
ताकि संवाद कायम रहे Publish Date : 07/04/2026
ताकि संवाद कायम रहे
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
ऑफिस की मीटिंग में चाहे छोटी हो या बड़ी पूरे मनोयोग से शामिल हों, क्योंकि बातचीत से ही नए विचारों का रास्ता खुलता है, अक्सर आप कार्यस्थल पर दिनभर कई मीटिंग्स में शामिल होते हैं, जैसे व्यक्तिगत मीटिंग, विभागीय अपडेट आदि। आपके पास समय सीमित होता है, इसलिए आप हर मीटिंग पर पूरी तरह ध्यान नहीं दे पाते हैं। हैं। ऐसे में आपकी सोच यही होती है कि क्या मीटिंग का यह विषय इतना महत्वपूर्ण या रोचक है कि मुझे इस पर पूरी गंभीरता के साथ ध्यान देना चाहिए?

असल में यह एक तरह का मानसिक शॉर्टकट है। यानी आप पहले से ही यह अनुमान लगाने की कोशिश करते हैं कि कौन-सी बातचीत आपके लिए महत्वपूर्ण होगी। यहां समस्या यह है कि शुरुआत में किसी विषय को कम रोचक समझने की वजह से आप नए विचारों से चूक सकते हैं। इसलिए केवल रोचक या बड़ी मीटिंग्स पर ध्यान देने के बजाय, सामान्य मीटिंग्स को भी गंभीरता से ब्लेना जरूरी है।
थोड़ा समय दें
अक्सर लोग पहले से ही यह तय कर लेते हैं कि उन्हें किस विषय या बातचीत पर ध्यान देना चाहिए और किस पर नहीं। इसके लिए वे जल्दी फैसला लेने वाले मानसिक शॉर्टकट का सहारा लेते हैं। लेकिन कई बार जो चर्चा शुरुआत में साधारण या कम रोचक लगती है, वही बातचीत शुरू होने के बाद ज्यादा प्रभावी और उपयोगी बन जाती है। इसलिए किसी विषय को पहले से नजरअंदाज करने के बजाय उसे थोड़ा समय देना बेहतर होता है।
मीटिंग्स में रुचि दिखाएं
जब आप किसी बैठक में पूर्ण गंभीरता और मनोयोग के साथ शामिल नहीं होते, जैसे बीच-बीच में दूसरे काम करना या जल्दी से निष्कर्ष पर पहुंचने की कोशिश करना, तो बातचीत गहराई तक नहीं जा पाती। लेकिन जब आप सक्रिय रूप से चर्चा में शामिल होते हैं, सवाल पूछते हैं और तुरंत अपनी प्रतिक्रिया देते हैं, तो साधारण-सा लगने वाला विषय भी महत्वपूर्ण और उपयोगी चर्चा में बदल सकता है। इससे नए विचार सामने आते हैं और टीम के साथ बेहतर समझ भी बनती है।
अपनी सक्रियता दिखाएं

यदि नियमित बैठकों या अपडेट के समय आप अनिच्छुक नजर आते हैं. तो आपके सहकर्मी भी खुलकर अपनी बात साझा करने से हिचकने लगते हैं। ऐसी स्थिति में संगठन के अंदर एक दूरी पनपने लगती है। जब तक आपको इन समस्याओं की जानकारी मिलती है, तब तक वे काफी गंभीर रूप धारण कर चुकी होती हैं। इसलिए जरूरी है कि आप नियमित अपडेट के दौरान भी सक्रियता दिखाएं, ताकि कर्मचारी खुलकर जानकारी साझा कर सकें।
बातचीत को बढ़ावा दें
रोजमर्रा के विषयों पर खुलकर बातचीत होने से काम में सुगमता और वृद्धि देखने को मिलती है। ऐसे में कर्मचारी भविष्य की चिंताओं या नए विचारों को साझा करने में खुलकर भाग लेते हैं। इसके अलावा, यह धारणा कि नियमित बैठकें काम करने की दक्षता को कम करती हैं, सही नहीं है। वास्तव में, सार्थक और खुला संवाद मानसिक संसाधनों की पुनः पूर्ति करने में मदद करता है, जिससे कर्मचारी अधिक उत्पादक और दृढ़ बनते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
