
माइक्रो लर्निंगः कम समय में अधिक सीखने की बेहतर तकनीक Publish Date : 21/04/2026
माइक्रो लर्निंगः कम समय में अधिक सीखने की बेहतर तकनीक
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
जॉब या पढ़ाई के साथ किसी नए स्किल को सीखना कोई आसान काम नहीं है। ऐसे में हमे सीखने की एक ऐसी पद्वति का विकास करना होगा, जो बिना अधिक समय लिए आपको एक नए स्किल के क्षेत्र में महारथी बना सके। ऐसे में माइक्रो लर्निंग नए स्किल को सीखने में आपकी सहायता करता है।
वर्तमान के डिजिटल युग, जानकारियों का विस्फोट है, परन्तु हमारे पास समय का भारी अभाव है। ऐसे में किसी भारी से भारी जानकारी को छोट-छोटे, प्रभावी हिस्सों में बांटकर सीखें तो यह काम काफी आसान और शीघ्र हो जाता है और इसी तकनीक को माइक्रो लर्निंग कहते हैं। यह पद्वति इस सिद्वांत पर काम करती है कि यदि हम अपनी दिनचर्या में से मात्र 15 मिनट का भी सही दिशा में निवेश करें, तो साल के अंत तक हम एक नए स्किल में पारंगत हो सकते हैं।
15 मिनट का विज्ञान

विभिन्न शोधों के निष्कर्ष बताते हैं कि मानव के मस्तिष्क की एकाग्रता के स्तर में निरंतर कमी हो रही है। अध्ययन के परिणम कहते हैं कि एक लम्बे लेक्चर की तुलना में छोटे-छोटे अंतराल में कही गई या की गई बातों को याद रख पाने की सम्भावनाएं 20 प्रतिशत अधिक होती है। इस तरीके से सीखा गया कुछ भी ज्ञान एक पारम्पारिक क्लास रूम ट्रेनिंग की तुलना में 17 प्रतिशत तक अधिक स्थाई होता है।
हर दिन सीखें स्किल
इस प्रकार से आपको किसी नए स्किल को सीखने के लिए किसी विशेष समय आवा स्थान की आवश्यकता नहीं होती है। इसके लिए आप अपने ऑफिस जाते समय मेट्रो अथवा रात को सोने से पहले के ‘डेड टाइम’ का उपयोग भी कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप प्रतिदिन केवल 15 मिनट किसी नए एआई टूल को छोटे-छोटे माड्यूल्स को सीखने में खर्च करते हैं तो आप बिना किसी मानसिक तनाव के अपने आपको भावी चुनौतियों के लिए बेहतर ढंग से तैयार कर पाते हैं। आपकी यह निरंतरता ही अंततः बड़े करियर बदलावों का आधार बनकर सामने आती है।
अमल करने की आदत

किसी भी स्किल को सीखने के दौरान सबसे बड़ी बाधा ‘शुरूआत करने का डर’ होती है, जिसका बचाव इस माइक्रो पद्वति के द्वारा आसानी से किया जा सकता है। शीघ्रता से सबकुछ सीख लेने का तनाव हमारे ऊपर दबाव बनाता है। वहीं माइक्रो लर्निंग पद्वति से किसी बड़े लक्ष्य को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर इसे पूरा करना काफी आसान होता है और हमें इसको पूरा करना भी आसान लगता है, जो अंततः हमारे आत्मविश्वास में भी वृद्वि करता है।
हालांकि, किसी भी नए स्किल को सीखने में हमें पारंगता उस समय प्राप्त होती है, जब हम अपने सीखे गए हुनर को अविलम्ब अपने काम के दौरान उसे अपनी प्रेक्टिस में शामिल कर उसका निरंतर अभ्यास करते रहते हैं। क्योंकि सीखे गए स्किल को निरंतर अपने अभ्यास में शामिल करने की प्रक्रिया हमारी इस नई जानकारी को स्थायित्व प्रदान करती है। इस प्रकार से यदि हम हर दिन मासत्र 15 मिनट का छोटा निवेश करते हैं तो यह हमारे रियर को नई ऊँचाईयां भी प्रदान कर सकता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
