
उभरती जॉब संभावनाएं Publish Date : 29/03/2026
उभरती जॉब संभावनाएं
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
“टेक्नोलॉजी के विस्तार के साथ अर्थ-साइंस के क्षेत्र में जॉब की नई संभावनाएं उभर रही है। पृथ्वी के रहस्यों को जानने और इससे जुड़े क्षेत्र में अपना फ्यूचर देखते है, तो अर्थ-साइंस और इससे जुड़े फील्ड में शानदार करियर बना सकते हैं”:-
आज टेक्नोलॉजी का दायरा बढ़ने के साथ अर्थ-साइंस और इससे संबंधित फील्ड का भी तेजी से विस्तार हो रहा है। इसमें कई नए क्षेत्र उभर सामने आए है, जिनमें जॉब की काफी अच्छी संभावनाएं देखी जा रही हैं। इस फील्ड में काम करने वाले जियोलॉजिस्ट यानी भू-वैज्ञानिक पृथ्वी से जुड़ी तमाम अनसुलझी पहेलियों के बारे में डाटा एकत्र करने का काम करते हैं। साइंस के इस ब्रांच के तहत पृथ्वी यानी अर्थ, इसके एनवॉयर्नमेंट, हिस्ट्री, मिनरल्स आदि की स्टडी की जाती है। जियोलॉजी की स्टडी करने वाला स्टूडेंट्स जियोलॉजिस्ट, हाइड्रोजियोलॉजिस्ट, मेट्रोलॉजिस्ट, जियोग्राफर आदि के रूप में काम करते हैं। इस फील्ड से जुड़े पेशवर के लिए पेट्रोलॉजी, पैलियोन्टोलॉजी, जियोफिजिक्स, माइनिंग, एनवॉवर्नमेंटल एजुकेशन, रिसर्च, फील्ड स्टडी आदि में कार्य करने का मौका होता है।
स्पेशलाइजेशन

अर्थ-साइंस की कई ब्रांचेज हैं। इनमें एनवॉयर्नमेंट स्टडी, माइनिंग, जियोटेक्नोलॉजी, डिजास्टर मैनेजमेंट, एटमॉसफेरिक साइंस, क्लाइमेट चेंज, ओशनोग्राफी, रिमोट सेंसिंग, अप्लायड हाइड्रोजियोलॉजी, कार्टोग्राफी, जियोग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम, मिनरलॉजी, वाल्केनोलॉजी, सॉयल साइंस, जियोमोफॉलॉजी, जियोलॉजिकल इंजीनियरिंग आदि प्रमुख हैं।
जॉब के अवसर
जियोलॉजिस्ट का काम जितना चुनौतीपूर्ण है, उतना ही रिकॉर्डिंग भी है। अर्थ-साइंस के फील्ड में गवर्नमेंट के साथ-साथ प्राइवेट सेक्टर में भी जॉब की काफी संभावनाएं हैं। यूपीएससी जियोलॉजिस्ट (जूनियर) ग्रुप ए, असिस्टेंट जियोलॉजिस्ट ग्रुप थी इन जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, पद के लिए एग्जाम आयोजन करती है। जियोलॉजिस्ट और जियोग्रॉफर्स के लिए के लिए पेट्रोलियम कंपनियों के अलावा, खनन कंपनियों, गवर्नमेंट और प्राइवेट कंपनियों में कार्य करने का खूब अवसर होता है। डिफेंस और पैरा मिलिट्री, रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट, एनवायर्नमेंटल कंसल्टिंग कंपनी में भी इनकी जरूरत होती है।
द सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड, कोल इंडिया, मिनरल एक्सप्लोरेशन अथॉरिटी, ऑयल ऐंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन, हिन्दुस्तान जिंक आदि में खनिज पदार्थों की खोज के लिए जियोलॉजिस्ट की डिमांड बनी रहती है। जियोलॉजी बैकग्राउंड से जुड़े लोग एनवॉयर्नमेंटल साइंटिस्ट, जियोग्राफर, जियोफिजिसिस्ट, हाइड्रोग्राफर, ओशनोग्राफर या माइनिंग इंजीनियर के रूप में नौकरी पा सकते हैं। पीएचडी करने वालों के लिए रिसर्च एसोसिएट और टीचिंग में भी मौके हैं।
किस फील्ड में कहां हैं मौके
ओशनोग्राफी: इस फील्ड में नमूने एकत्र करना, सर्वे और अत्याधुनिक उपकरणों से डाटा का आकलन जैसे कार्य होते हैं। इसमें काम करने वालों को ओशनोग्राफर कहा जाता है। इसमें पानी के घुमाब, बहाव की दिशा और उसकी फिजिकल व केमिकल सामग्री पर नजर रखा जाता है, जिससे पता चलता है कि तटीय इलाकों, वहां के मौसम पर क्या असर होगा। ओशनोग्राफर्स गवर्नमेंट और प्राइवेट ऑर्गेनाइजेशन में साइंटिस्ट, इंजीनियर या तकनीशियन के रूप में नौकरी पा सकते हैं। इनके लिए गवर्नमेंट से जुड़े जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, मेटिरियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और डिपार्टमेंट ऑफ ओशनोग्राफी के अलावा, मैरीन इंडस्ट्री से जुड़ी रिसर्च संबंधी इंस्टीट्यूट्स में भी जॉब्स के बेहतर अवसर होते हैं।
जीआइएसः टेक्नोलॉजी के इस दौर में जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम यानी जीआइएस तेजी से उभरता हुआ फील्ड है। इसकी मदद से किसी टारगेट एरिया की मैपिंग की जाती है। खासकर इसका इस्तेमाल अर्थ साइंस, एग्रीकल्चर, डिफेंस, न्यूक्लियर साइंस, आर्किटेक्चर, टाउन प्लानर, मैपिंग, मोबाइल आदि क्षेत्र में खुब हो रहा है। इस फील्ड में जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, फोटोग्रामैट्री, जीआइएस एप्लिकेशन, जीआइएस डेवलपमेंट, जियोस्टैटिस्टिक, जीआइएस प्रोजेक्टडेवलपमेंट, वेब जीआइएस आदि में स्पेशलाइजेशन किया जा सकता है।
इस फील्ड से जुड़े प्रोफेशनल्स के लिए इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो), नेशनल रिमोट सेंसिंग एजेंसी (एनआरएसए), नेशनल इन्फॉर्मेटिक सेंटर (एनआइसी), स्पेस एप्लिकेशन सेंटर, अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी, म्यूनिसिपल बॉडीज आदि में करियर की बेहतर संभावनाएं हैं। इसके अलावा, नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट, इमरजेंसी मैनेजमेंट, मिलिट्री कमांड, ट्रांसपोर्टेशन मैनेजमेंट, सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट, अर्बन डेवलपमेंट, बिजनेस एप्लिकेशन आदि क्षेत्र में भी करियर के विकल्प तलाश सकते हैं।

माइनिंग: माइनिंग फील्ड में अर्थ-साइंस से जुड़े स्टूडेंट्स के लिए काफी मौके होते हैं। आमतौर पर माइनिंग दो तरह की होती है- अंडर ग्राउंड माइन और ओपन-पिट माइन। अंडरग्राउंड माइन में ही मिनरल मिलते हैं, जिन्हें माइनिंग द्वारा निकाला जाता है। अंडरग्राउंड माइन द्वारा सोने और कोयले को निकाला जाता है, वहीं ओपन पिट माइनिंग द्वारा आयरन ओर, लाइमस्टोन, मैंगनीज आदि को निकाला जाता है। इस फील्ड से जुड़े लोगोंके लिए स्टील अर्थारिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड, कोल इंडिया लिमिटेड, आइपीसीएल, नेवली लिग्नाइट कॉरपोरेशन, प्रेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, आइबीपी लिमिटेड में ऑब की बेहतर संभावनाएं हैं।
इसके अलावा, रिसर्च और पढ़ाने के क्षेत्र में भी अवसर तालाश सकते हैं। ऑपरेशन, इंजीनियरिंग, सेल्स और मैनेजमेंट में ऑब्स के अवसर होते हैं।
सॉयल साइंसः सोंगल साईस के दीप में भी शानदार करियर ऑप्शंस हैं। साँयल साइंटिस्ट मिट्टी की एनालिसिस करते हैं। सॉगल साइंस से जुड़े प्रोफेशनल सॉयल मैनेजमेंट पर अपनी सलाह देते हैं। सौगल साइंटिस्ट रिसर्चर, डेवलपर और ऐंडवाइजर होते हैं, इसलिए वे अपनी नॉलेज का इस्तेमाल साँवल मैनेजमेंट के लिए करते हैं। साँवल साइंटिस्ट फील्ड के साथ-साथ लैबोरेट्री में भी काम करते हैं। इस फील्ड से जुड़े प्रोफेशनल्स सॉयल केमिस्ट्री, माइकोबायोलॉजी, फिजिक्स, पेडोलॉजी, मिनरोलॉजी, बायोलॉजी, फर्टिलिटी, प्रदूषण, पोषण, बायोफर्टिलाइजर, सॉयल हेल्थ एनालिसिस आदि पर काम करते हैं। इनके लिए एग्रीकल्चर, वाटर रिहेबिलिटेशन प्रोजेक्ट्स, सॉयल ऐंड फर्टिलाइजर टेस्टिंग लैबोरेट्रीज, ट्रांसपोर्टेशन प्लानिंग, आर्कियोलॉजी, लैंडस्केप डेवलपमेंट जैसे फील्ड्स में जॉब्स के काफी मौके हैं।
नेचर और एग्रो कंसल्टिंग फर्म्स में भी इस फील्ड से जुड़े प्रोफेशनल्स की डिमांड होती है। कुछ सालों का एक्सपीरियंस हासिल करने के बाद सॉयल साइंटिस्ट के रूप में अपना कार्य शुरू किया जा सकता है।
ज्योग्राफी: ज्योग्राफी के फील्ड में भी इन दिनों बेहतर करियर ऑप्शंस मौजूद हैं। ज्योग्राफी के एक्सपर्ट रिमोट सेंसिंग एजेंसी, मैप एजेंसी, फूड सिक्योरिटी, बायोडायवर्सिटी फील्ड में अलग-अलग भूमिका निभा सकते हैं। अगर आप इस फील्ड में अपने करियर को आगे ले जाना चाहते हैं, तो स्पेशलाइजेशन के साथ मास्टर्स डिग्री जरूरी है। ट्रांसपोर्टेशन, पर्यावरण विज्ञान, एयरलाइन रूट, शिपिंग रूट प्लानिंग, सिविल सर्विसेज, कार्टोग्राफी (नक्शे बनाना), सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, मौसम विज्ञान विभाग, एजुकेशन, आपदा प्रबंधन जैसे कई क्षेत्रों में नौकरी मिल सकती है।
कार्टोग्राफी: कार्टोग्राफी प्रोफेशनल्स की डिमांड भी काफी बढ़ रही है। काटोग्राफर बनने के लिए बैचलर ऑफ कार्टोग्राफी कोर्स करना होता है। अर्थ साइंस या फिर साइंस ग्रेजुएट भी इस क्षेत्र में करियर बना सकते हैं। इसमें डिजिटल मैपिंग और ज्योग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम (जीआइएस) सबसे ज्यादा काम में आता है। दरअसल, मैप का इस्तेमाल इंडिविजुअल से लेकर इंडस्ट्रियल आदि के लिए किया जाने लगा है, इसलिए प्लानर्स, यूटिलिटी कंपनियों, स्टेट एजेंसीज, कंस्ट्रक्शन कंपनियों, सर्वेयर्स, आर्किटेक्ट्स सभी को कार्टोग्राफर की जरूरत पड़ती है। इस तरह मौसम की फोरकास्टिंग, ट्रैवल ऐंड टूरिज्म, ज्योलॉजिकल, मिनिरल एक्सप्लोरेशन, मिलिट्री डिपार्टमेंट, पब्लिशिंग हाउसेज में जॉब के अच्छे मौके हैं।
जियोफिजिक्सः आज जियोफिजिक्स के क्षेत्र में भी अवसरों की कमी नहीं है। इसमें धरती के बारे में स्टडी किया जाता है। जियोफिजिसिस्ट न केवल पृथ्वी के अंदर के रहस्यों को उजागर करता है, बल्कि उन्हें पता होता है कि धरती के अंदर क्या चल रहा है। आज जियोफिजिसिस्ट की जरूरत नेचुरल गैस और पेट्रोलियम पदाथों की खोज में भी पड़ती है। इसके अलावा, एनर्जी और एनवायर्नमेंट से जुड़े कामों में भी जियोफिजिसिस्ट अहम भ अहम भूमिका अदा करते हैं। साथ ही, माइंस को निकालने में भी सहयोग देते हैं। जियोफिजिक्स के जुड़े प्रोफेशनल्स के लिए ऑयल ऐंड गैस इंडस्ट्री, एनवायर्नमेंटल कंसल्टिंग कंपनी, नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट, मिलिट्री, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में जॉब्स के मौके होते हैं।
सैलरी पैकेज
अर्थ साइंस विज्ञान से जुड़ा ही एक फील्ड है। इसलिए इस क्षेत्र में साइंटिस्ट, रिसर्चर और इंजीनियरिंग चैकग्राउंड के लोग हो काम करते हैं। यही कारण है कि लोगों की शुरुआत में ही 40 से 50 हजार की मासिक सैलरी आसानी से मिल जाती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
