
आप कहीं जल्दी हार तो नहीं मान रहे? Publish Date : 20/03/2026
आप कहीं जल्दी हार तो नहीं मान रहे?
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
कई बार हम कुछ नया सीखना शुरू करते हैं, पर थोड़ी सी कठिनाई देखकर पीछे हट जाते हैं। आमतौर पर हम हार इसलिए नहीं मानते, क्योंकि हममें प्रतिभा की कमी है। असल दिक्कत हार और जीत से जुड़े हमारे नजरिये की है। क्या होता है, जब पुराने तरीके काम नहीं आ रहे होते और नया सीखना मुश्किल लग रहा होता है? हमें लगता है कि हम फेल हो गए हैं। न्यूरोसाइंस के अनुसार, यह समय हार मानने का नहीं होता, क्योंकि इसी समय हमारा दिमाग नए न्यूरल पाथवे बना रहा होता है।
लेखिका ऐनी-लॉर ले कुन्फ के अनुसार, 'संघर्ष असफलता नहीं है, न ही सफलता कोई सीधी रेखा है। सफलता की यात्रा में ऊंचे-नीचे कई पड़ाव होते हैं, जो दिमाग में नई कोशिकाएं बनाते हैं। असली मास्टरी किसी जगह पहुंचने का नाम नहीं है, बल्कि खुद को ऐसा इंसान बनाने की प्रक्रिया है, जो किसी भी मुश्किल हालात में ढलना और आगे बढ़ना जानता हो।'
सफलता की हमारी गलत परिभाषा

महारत एक मंजिल: हम सोचते हैं कि एक दिन हम 'एक्सपर्ट' वन जाएंगे और सीखना बंद हो जाएगा। सच तो यह है कि असली उस्ताद वही है, जो आखिरी दम तक खुद को एक छात्र मानता है।
तरक्की की रेखा सीधीः सफलता और नया सीखने का ग्राफ उतार-चढ़ाव भरा होता है। कभी-कभी आप महीनों तक एक ही जगह अटके रहेंगे और फिर अचानक एक बड़ी छलांग लगाएंगे।
जुनून ही सब कुछ: एक ही दिन में 10 घंटे मेहनत करने से बेहतर है कि आप रोज केवल 30 मिनट अभ्यास करें। निरंतरता, ज्यादा ताकतवर है।
सिर्फ तकनीक ही काफी: केवल 'सही तरीका' जानना पर्याप्त नहीं है। आपकी मानसिकता, आराम करने का तरीका और फीडबैक लेने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी है।
योग्य लोगों के लिए सब आसान: यह सबसे बड़ा झूठ है। माहिर लोग भी चिढ़ते हैं और गलतियां करते हैं, बस उन्होंने उस 'झुंझलाहट' के साथ तालमेल बिठाना सीख लिया है।
इन्हें भी आजमा कर देखें
छोटे-छोटे प्रयोग करें: यह मत सोचिए कि मुझे यह सीखना है। इसके बजाय आप कहिए- आज मैं इस काम को एक अलग तरीके से करके देखता हूं। इससे असफलता का डर खत्म हो जाता है।
फीडबैक लूप बनाएं: अपनी प्रगति को ट्रैक करें। देखें कि कल की तुलना में आज आपने क्या अलग किया। छोटी-छोटी जीत को पहचानें।
जिज्ञासु बनें: जब कोई काम मुश्किल लगे, तो परेशान होने के बजाए खुद से पूछे- यह हिस्सा इतना कठिन क्यों है? क्या इसे छोटे टुकड़ों में तोड़ा जा सकता है?

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
