
ताजगी भरा कॅरियर चाय में Publish Date : 27/03/2026
ताजगी भरा कॅरियर चाय में
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
भले ही औपचारिक रूप से चाय, दुनिया का पहले नंबर का पेय पदार्थ न हो और इसे लैटिन अमरीका में कहया और अमरीका व यूरोप में कॉफी व कोल्ड ड्रिंक से मात खानी पड़ती हो, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि कॉफी, कोल्ड डिक्स, चाय में से अकेली चाय ही वह पेय है जिसकी खपत में लगातार वृद्धि हो रही है। आचर्यजनक बात यह है कि चाय की खपत की वृद्धि देश में भी हो रही है और विदेश में भी।
ऐसे में अगर आंकड़ों की अनुमानित संख्या के हिसाब से बात की जाए तो पिछले 10 सालों में लगभग 50 करोड़ नए लोगों ने चाय पीनी शुरू की है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि चाय का भविष्य क्या है?
तेज है टी सेक्टर का ग्रोथ
वास्तव में पेय पदार्थों की बात चाय बिना पूरी ही नहीं होती। दिमाग को तरोताजा करने वाली चाय अब करिअर में भी नयी ताजगी का संचार कर रही है। हाल के सालों में चाय के कारोबार में 20 फीसदी से ज्यादा सालाना की वृद्धि हुई और इसकी पैदावार में भी 15 से 20 फीसदी का इजाफा हुआ है। दुनिया में जैसे-जैसे लोग चाय के स्वाद के आदी होते जा रहे हैं, वैसे वैसे इसके रूप-रंग और फ्लेवर में बदलाव होता जा रहा है।
आज चाय कई स्वादों और तरीकों में बनाई जा रही है। दुनिया में चाय का उत्पादन करने वाले देशों में भारत अव्वल नंबर पर है। इसके अलावा चाय की खपत और निर्यात करने में भी भारत पहले स्थान पर आता है।
टी मैनजमेंट में भरपूर हैं अवसर

चाय की दिनों दिन बड़ी हो रही दुनिया ने इसे एक भरोसेमंद कॅरियर का दर्जा भी दे दिया है। तमाम पारंपरिक करिअर्स से अलग होने के कारण यह क्षेत्र रोचक भी माना जाता है। इसमें नौकरी करने का अर्थ है अन्य कामों की तुलना में अलग अनुभव होना।
इस क्षेत्र में कई प्रकार के काम उपलब्ध हैं। चाय के क्षेत्र में तमाम तरह की नौकरियों को एक साथ रखकर इस क्षेत्र को टी मैनेजमेंट के नाम से जाना जाता है। टी मैनेजमेंट के क्षेत्र में सबसे उन्नत कार्य टी टेस्टिंग का होता है जिसमें चाय का परीक्षण किया जाता है। इसके अलावा इस क्षेत्र में अन्य कई प्रकार के काम उपलब्ध हैं जिसमें शोधकतां, टी ब्रोकर, प्लाटेंशन मैनेजर, कंसल्टेंट आदि से जुड़े कार्य किये जा सकते हैं।
विविधतापूर्ण है चाय के क्षेत्र में काम
चांय उद्योग के अलग-अलग कायों में प्लांटवर्क,ऑक्सनिंग, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, रिसर्च ऐंड मार्केटिंग शामिल हैं। प्लटिशन से जुड़े कार्य में चाय के पौधों को लगाना और इसके लिए जमीन की उर्वरा शक्ति को खाद के जरिए बनाए रखना शामिल है। प्रोसेसिंग के कार्य में चाय की पत्तियों को तोड़कर इनकी सफाई और फिर इन्हें सुखाने का कार्य किया जाता है। पत्तियों को फैक्ट्री तक ले जाना भी प्रोसेसिंग के कार्य के अंतर्गत आता है। फैक्ट्री में तैयार चाय को परोक्षण के लिए भेजा जाता है। इसके अलग-अलग सैम्पल की जांच की जाती है। टी टेस्टर के जरिये चाय को ब्रांड दिया जाता है।
चाय बेल्ट और जॉब एरिया

भारत में चाय का उत्पादन करने वाले राज्यों में असम, पश्चिम बंगाल के दार्जलिंग और तमिलनाडु का नीलगिरी क्षेत्र प्रमुख हैं। चाय की खेती में एक खास बात यह है कि एक ही बगीचे में अलग-अलग प्रकार की चाय उगाई जा सकती हैं। अलग-अलग प्रकार की चाय उगाने के लिए इनकी देखरेख भी उसी स्तर की करनी होती है। जाहिर है ऐसे लोग जो एकदम प्राकृतिक माहौल में काम करने के इच्छुक हैं उनके लिए टी सेक्टर यह अवसर भी देता है, वहीं यदि आप पूरी तरह रिसर्च और फ्लेवर के फील्ड में आना चाहते तो लैब्स आपका स्वागत कर रही हैं।
क्या हो आपकी योग्यता और क्षमता
टी मैनेजमेंट के क्षेत्र में करिअर बनाने के इच्छुक व्यक्ति को शारीरिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर होना चाहिए। टी मैनेजमेंट के अंतर्गत कभी-कभी चाय के बगीचों में पूरा- पूरा दिन भी विताना पड़ता है, इसलिाए मेहनत करने का माद्या होना चाहिए। याय के प्रकारों को जानने समझने के लिए मजदूरों के साथ बगीचों में चाय की परख भी की जाती है, ऐसे में चाय की ताजगी-सी मृदुभाषिता इस क्षेत्र का विशेष गुण है।
माहौल के अनुसार खुद इको ढाल लेना भी आना चाहिए, नेतृत्व करने का गुण भी जरूरी है। टी मैनेजमेंट के क्षेत्र में करिअर बनाने की योजना बना रहे हैं तो जरूरी है कि इस क्षेत्र का पूरा ज्ञान होना चाहिए, इसमें टी मार्केट और लगातार होते बदलाव की जानकारी रखना जरूरी है।
टी मैनेजमेंट
टी मैनेजमेंट के क्षेत्र में जो भी कार्य किए जाते हैं उनके बारे में बारीक जानकारियां होना जरूरी है। टी मैनेजमेंट के क्षेत्र में चाय के बागीचों का नियंत्रण मैनेजर के हाथ में होता है। बगीचे के आकार के अनुसार यह पद असिस्टेंट या जूनियर असिस्टेंट मैनेजर के रूप में भी हो सकता है। मैनेजर का मुख्य कार्य होता है चाय के पौधों को लगाने से लेकर पत्तियों को तोड़ने तक के बीच पूरी नजर बनाए रखना, इसके अतिरिक्त पैकिंग की प्रक्रिया और चाय को ऑक्सन हाउस में ट्रांसपोर्ट करने की जिम्मेदारी भी मैनेजर पर ही होती है।
टी टेस्टर
टी मैनेजमेंट के क्षेत्र में स्पेशलाइज एरिया टी टेस्टर का होता है। टी टेस्टर चाय के अलग-अलग फ्लेवर की जांच करता है और उनके आधार पर चाय बरे क्वालिटी और ग्रांड देता है। टी टेस्टर का काम है, चाय को सही मापदंडों से परखना और इसमें जो भी कमी हो उसे सीधे तौर पर व्यक्त कर देना।
रिसर्च इन टी
चाय उद्योग का महत्वपूर्ण हिस्सा शोध भी है। इस क्षेत्र में तमाम शोधकर्ता जो कि बायोलॉजिस्ट या बॉटनिस्ट कहलाते हैं, चाय के अलग-अलग प्रकार और क्षमताओं का विकास करते हैं। चाय में रोग निरोधक क्षमता के गुण डालना भी इन्हीं शोधकताओं का कार्य होता है।
इंटरनेशनल ऑक्शन, ब्रोकिंग हाऊस
चाय का उत्पादन करने वाले और इसे खरीदने वालों के बीच की भूमिका निभाना टी ब्रोकर का काम होता है। इन्हें चाय के अंतर्राष्ट्रीय मूल्यों और बाजार की मौजूदा हालत व चलन से अपडेट रहना होता है। ऑक्सन सेंटर में चाय का स्वाद और इसकी गुणवत्ता की पड़ताल टी ब्रोकर भी करता है; क्योंकि इसी के आधार पर यह ब्रांड को बाजार मेंप्रोत्साहित करेगा। देश में कई ब्रोकिंग हाउस उपलब्ध हैं जहां पर ब्रोकर अलग-अलग बगीचों से आई चाय का परीक्षण करते हैं और उसी के आधार पर चाय को बाजार में प्रचारित करते हैं।
संभावित सैलरी पैकेज
जहां तक इस क्षेत्र में औसतन वेतन की बात है तो अलग अलग कामों के लिए अलग अलग वेतन है जो कि न्यूनतम 25-30 हजार रुपये से शुरू होकर दो ढाई लाख रुपये महीने तक जाता है। चाय की खपत और विश्व बाजार में मांग बढ़ने के कारण साल 2020 तक इस क्षेत्र में करीब 5 लाख नए लोगों की जरूरत होगी।
प्रमुख संस्थान
टी मैनेजमेंट के क्षेत्र में करिअर बनाने के लिए स्नातक होना जरूरी है। इस क्षेत्र में शिक्षा प्राप्त करने के लिए देशभर में कई नामी संस्थान मौजूद हैं।
1. असम एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी
2. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लटिशन मैनेजमेंट
3. डिप्रास इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्ट्डोज
4. एनआईटीएम, दार्जलिंग टी रिसर्च ऐंड मैनेजमेंट एसोसिएशन
5. असम, दार्जलिंग टी रिसर्च सेंटर
6. यूपीएएसआई टी रिसर्च इंस्टीट्यूट
7. बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ फ्यूचस्टिक स्ट्डीज
8. द टी टेस्टर अकादमी

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
