
भारतीय कंपनियों ने माना, नौकरी के लिए अंग्रेजी जरूरी Publish Date : 31/05/2026
भारतीय कंपनियों ने माना, नौकरी के लिए अंग्रेजी जरूरी
प्रो0 आर. एस. सेंगर
यदि भर्ती प्रक्रिया के दौरान अंग्रेजी भाषा का बेहतर आकलन किया जाए, तो उनके संगठनों की कार्यक्षमता में काफी सुधार होगा। भारत में काम करने वाले 98 फीसदी एचआर लीडर्स का ऐसा मानना है। एजुकेशनल टेस्टिंग सर्विसेज (ईटीएस) की ओर जारी टीओईआईसी ग्लोबल इंग्लिश. स्किल्स रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश विशेषज्ञों ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कमजोर अंग्रेजी दक्षता की भरपाई नहीं कर सकता है।
टीओईएफएल और जीआरई जैसी परीक्षाएं आयोजित कराने वाले प्रिंसटन स्थित ईटीएस की रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में 97 फीसदी नियोक्ता मानते हैं कि पांच साल पहले की तुलना में आज अंग्रेजी दक्षता अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। सर्वे के अनुसार, 84 फीसदी एचआर लीड़र्स का कहना है कि अंग्रेजी कौशल की कमी वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान पैदा करती है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 87 प्रतिशत नियोक्ताओं के अनुसार, कार्यस्थल पर एआई के बढ़ते उपयोग' ने अंग्रेजी दक्षता की आवश्यकता को और बढ़ा दिया है।
शोध में भारत सहित 17 देशों के एचआर शामिल

यह शोध 17 देशों के 1,325 एचआर निर्णय निर्माताओं के सर्वेक्षण पर आधारित है। इसमें ब्राजील, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, भारत, जापान, मैक्सिको, मोरक्को, सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया, स्पेन, ताइवान, थाईलैंड, तुर्किये, यूएई और वियतनाम शामिल हैं। ईटीएस के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय निदेशक अजय प्रताप सिंह ने कहा, जैसे-जैसे भारतीय कंपनियां वैश्विक स्तर पर विस्तार कर रही हैं, वे ऐसी टीमों का निर्माण करना चाहती हैं जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बदलती कार्यशैली के लिए तैयार हों।
बढ़ते वैश्विक सहयोग के कारण बढ़ी अंग्रेजी की जरूरत: 94 फीसदी नियोक्ताओं का मानना है कि बढ़ते वैश्विक सहयोग के कारण अंग्रेजी की जरूरत बढ़ी है। वहीं, 90 फीसदी नियोक्ताओं के अनुसार संगठन की सफलता के लिए अंग्रेजी दक्षता महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनियां अब सॉफ्ट स्किल के बजाय अंग्रेजी को कोर कर्मचारी क्षमता के रूप में देख रही है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
