जैसे टाडा या संयोजई कोर्ट) के जज भी बनाए जा सकते है। जिला, राज्य और राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम में भी न्यायधीश सुनवाई करते हैं। अवकाश प्राप्त जज को राज्यों में लोकायुक्त पद पर भी नियुक्त किया जा सकता है। एक जज के रूप में कानूनी विशेषज्ञता के साथ-साथ संविधान पर भी मजबूत पकड की अपेक्षा की जाती है। 

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।