असफलता के बाद बना सकते हैं राहें आसान      Publish Date : 22/03/2026

असफलता के बाद बना सकते हैं राहें आसान

                                                                                                          प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

कोचिंग का हब माना जाने वाला कोटा लगातार सुर्खियों में है। हालांकि इंजीनियरिंग मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हजारों बच्चों की कामयाबी को लेकर ये सुर्खियां होतीं, तो इसमें हैरत की बात नहीं होती। दरअसल, इन दिनों नकारात्मक वजहों से बनने वाली ये सुर्खियां विद्यार्थियों से लेकर अभिभावकों और शिक्षकों हर किसी को गंभीर चिंतन के लिए विवश कर रही हैं। विद्यार्थी जिस तरह पढ़ाई और परिणाम में बेहतर प्रदर्शन न कर पाने के कारण आत्महत्या कर रहे हैं, वह हर किसी को मर्माहत करने वाला है।

                            

इस तरह की घटनाओं के पीछे कई सवाल है, जिनका समाधान खोजना बेहद जरूरी लगता है। आखिर क्या कारण है कि इंजीनियर या डॉक्टर बनने की तैयारी में लगे ये विद्यार्थी अचानक आत्मघाती कदम उठा बैठते हैं? क्यों वे असमय ही अपनेसुनहरे सपनों का गला घोंट देते हैं?

सपने पूरे करने का दबाव

ऐसी घटनाओं के पीछे जो सबसे बड़ा कारण नजर आता है, वह है माता-पिता की अपनी संतान से अव्यवहारिक अपेक्षाएं। दरअसलए बच्चे के बड़े होने के साथ-साथ पैरेंट्स के सपने भी पलने और बड़े होने लगते हैं। कई बार माता-पिता के अपने सपने अधूरे होते हैं, जिन्हें वे अपनी संतान के जरिए पूरा करने की कोशिश करते हैं। इसके अलावा, वे अपने मित्रों, रिश्तेदारों, पास-पड़ोस, शहर या गांव के सफ ल लोगों से भी प्रभावित होकर अपनी संतान को उनके जैसा बनाना चाहते हैं।

विद्यार्थियों का इंजीनियरिंग या मेडिकल की पढ़ाई की ओर भागना भी इसी बात का सूचक है। ज्यादातर माता-पिता को यही लगता है कि इंजीनियर या डॉक्टर बनकर ही उनका बच्चा सफल करियर की ओर कदम बढ़ा सकता है। इस सपने को पूरा करने के लिए वे अपने बच्चे की रुचि पसंद को अनदेखा कर देते हैं और उस पर दबाव डालते हैं कि वह उनकी पसंद के अनुसार ही करियर की राह पर चले। इससे विद्यार्थियोंपर दबाव बढ़ जाता है।

उत्साह में कमी तो नहीं?

                          

हो सकता है कि आप इंजीनियरिंग या मेडिकल के लिए बिल्कुल फिट हों और उसमें आपका मन भी लग रहा हो लेकिन अगर ऐसा नहीं है, तो आप अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। अगर आपनेअपनी इच्छानुसार भी कोई फील्ड चुन ली है और उसमें ऐंडमिशन ले लिया है मगर आप खुद को अनमना महसूस कर रहे हैंए किसी काम को ठीक से नहीं कर पा रहे हैं या अपने में उत्साह की कमी पा रहे हैं, तो इसका मतलब यह है कि आप जिस राह पर चल रहे हैं, उसमें आपको कोई परेशानी है। ऐसे में आपको बेहिचक अपने माता-पिता से बात कर लेनी चाहिए।

खुली हैं तरक्की की राहें

आज के समय में सिर्फ इंजीनियर या डॉक्टर बनना ही कामयाबी नहीं है। अब दर्जनों ऐसे क्षेत्र सामने आ गए हैं, जिनमें पहचान, पैसा और प्रसिद्धि पाई जा सकती है। यह बात विद्यार्थियों को समझनी भी होगी और अपने अभिभावकों को समझानी भी होगी। विद्यार्थी अगर अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़े, तो ही उसका भविष्य सुखद बन सकताहै और इसी में अभिभावकों की खुशी भी छुपी है।

पेरेंट्स को करें राजी

आपमें से बहुत-से विद्यार्थियों ने इस साल 12वीं की परीक्षा दी होगी। अगर आप अपनी पसंद को समझते हैं, तो अपनी पसंद से अपने माता- पिता को अवगत कराएं। उन्हें कनविंस करें। हो सकता है कि पैरेंट्स आपको कम समझदार या परिपक्व समझकर आपकी बातों को तवज्जो न दें, लेकिन अगर आपको अच्छी तरह पता है कि आप किस फील्ड में जोरदार प्रदर्शन कर सकेंगे, तो इस बारे में डांट या नाराजगी की परवाह किए बिना पैरेंट्स के सामने अपनी बात रखने का प्रयास करें। उन्हें यह भरोसा दिलाएं कि अगर वे आपको आपकी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद करते हैं, तो आप उन्हें कतई निराश नहीं करें। बस, वे आपको एक मौका तो दें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।