कॉलेज न मिले तो पत्राचार से भविष्य संवारे      Publish Date : 19/03/2026

कॉलेज न मिले तो पत्राचार से भविष्य संवारे

                                                                                                          प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

“जो छात्र विभिन्न कारणों के चलते अपनी रेग्यूलर पढ़ाई जारी नहीं रख पाते, हायर एजुकेशन के लिए दूरस्थ शिक्षा माध्यम उनके लिए बढ़िया प्लेटफॉर्म है। दूरस्थ शिक्षा की डिग्री रेग्यूलर कोर्स की तरह ही समान रूप से मान्य है”।

दूरस्थ शिक्षा यानी डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए कॉलेज से दूर घर बैठे बैठे शिक्षा लेना। इस शिक्षा प्रणाली के जरिए छात्र पत्राचार के माध्यम से अपनी डिग्री स्तर की पढ़ाई पूरी कर सकते हैं और इसके बूते वे लगभग सभी तरह की नौकरियों के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस शिक्षा माध्यम में छात्र और शिक्षक आमने-सामने नहीं होते हैं। आज दूरस्थ शिक्षा माध्यम के जरिए घर बैठ पढ़ाई करना कोई खास चुनौती भरा काम नहीं है। ऑडियो-वीडियो सीडी, फिल्म स्लाइड, कंप्यूटर, रेडियो और टेलीविजन के साथ-साथ इंटरनेट भी उपयोगी साबित हो रहा है। इन माध्यमों से छात्र और शिक्षकों के बीच प्रभावी संवाद कायम होता है। इसके साथ-साथ ये शिक्षण संस्थान छात्रों को नजदीकी क्षेत्र में प्रेक्टिकल और सेमिनार की सुविधाएं भी उपलब्ध कराते हैं। जो छात्र 12वीं में कम अंक लाने के कारण या आर्थिक तंगी के चलते रेग्यूलर कॉलेज में ऐंडमिशन नहीं ले पाते, उनके लिए यह बेहतर विकल्प है।

दूरस्थ शिक्षण संस्थान

दूरस्थ शिक्षण संस्थान तीन तरह के हैं- पहला विश्वविद्यालय स्तर के संस्थानों में मौजूद डिपार्टमेंट ऑफ कॉरसपोंडेंस कोर्सेज। दूसरा, ओपन यूनिवर्सिटीज, जो सिर्फ डिस्टेंस मोड के जरिए हायर एजुकेशन मुहैया कराती हैं और तीसरा, वे प्राइवेट संस्थान, जो ज्यादातर प्रोफेशनल कोर्सेज में डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम्स कराते हैं। ओपन यूनिवर्सिटीज देश भर के छात्र/छात्राओं के लिए डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम उपलब्ध कराती हैं। ये विश्वविद्यालय प्रायः हर राज्य में हैं और दूरस्थ शिक्षा प्रोग्राम में इनका स्पेशलाइजेशन है। ओपन सिस्टम में कोर्सेज हर उस व्यक्ति के लिए खुले होते हैं, जिनके पास कोई फॉर्मल एजुकेशन नहीं होती, लेकिन कुछ संस्थानों में छात्रों के लिए अंडर ग्रेजुएट, डिप्लोमा और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सेज के लिए आयु सीमा जरूरी होती है।

                           

कुछ कोर्सेज में एनरोलमेंट के लिए रिटर्न एग्जाम क्वालिफाई करना जरूरी है। संस्थान में नामांकन के बाद ये इंस्टीट्यूटस कोर्स गाइडलाइन ऑफर करते हैं और एक स्टडी मैथड रिकमंड करते हैं। कुछ प्रोफेशनलकोर्सेज के लिए लाइब्रेरी सुविधाएं और ऑनलाइन इंफोर्मेशन भी उपलब्ध हैं। विषय का अध्ययन आप अपनी सुविधा के अनुसार कर सकते हैं, लेकिन डिग्री हासिल करने से पहले आपको विश्वविद्यालय द्वारा तय एग्जाम में शामिल होना होता है। आमतौर पर एग्जाम सेंटर्स देश भर में अलग-अलग जगह पर बने होते हैं, लेकिन कुछ संस्थानों में छात्रों को साल में कम-से-कम एक बार कैंपस आना जरूरी होता है।

फर्जी संस्थानों से बचें

पत्राचार कोर्स में ऐंडमिशन से पहले यह जांच ले कि जहां से आप ग्रेजुशन या पोस्ट ग्रेजुएशन करने की सोच रहे हैं, वह मान्यता प्राप्त हैं या नहीं। पत्राचार स्टडीज के प्रोग्राम 'डिस्टेंस एजुकेशन काउंसिल' (DEC-www.ugc.ac.in.ded), नेशनल एसेसमेंट ऐंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC-www.naac.gov.in), और अगर टेक्निकल कोर्स है, तो ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (AICTE-www.aicte-india.org) द्वारा मान्यता प्राप्त होना चाहिए। कुछ ओपन लर्निंग विश्वविद्यालय ऐसे भी हैं, जिन्हें अपने से बाहर सेंटर्स स्थापित करने की वैधानिक अनुमति नहीं होती। फिर भी वह अपने केंद्र दूसरे राज्यों में चला रहे हैं, इनसे बचें। चयन का एक ही तरीका है कि छात्र जिस राज्य से संबंधित है, उसी राज्य के डायरेक्टोरेट ऑफ डिस्टेंस लर्निंग से संबंधित ओपन लर्निंग विश्वविद्यालय से कोर्स करें।

                                   

पत्राचार कोर्सेज को लेकर छात्रों में कुछ भ्रम की स्थितियां रहती हैं जैसे क्या पत्राचार से की जाने वाली पढ़ाई की मान्यता किसी रेग्यूलर कॉलेज के समान है? जान लें, किसी भी कॉरेस्पॉन्डेंस कोर्स की मान्यता, रेगयुलर कोर्स के बराबर है। आप इस डिग्री के बूते बैंकिंग, एसएससी, रेलवे, सुरक्षा बलों आदि सभी कंपेटेटिव नौकरियों के लिए आवेदन कर सकते हैं। पत्राचार कोर्सेज में नामांकन लेने के लिए फॉर्म जून से अगस्त तक मिलते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।