बेवजह के कामों में उलझने से बचें      Publish Date : 08/04/2026

          बेवजह के कामों में उलझने से बचें

                                                                                                            प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

“नेतृत्व का अर्थ यह नहीं कि हर काम खुद किया जाए, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी निभाए”

जब किसी संगठन में नेतृत्व बदलता है या प्रक्रियाओं में अव्यवस्था उत्पन्न होती है, तो अक्सर टीम का सबसे सक्षम कर्मी हर समस्या को संभालने लगता है। शुरुआत में यह स्थिति भरोसे और दक्षता का संकेत लगती है, लेकिन धीरे-धीरे यह भरोसा निर्भरता में बदल जाता है। इसके परिणामस्वरूप, वह व्यक्ति लगातार बढ़ते काम के दबाव और जिम्मेदारियों की वजह से थकान और मानसिक दबाव महसूस करने लगता है, जबकि संगठन की उस पर निर्भरता और अधिक बढ़ती जाती है।

                                             

इसलिए आवश्यक है कि जिम्मेदारियों का उचित वितरण किया जाए और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट रूप से तय की जाए, ताकि कार्यप्रणाली संतुलित, सक्षम और सही ढंग से चल सके।

समस्या को पहचानें

कार्यस्थल पर हर समस्या को अकेले सुलझाना सही रणनीति नहीं है। सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि क्या समस्या को तुरंत हल करने की जरूरत है और क्या यह आपकी जिम्मेदारी है। अक्सर हम दूसरों का काम भी अपने ऊपर ले लेते हैं, जिससे अनावश्यक दबाव बढ़ जाता है। अगर आप हर चीज खुद सुलझाएंगे, तो टीम के सदस्य जिम्मेदारी लेना छोड़ देंगे। इसलिए काम शुरू करने से पहले सोचें कि यह काम किसका है। यह आदत हमें बेवजह के बोझ से बचाती है।

जिम्मेदारी को स्पष्ट करें

जब काम की जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं होती, तो कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं। लोग यह नहीं समझ पाते कि निर्णय कौन लेगा और किसे जवाबदेह माना जाएगा। ऐसे में अक्सर सबसे जिम्मेदार व्यक्ति ही सारा काम अपने ऊपर ले ले लेता है। सही तरीका यह है कि काम शुरू करने से पहले तय कर लिया जाए कि कौन निर्णय लेगा, कौन जिम्मेदार होगा, किससे सलाह ली जाएगी और किसे जानकारी दी जाएगी। इससे टीम में स्पष्टता आती है, और काम सुगमता से होने लगता है।

टीम को जिम्मेदार बनाएं

                                       

अनजाने में हर समस्या को खुद हल करने से टीम के अन्य सदस्य जिम्मेदारी लेना नहीं सीख पाते। इसलिए हर समस्या को सही व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है। यदि कोई समस्या आपकी जिम्मेदारी नहीं है, तो साफ बताएं कि यह काम किसका है और आप किस तरह मदद कर सकते हैं। इस तरह आप केवल समस्या हल नहीं करते, बल्कि पूरी टीम को जिम्मेदार बनाना भी सिखाते हैं।

नजरिया बदलें

सही नेतृत्व का मतलब यह नहीं कि हर काम खुद किया जाए, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी निभाए। इससे लीडर खुद पर अनावश्यक दबाव कम करते हैं, टीम जिम्मेदार बनती है और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। यही सच्चा और प्रभावी नेतृत्व है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।