नेटवर्किंग का सही मतलब समझें      Publish Date : 15/05/2026

            नेटवर्किंग का सही मतलब समझें

                                                                                                                        प्रो0 आर. एस. सेंगर

लोगों से जुड़ना सिर्फ बहिर्मुखी लोगों के लिए आसान है, यह सोच सही नहीं। असल में, कोई भी पूरी तरह अंतर्मुखी या बहिर्मुखी नहीं होता।

                                         

अक्सर नेटवर्किंग को ज्यादा लोगों से मिलना या कुशलतापूर्वक बात करना समझा जाता रहा है, लेकिन इसमें विशेषज्ञता हासिल करना हर किसी के लिए आसान नहीं होता, खासकर इंट्रोवर्ट (अंतर्मुखी) लोगों को इसमें मुश्किलें भी आ सकती हैं। उन्हें लग सकता है कि लोगों से जुड़ना सिर्फ एक्सट्रोवर्ट (बहिर्मुखी) लोगों के लिए आसान है। लेकिन यह सोच सही नहीं है। नेटवर्किंग का मतलब सबसे ज्यादा बोलना नहीं है, बल्कि सही लोगों से सच्चे और मजबूत रिश्ते बनाना है। अंतर्मुखी लोग भी अपने शांत स्वभाव, ध्यान से सुनने की आदत और गहराई से जुड़ने की कला के जरिये इसमें उतने ही सफल हो सकते हैं।

अपनी खूबियों को पहचानें

नेटवर्किंग न कर पाना आत्मविश्वास की कमी नहीं, बल्कि आपकी सोच पर निर्भर करता है। कई लोग गहराई से सोचते हैं और ध्यान से सुनते हैं, जो उन्हें बेहतर संबंध बनाने में मदद करता है। हर किसी से बात करने के बजाय एक या दो लोगों से अर्थपूर्ण बातचीत करना अधिक प्रभावी होता है। जिज्ञासा के साथ की गई नेटवर्किंग अधिक स्वाभाविक और असरदार बनती है।

सीखने के अवसर के रूप में देखें

नेटवर्किंग का सही अर्थ लोगों को प्रभावित करना नहीं, बल्कि उनसे जुड़ना है। जब आप इसे सीखने और समझने के अवसर के रूप में देखते हैं, तो बातचीत अधिक स्वाभाविक हो जाती है और दबाव भी कम महसूस होता है। इससे आप सामने वाले को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं और एक भरोसेमंद संबंध बना सकते हैं। ऐसी बातचीत लंबे समय तक यादगार बनी रहती है और अधिक प्रभावशाली होती है।

प्रकृति के अनुरूप तैयारी

                                        

चाहे आप अंतर्मुखी हों या बहिर्मुखी, दोनों के लिए अपनी प्रकृति के अनुसार तैयारी करना उपयोगी होता है। यदि आप पहले से तय कर लें कि किसी कार्यक्रम में जाने का आपका उद्देश्य क्या है, तो आपका आत्मविश्वास बढ़ जाता है। साथ ही, जिन लोगों से मिलना जरूरी है, उनसे बातचीत के लिए कुछ सरल विषय पहले से तैयार रखना भी काफी मददगार साबित होता है। इससे आप बातचीत की शुरुआत आसानी से कर पाते हैं।

फॉलो-अप करें

नेटवर्किंग को मजबूत बनाने में फॉलो-अप बहुत जरूरी है। किसी से मिलने के बाद एक छोटा-सा संदेश भेजना- जैसे धन्यवाद कहना या बातचीत को आगे बढ़ाना यह दर्शाता है कि आप उस रिश्ते को महत्व देते हैं। इससे संबंध मजबूत होते हैं और लंबे समय तक बने रहते हैं।

खुद को पर्याप्त समय दें

किसी भी व्यक्ति के लिए अपनी ऊर्जा का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि नेटवर्किंग में थकान होना सामान्य बात है। इसलिए जरूरत से ज्यादा कार्यक्रमों में न जाएं और खुद को पर्याप्त समय दें। संतुलन बनाए रखना ही लंबे समय तक प्रभावी और स्वस्थ तरीके से नेटवर्किंग करने की कला है। इससे आप बिना थके लगातार बेहतर तरीके से लोगों से जुड़ पाते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।