डिग्री से ज्यादा कार्य कुशलता है जरूरी      Publish Date : 24/03/2026

     डिग्री से ज्यादा कार्य कुशलता है जरूरी

                                                                                                  प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

हाल के सालों में एक के बाद एक विभिन्न प्रोफेशनल क्षेत्रों के बारे में जो रिपोर्टस सामने आई हैं वो काफी डरावनी हैं। औद्योगिक संगठन एसोचम ने कुछ महीने पहले अपने एक अध्ययन में पाया था कि देश में महज 5 फीसदी एमबीए ही काम के हैं, बाकी किसी काम के नहीं हैं। एसोचम के अध्ययन से यह भी बात खुलकर सामने आयी थी कि 10 में से 8 एमबीए को बहुत कम सेलरी पैकेज में नौकरी करनी पड़ती है। 30 प्रतिशत एमबीए तो 10,000 रुपये या इससे कम के मासिक वेतन पर काम कर रहे हैं और तकरीबन 25 फीसदी एमबीए के पास तो किसी किस्म का कोई जॉब ही नहीं है।

एमबीए ही नहीं इंजीनियर्स भी

कुछ ऐसा ही हाल देश की एक और प्रतिष्ठित प्रोफेशनल डिग्री बो-टेक धारकों की भी है। देश में महज 8 फीसदी इंजीनियर ही ऐसे हैं जो इंजीनियरिंग क्षेत्र की तीन प्रमुख बुनियादी शाखाओं मसलन- सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल क्षेत्र में काम करने के लायक हैं। यहां तक कि आईआईटी से डिग्री हासिल करने वाले इंजीनियरों के बारे में भी विशेषज्ञों की यही राय है, हां वहां के इंजीनियरों की हालत वैसी नहीं है जैसी दूसरे संस्थानों के।

इंफोसोसिस के पूर्व चेयरमैन एन नारायणमूर्ति और पिछली मनमोहन सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री रहे जयराम रमेश कह चुके हैं कि आईआईटी से निकले छात्रों में से सिर्फ 15 से 20 फीसदी ही किसी काम के हैं।

जमी नहीं, जमीनी हो कुशलता

                           

कहने का मतलब आपके पास सिद्धांत रूप में भले कितनी ही महत्वपूर्ण संस्थान या पाठ्यक्रम की डिग्री क्यों न हो, लेकिन अगर व्यावहारिक रूप में आपने अपने क्षेत्र की तकनीकी कुशलता नहीं हासिल की है तो ऐसी डिग्री का कोई फायदा नहीं है। निःसंदेह डिग्री महत्वपूर्ण होती है, लेकिन अगर वह आपको तकनीकी रूप से कुशल नहीं बनाती तो आपके नौकरी पाने की गारंटी नहीं है। कुशलता में दक्ष हुए बिना यदि नौकरी किसी तरह मिल भी गई तो वह आपके पास बनी रहेगी, इसकी भी कोई गारंटी नहीं है।

परीक्षाएं भले तमाम सिद्धांतों और पिछले सालों के Question पेपर्स को फॉलो कर, रट करके पास कर ली जाती हों, मगर यदि व्यवहारिक रूप में आप उन सिद्धांतों को कामकाजी दुनिया में जमीनी तौर पर इस्तेमाल नहीं कर सकते, तो आपकी डिग्री का कोई फायदा नहीं है। डिग्री और कुशलता में मेल के लिए जरूरी है हम बहुत गंभीरता से पढ़ें और सिर्फ विषयों को रटें ही नहीं बल्कि उनके अंदर तक वही हमें भीड़ में अलग बनाती है, व्यवहार में कुशल बनाती है।

हां, आप अकेले दोषी नहीं

अल्बर्ट आइंस्टाइन अकसर कहा करते थे, 'मैं कोई खास बौद्धिक क्षमता वाला छात्र नहीं हूं। हां, मेरे दिलोदिमाग में बहुत रोमांचक किस्म की जिज्ञासाएं लगातार उमड़ती घुमड़ती हैं। यहीं मुझे खास प्रतिभाशाली छात्रों में शुमार कराती हैं।' दरअसल हमारा समूचा शैक्षिक तंत्र याद्दाश्त की परीक्षा का तंत्र है। हम चीजों को रट लेते हैं और उन्हीं रटी हुई चीजों को परीक्षा में ज्यों की त्यों उतार देते हैं। इससे परीक्षा तो हम पास कर लेते हैं लेकिन जब व्यवहारिक जीवन में हमें अपने क्षेत्र की विशेषज्ञता दिखानी होती है तो हमारी यह बौद्धिक क्षमता काम नहीं आती। तब वे रटा हुआ पाठ्यक्रम, जुबान में मौजूद सारे महत्वपूर्ण समीकरण किसी काम के नहीं लगते।

कुशलता संबंधी ट्रेनिंग हमारे कामकाजी जोवन में या कहें प्रोफेशनल लाइफ में सबसे ज्यादा काम आती है। वास्तव में पढ़ाई के दौरान इंटर्न या घंटों लैब में गुजारना हमें अच्छा नहीं लगता लेकिन जब हम छात्र नहीं रह जाते, कार्य-शक्ति में तब्दील होकर उसकी एक ईकाई हो चुके होते हैं, तब हमें इसकी महत्वता का पता चलता है।

रचनात्मक और विश्लेषणात्मक क्षमता का विकास

                            

वास्तव में अगर आपकी दिमागी क्षमता विश्लेषणगरक है तो आप चीजों की तह तक जा सकते हैं। अगर नहीं, ती चाहे आप कितने ही अच्छे छात्र क्यों न रहे हों, कामकाज की व्यवहारिक दुनिया में आपका कुछ बस नहीं चलेगा। गूगल्स के उपाध्यक्ष लाजलो योक ने न्यूयार्क टाइम्स को दिए गए अपने एक साक्षात्कार में कहते हैं कि, 'हर किस्म के काम में एक रचनात्मकता छिपी होती है। लेकिन यह रचनात्मकता तभी आनंद के लायक बनती है, जब हमने उस काम की शानदार ट्रेनिंग हासिल की होती है और हम उसमें दक्ष होते हैं।' कहने का मतलब कुशलता सिर्फ दाग करना आने के लिए जरूरी नहीं होती बल्कि काम का आनंद लेने के लिए और काम के शिखर पर पहुंचने के लिए भी जरूरी होती है।

गूगल के उपाध्यक्ष के मुताबिक हम लोग गूगल के लिए कर्मचारियों का चयन करते समय उनकी भारी भरकम डिग्रियों पर नहीं जाते बल्कि उनके काम करने की क्षमता पर गौर करते हैं और हमारे लिए उनके द्वारा सम्पन्न काम की कुशलता ही सबसे बड़ी डिग्री होती है।

जानकार नहीं, काम के अनुभवी बनिए

हमारी संस्थानिक शिक्षा हमारे दिमाग को एक व्यवस्था देती है कि आखिर सीखें कैसे 17 जबकि कुशलता आपको सिखाती है कि सीखी हुई शिक्षा को व्यवहारिकता में उपयोग कैसे करें? सैद्धांतिक रूप से किसी चीज को जान लेना महत्वपूर्ण है लेकिन उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण कि हम सीखी हुई शिक्षा का कितना बेहतर और कितना व्यवस्थित उपयोग करते हैं।

आज की तारीख में भाषा और संचार कुशलता हमारे व्यक्तित्व विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिएप्रबंधन की किताबों में पढ़े गए बड़े बड़े फॉर्मूले और सिद्धांत कई बार इस कुशलता के सामने फीके पड़ जाते हैं। इंटरव्यू के समय भी इंटरव्यूर आसानी से समझ लेता है कि आपकी कुशलता और आपकी डिग्रियों के बीच किस किस्म का अनुपात है, अकसर लोकरी तभी मिलती है, जब कुशलता का पलड़ा भारी निकलता है।

पढ़ें, समझें, दिलचस्पी लें

टैलेंट स्प्रिंट 2014 के मुताबिक दुनिया भर में 7 करोड़ 50 लाख जो नए स्नातक उस साल, उच्च शैक्षिक संस्थानों से डिग्री लेकर बौहर निकले थे, उनमें से 27 पसेंट ही किसी किस्म की नौकरी के लायक थे। यह भारत का नहीं दुनियाभर का आंकड़ा है। इससे यह भी पता चलता है कि सिर्फ हमारे यहां ही नहीं पूरी दुनिया में डिग्री और कुशलता के बीच एक बड़ा फर्क मौजूद रहता है। सवाल है इस फर्क को मिटाएं कैसे? या कहिए अपने आपको कुशलता में दक्ष कैसे करें?

विशेषज्ञ कहते हैं इसके लिए सीधा सा तरीका है जो पढ़ रहे हों, उसे समझने की कोशिश करें। उसमें दिलचस्पी लें। अगर यह नहीं करते तो चाहे जितनी मेहनत करेंगे, कोई फायदा नहीं होगा। कुशलता तभी विकसित होगी जब आप कुशलता के लिए कुछ करेंगे।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।