आत्मविश्वास का खेल है साक्षात्कार      Publish Date : 30/03/2026

        आत्मविश्वास का खेल है साक्षात्कार

                                                                                                               प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

लालकिले की प्राचीर से भले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौकरी के लिए लिखित परीक्षा के बाद इंटरव्यू की व्यवस्था के प्रति अपनी अनिच्छा जता चुके हों, लेकिन हकीकत यही है कि आज इंटरव्यू विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं का महत्पूर्ण है। चाहे लोकसेवा आयोग की परीक्षाएं हों या किसी इवेट कंपनी में ही अंतिम रूप से चुने जाने कि बात ही क्यों न हो, इंटरव्यू आज लगभग हर किस्म की नौकरी में शामिल है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि नौकरियां कम हैं और चाहने वाले बहुत ज्यादा हैं।

इसलिए नौकरी देने वाली संस्था, संगठन, कंपनी सबके कपास बेहतर से बेहतर कर्मचारी चुनने की सुविधा है और वो इसके लिए हर उस उपाय का इस्तेमाल करते हैं ताकि बेहतर से बेहतर आवेदक को चुन सकें। यही कारण है कि लिखित परीक्षा में पास हो जाने के बाद भी एक बार फिर से परीक्षार्थी के व्यक्तित्व की मौलिक परीक्षा ली जाती है।

साक्षात्कार में मौके हैं भरपूर, डरिए नहीं

                                     

साक्षात्कार का मतलब है आपकी समझ और आपके व्यक्तित्व की मौलिक परीक्षा। यानी इसमें आपको बात करते हुए भी यदि कहीं गलती हो भी जाए, तो खुद को सुधारने और साबित करने के कई मौके मिलते हैं। लिखित परीक्षा में यह सुविधा नहीं होती है। लिखित परीक्षा में एक बार आपने अगर कुछ लिख दिया तो उसके बाद उसे बदल देने की सुविधा नहीं होती। लेकिन इस सुविधा के बावजूद भी इंटरव्यू अगर किसी लिखित परीक्षा से भी ज्यादा डरावना लगता है तो इसलिए कि लिखित परीक्षा में एक किनम का एकांत मिलता है, जबकि साक्षात्कार में यह सुविधा नहीं होती।

साक्षात्कार का समूचा ढांचा बहिमुखीं होता है। आप जो कह रहे हैं, उसे उसी क्षण कई लोग जांचने के लिए तैयार रहते हैं। एक सवाल के बाद दूसरा सवाल आपकी समझ की थाह लेने के लिए तैयार रहता है। नतीजा यह होता है - कि आप कितने ही प्रतिभाशाली क्यों न हों, आपका अपनी प्रतिभा और समझ को लेकर विश्वास डगमगा जाता है।

पर्सनल इंटरव्यू बनाम ग्रुप डिस्कशन:

साक्षात्कार यानी इंटरव्यू का गठन बदल रहा है जिसमें परंपरागत तौर पर एक परीक्षार्थी और कई परीक्षण बातचीत में व्यक्तित्व, नेतृत्व और योग्यता का परीक्षण करते हैं। लेकिन अब जीडी यानी ग्रुप डिस्कशन लिया जाने लगा है जो प्रतियोगी छात्रों के बीचसे चुनने की परीक्षकों की समस्या को काफी हद तक कम कर देता है। यह अब अधिक लोकप्रिय चयन प्रक्रिया का हिस्सा इसलिए है कि एक और यह चयन चाहने वाले परीक्षार्थियों को अपनी अभिरूचि और योग्यता की अभिव्यक्ति का मौका भरपूर देता है, वहीं दूसरी ओर योग्य उम्मीदवार का चयन करने की जिम्मेदारी संभाल रहे बोर्ड मेंबर्स को तुतरात्मक चयन में अधिक सुविधा होती है।

हां, आजकल ऐसी भी चयन प्रक्रिया है. जिसमें पर्सनल इंटरव्यू के बाद ग्रुप डिस्कशन-डिबेट में हिस्सा लेने को कहा जाता है। जाहिर है कि यहां भी आपका आत्मविश्वासी होना काम आता है और वही सफलता की गारंटी बनता है।

परिचित हों इंटरव्यू के एरिया से

                                  

इंटरव्यू लेने वाले का आपके विषय और क्षेत्र में महारत हासिल होना जरूरी नहीं है लेकिन चूंकि अनुभव आपसे अधिक है इसलिए वह आपसे आपके विषयों पर तमाम बातों को पूछने की क्षमता रखते हैं। जाहिर है ऐसे में आपके द्वारा कहे गए प्रत्येक शब्द, तथ्य और तर्क की दिशा और प्रवाह पर उनकी नजर होती है।

पैनल देखता है कि आप मानसिक सतर्कता, आलोचनात्मक ग्रहणशक्ति, स्पष्टऔर तर्कसंगत प्रतिपादन के मामले में, शक्ति संतुलनके संबंध में कैसी योग्यता रखते हैं? क्या आपमें निर्णय की शक्ति, रुचि की विविधता, गहराई, नेतृत्व और सामाजिक संगठन की योग्यता है? जरा सोचिए इस सबसे घबराना कैसा क्योंकि आपने जो कुछ पढ़ रखा है, जो अपका अनुभव क्षेत्र है, आपसे संवाल उसी में से पूछे जाएंगे।

खुद कीजिए इंटरव्यू की ड्राइविंग

यह कहने कि कोई जरुरत ही नहीं है कि उस विषय के ही सवाल आपसे पूछे जाएंगे जिसके आप जानकार हैं और जिसकी लिखित परीक्षा में आप पास हुए हैं। हां, आपके द्वारा तथ्यों और तर्कों का चयन इस रूप में करना जरूरी हैजिसमें आप स्वयं को नए क्षेत्रों में, अनजान विषयों में खुदको न धकेल लें। जब इंटरव्यू की तैयारी करें तो आत्मविश्वास इस तरह से ही बढ़ेगा कि यदि एनएसजी पूछा जाना है तो एनपीटी, एमटीसीआर जैसी बातें और उरपचने गतिविधियां भी तैयार करके जाएं। यानी इंटरव्यू में आपका आत्मविश्वास इस बात पर टिका है कि अपने विषय और तर्क की दिशा को संचालित करने में ड्राइविंग कौन कर रहा है, आप या इंटरव्यू लेने वाला।

भ्रम न पालें, आप रोज इंटरव्यू लेते-देते हैं

इंटरव्यू से पहले तरह तरह के सवाल बिना किसी जरुरत के दिलो-दिमाग में कब्जा जमाकर बैठ जाते हैं। इनके चलते आत्मविश्वास गड़बड़ा जाता है। जबकि सोचने और समझने की बात यह है कि इंटरव्यू जीवन की एक बहुत सहज प्रक्रिया है। हम रोजमर्रा के जीवन में हर पल किसी का इंटरव्यू या तो लेते रहते हैं या फिर अपना देते रहते हैं। लेकिन चूंकि तब यह सब पता नहीं होता इसलिए इसका हम पर कोई मनोवैज्ञानिक रूप से बुरा असर नहीं होता।

मगर किसी व्यवस्थित साक्षात्कार का सामना पड़ते हो हम घबरा जाते हैं। हमारा आत्मविश्वास डगमगा जाता है। इस सबका नतीजा यह निकलता है कि इंटरव्यू लेने वाले पैनल के सामने हम किसी सवाल पर अपनी वास्तविक राय ही व्यक्त नहींकर पाते। जबकि वह आवेदक से, जो कि पहले से ही सबसे कठिन पुरीक्षा पास कर चुका होता है. इतना भर जानना चाहता है कि अमुक मुद्दे पर उसकी राय क्या है ?

आत्मविश्वास है कुंजी

यह अजीब मनोवैज्ञानिक स्थिति देखने में आती है कि कई योग्य और मेधावी छात्र जो कि लिखित परीक्षा में तो अद्वितीय प्रदर्शन करते हैं, पर साक्षात्कार में असफल हो जाते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि साक्षात्कार के दौरान कई उम्मीदवार आत्मविश्वास की कमी के कारण घबरा जाते हैं और सफलता का स्वर्णिम अवसर खो बैठते हैं। साक्षात्कार में सफलता की सबसे महत्वपूर्ण शर्त है- खुद पर आत्मविश्वास। साक्षात्कार में असफल या आत्मविश्वास की कमी हो जाने का भय उन छात्रों में कहीं ज्यादा पाया जाता है जो पहले कभी असफल हो चुके होते हैं। ऐसे छात्रों को यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि इस संसार में आज तक ऐसा कोई व्यक्ति हुआ ही नहीं, जिसने कभी असफलता का सामना न किया हो।

इंटरव्यू की समग्रता को समझें

एक बात याद रखें कि इंटरव्यू कोई एक विषय नहीं है कि आप उसके सवाल रट लें और पास हो जाएं। इंटरव्यू समग्रता में आपकी समझ है। इंटरव्यू की तैयारी एक दिन, एक रात व एक सप्ताह या महीने में नहीं की जा सकती है जैसा कि कई लोग सोचते हैं या कोशिश करते हैं। सही तो यह है कि साक्षात्कार के लिए विभिन्न विषयों में अपनी समझ स्पष्ट करनी चाहिए। विभिन्न सम-सामयिक मुद्दों में स्पष्ट समझ व राय बनानी चाहिए। साक्षात्कार को कभी संकट नहीं समझना चाहिए बल्कि यह सोचकर प्रसन्न होना चाहिए कि लम्बे समय से किये गये परिश्रम तथा तैयारी का प्रमाण प्रस्तुत करने का सही समय आ गया है।

पैटर्न तो होता ही है इंटरव्यू का

साक्षात्कार के प्रश्नों का बहुत हद तक पूर्वानुमान किया जा सकता है लेकिन सुनिक्षित नहीं हुआ जा सकता कि यहीं सवाल पूछे जाएंगे। साक्षात्कार को शुरुआत प्रायः सामान्य रुचि के प्रश्नों से की जाती है, कई नामों के साहित्यिक वा शाब्दिक अर्थ होते है, नाम के बाद उम्मीदवार के जन्म स्थान तथा सम्बन्धित राज्य आदि के विषय में प्रश्न पूछे जाते हैं। याद रखिये साक्षात्कार बोर्ड के पास आपका सम्पूर्ण बायोडाटा, जीवन परिचय आदि रहता है। उम्मीदवार से उसकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि से जुड़े प्रश्न पूछा जाना स्वाभाविक है।

कुछ सवाल कभी पुराने नहीं पड़ते बार बार पूछे जाते हैं। इंजीनियरिंग और मेडिकल से पढ़ाई करने वाले छात्र जब सिविल सेवा परीक्षा पास करते हैं तो उनसे इंटरव्यू में अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि तकनीको क्षेत्र की शिक्षा हासिल करने के बावजूद वह सिविल सेवा में क्यों आना चाहते हैं? इसी तरह यह भी एक बहुत ही कॉमन सवाल है कि आपकी रुचि क्या है? यदि इस नौकरी के लिए आपका चयन नहीं हुआ तो आप क्या करेंगे? इसी तरह अपने किसी कमजोर पक्ष की चचर्चा करें? ये सब इस बात का सबूत है कि इंटरव्यू बिल्कुल कठिन नहीं होते, अतः इससे बिल्कुल न घबराएं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।