भारत में एमबीए की शिक्षा का अगला पड़ाव      Publish Date : 05/04/2026

  भारत में एमबीए की शिक्षा का अगला पड़ाव

                                                                                                                    प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

पिछले दो दशकों में भारत में एमबीए की शिक्षा का काफी विस्तार हुआ है। वैश्विक स्तरीय शिक्षा प्रदान करने वाले कुछ मुट्ठी भर प्रबंधन संस्थानों में आइआइएम जैसे देश के कुछ प्राइवेट प्रबंधन संस्थान ही राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात हैं, किंतु एक गतिशील क्षेत्र होने के कारण इस क्षेत्र में कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाये जाने की आवश्यकता है ताकि एमबीए की शिक्षा के भविष्य को और उज्ज्वल बनाया जा सके।

भारत में एमबीए क्यों?

                                

इस संबंध में सबसे पहली बात जिसका मूल्यांकन करना है वह है इसका मुख्य उद्देश्य, जो एमबीए को अपने करियर के विकल्प के रूप में प्राथमिकता देने की लिए प्रोत्साहित करता है। पारंपरिक रूप से छात्रों के लिए उपलब्ध श्रेष्ठ करियर विकल्प के रूप में एमबीए को कॉरपोरेट सेक्टर में विकास करने के क्रम में मुख्य अस्त्र की तरह देखा जाता है। यह अब भी एमबीए के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का मुख्य स्रोत है, लेकिन आजकल छात्र इसके अतिरिक्त अन्य दूसरे लक्ष्यों की तरफ भी रुख करने लगे हैं।

किसी भी संस्था के चुनाव में सिर्फ उसके जरिये मिलने वाली नौकरियां एवं आंकड़े ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि छात्रों का तीव्र करियर ग्रोथ, स्वयं के साथ-साथ संस्था के स्तर पर कुशलता में बढ़ोत्तरी एवं प्रभावपूर्ण गुणों के साथ विश्व व्यापार में उनके पदार्पण के लिए एक सही मंच की उपलब्धता को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। एक अन्य रोचक बात जो आजकल एमबीए अभ्यर्थियों द्वारा विशेष रूप से ध्यान में रखा जा रहा है, वह है किसी भी प्रबंधन संस्थान द्वारा गत 5 से 10 वर्षों के दौरान उत्तीर्ण होकर निकले छात्रों की सफलता के अनुपात को देखा जाना। ये सभी तथ्य एमबीए संस्थान के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

एमबीए के बाद करियर संभावनाएं

                               

वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी जैसी चुनौतियों के बावजूद भी भारत में प्रबंधन की शिक्षा ने छात्रों को उद्योगों के तात्कालिक जरूरतों के मुताबिक ढालने एवं विकसित करने में सफलता हासिल की है। अभी भी पारंपरिक पेशे, जैसे-निवेश बैंकिंग, प्रबंध सलाहकार एवं वित्तीय विश्लेषक की काफी मांग है। लेकिन कुछ नए व्यवसाय भी हैं जो एमबीए स्नातकों के लिए एक सफल करियर की संभावना के रूप में उभरे हैं, जैसे लक्जरी मैनेजमेंट अथवा फैशन एवं अपेरल जो पारंपरिक रूप से क्रिएटिव एजेंसीज द्वारा चलाये जाते हैं। अब ज्यादातर कंपनियां अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स की तलाश करने लगी हैं।

रोजगार का अनुपात

भारत में एमबीए की शिक्षा के संबंध में सबसे महत्वपूर्ण पक्षों में से एक है रोजगार का अनुपात। वर्तमान समय में प्रबंधन की शिक्षा के स्तर तथा इसकी गुणवत्ता को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि हमारे देश में एमबीए का पाठ्यक्रम तथा प्रशिक्षण पद्धति वैश्विक मानकों के अनुरूप है। इससे यह सपष्ट होता है कि हमारे देश के मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स किसी भी रूप में अपने वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम पढ़े-लिखे अथवा कम प्रशिक्षित नहीं हैं। एक पहलू, जहां भारतीय प्रबंधन संस्थान पिछड़ जाते हैं वह है इंडस्ट्री एक्सपोजर तथा इंडस्ट्री इंटरफेस।

ऐसे संस्थान जहां इंडस्ट्री एक्सपोजर तथा इंडस्ट्री इंटरफेस पर अत्यधिक जोर दिया जाता है, वहां के छात्र अत्यधिक सफलता अर्जित करते हैं। छात्रों की यह सफलता क्षणिक नहीं होती, बल्कि वे अपने करियर में लगातार व्यावसायिक कामयाबी हासिल करते रहते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।