
मोबाइल एप डेवलपमेंट नए जमाने का कॅरियर Publish Date : 26/03/2026
मोबाइल एप डेवलपमेंट नए जमाने का कॅरियर
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
गूगल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक इस समय भारत में चार करोड़ भारतीय अपने स्मार्टफोन पर इंटरनेट का इस्तेमाल करते है और एक सप्ताह में करीब तीन करोड़ एप्लीकेशन डाउनलोड करते है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक एप्पल के एप्लीकेशन स्टोर से अब तक 40 अरब एप्स डाउनलोड किए जा चुके हैं जो पहले से काफी ज्यादा हैं। पिछले साल दिसंबर में तो नया रिकॉर्ड बना जब डाउनलोड का यह आंकड़ा 2 अरब के करीब पहुंच गया। इस क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार प्रत्येक भारतीय यूजर इन एप्लीकेशन का इस्तेमाल करते हुए दिन में लगभग 52 मिनट खर्च करता है और यही कारण है कि एप्स की मांग बढ़ने से कंपनियों की जमकर कमाई भी हो रही है।
बाजार में बढ़ रही मांग

देश और दुनिया भर में जैसे-जैसे मोबाइल यूजर्स की संख्या बढ़ रही है उसी अनुपात में मोबाइल एप्लीकेशन का बाजार भी बढ़ रहा है। एक अनुमान के मुताबिक 2011 में मोबाइल एप्स का वैश्विक राजस्व 46,750 करोड़ रुपये था और 2016 तक इसके 2 लाख 53 हजार करोड़ रुपये होने का अनुमान है। भारत में मौजूदा समय में लगभग 2 लाख 50 हजार डेवलपर काम कर रहे है और बढ़ती डिमांड को देखते हुए करीबन 20 हजार अतिरिक्त डेवलपर्स की जरूरत और है।
क्या है मोबाइल एप्लीकेशन
मोबाइल एप्लीकेशन एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम है जिसका इस्तेमाल अलग-अलग रूप में मोबाइल डिवाइस, गूगल एंड्रॉयड, आईपैड और आईफोन के ऑपरेटिंग सिस्टम में किया जाता है। सामान्यतः मोबाइल एप्लीकेशन दो तरह के होते हैं। नेटिव, एप्पल, आईओएस या गूगल एंड्रॉयड जैसे मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए तैयार किए जाने वाले एप पहले समूह में आते हैं और दूसरे वर्ग में मोबाइल वेब शामिल है, जहां एचटीएमएल जैसी लैंग्वेज का उपयोग किया जाता है और चलाने के लिए ब्राउजर की जरूरत होती है।
मोबाइल डेवलपर का काम

मोबाइल डेवलपर सॉफ्टवेयर इंजीनियर या सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर होते हैं जो मोबाइल एप्लीकेशन की डिजाइनिंग के साथ-साथ एक या एक से अधिक मोचाइल ऑपरेटिंग सिस्टम और डिजाइन जैसे एप्पल, आईओएस या गूगल एंड्रॉयड पर इनकी जांच करते हैं। वे डेवलपर एक बार मोबाइल एप्लीकेशन के बाजार में आने के बाद यूजर्स से मिले उसके फीडबैक के आधार पर उसके फीचर्स में बदलाव भी करते हैं। कई बार किसी विशेष मोबाइल एप के नए वर्जन भी लॉन्च किए नाते हैं।
योग्यता
मोबाइल एप डेवलपर एक सॉफ्टवेयर इंजीनिगर की तरह ही काम करते हैं। इस क्षेत्र को चुनने वाले युवाओं में सी-प्लस-प्लस, जावा जैसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में कमांड होना बेहद जरूरी है। एप डिजाइनिंग की फंडामेंटल नॉलेज होना जरूरी है। हर डेवलपर को आईफोन या आईपैड डेवलपर के रूप में कोई प्लेटफॉर्म तय करना होता है। मसलन यदि आप गूगल एंड्रॉयड डेवलपर बनना चाहते हैं तो आपको जावा में अच्छी कमांड होनी चाहिए और एंड्रॉयड डेवलपमेंट में दक्ष होना होगा। यही नहीं एक अच्छा डिजाइनर बनने के लिए आपके पास कलात्मक और रचनात्मक हुनर होना चाहिए। कंप्यूटर साइंस में बीई, बी-टेक, एम-टेक, एमसीए या आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल और कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन कर इस क्षेत्र में अपना कैरियर बना सकते हैं।
अवसरों की कमी नहीं
मोवाइल ऑपरेटर, मोबाइल डेवलपमेंट एप्लीकेशन कंपनियों और वैल्यू एडेड सर्विसेज प्रोवाइडर्स के यहां एप्लीकेशन डेवलपर की विशेष डिमांड रहती है। कैरियर एक्सपर्ट के मुताबिक इस क्षेत्र में जिस तेजी से मांग बढ़ सही है उसकी तुलना में स्किल्ड ह्यूमन रिसोर्स की बहुत कमी है। यहां आप मोचाइल डिजाइनर और यूजर एक्सपीरियंस ऐंड यूजेबिलिटी विशेषज्ञ के रूप में भी काम कर सकते है। मोबाइल एप्लीकेशन बनाने वाले इंजीनियरों को मोबाइल आर्किटेक्ट के रूप में भी काम मिलता है।
आकर्षक सैलरी
मोबाइल एप्लीकेशन तैयार करने एवं उसकी मार्केटिंग का यह कॅरियर जहां चुनौतियों भरा है, वहीं इसमें मिलने वाला आकर्षक वेतनमान इसे किसी भी युवा के लिए सपनों का कॅरियर बनाता है। एप्लीकेशन डेवलपमेंट का कोर्स पूरा करने के बाद आप डेवलपर के तौर पर 2 लाख पचास हजार से 5 लाख रुपये सालाना की कमाई कर सकते हैं। अनुभव बढ़ने के साथ मोबाइल एप डेवलपर को 5 से 7 लाख रुपये सालाना का पैकेज भी मिलता है।
प्रमुख संस्थान
• भारती विद्यापीठ डीम्ड यूनिवर्सिटी-पुणे (महाराष्ट्र)।
• एनआईआईटी-गुड़गांव (हरियाणा)।
• कोडफ्रक्स-बेंगलुरू (कर्नाटक)।
• जीनियस पोर्ट-पुणे (महाराष्ट्र)।
बाजार में मांग:
- 04 करोड़ से अधिक भारतीय अपने स्मार्टफोन में इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं।
- भारत में इस समय 03 करोड़ मोबाइल एप एक सप्ताह में डाउनलोड किए जाते हैं।
- अब तक भारत में 40 अरब एप्स एप्पल के डाउनलोड किए जा चुके हैं।
- 52 मिनट खर्च करता है एक भारतीय (एप यूजर) मोबाइल एप्लीकेशन पर।
- 02 लाख 53 हजार करोड रुपये का बाजार 2016 के अंत तक पहुंच जाएगा।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
