बेहतरीन मौकों का उठाएं फायदा      Publish Date : 18/03/2026

         बेहतरीन मौकों का उठाएं फायदा

                                                                                                         प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

”टीचिंग जैसे सम्मानजनक करियर में आगे बढ़ने पर ज्ञान बांटने के साथ आपको पद-प्रतिष्ठा दोनों के ही लाभ मिलते हैं। स्तरीय शिक्षा की बढ़ती मांग के मद्देनजर टीचर्स के लिए तो मौके बढ़े ही हैं, साथ ही ऐसे लोगों के लिए भी अवसर बढ़े हैं, जो शिक्षण क्षेत्र में टीचिंग से कुछ अलग करना चाहते हैं”।

अगर बारहवीं के बाद डीऐंड (डिप्लोमा इन एजुकेशन) करके आप प्राइमरी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं तो टीचिंग के क्षेत्र में खुद को अपग्रेड करके के आप न सिर्फ अपनी स्किल्स बढ़ा सकते है, चल्कि बेहतर सैलरी भी पा सकते हैं। प्राइमरी स्कूल टीचर के लिए वेतनमान 15000-18000 रुपये के लगभग होता है, लेकिन प्रशिक्षण और अपनी लगन से आप अपने लिए बेहतरीन मौके तलाश सफते हैं। तकनीक और इंटरनेट के बढ़ते उपयोग की देखते हुए अच्छे शिक्षकों की मांग और भी ज्यादा बढ़ गई है। टीचिंग में बेहतर प्रशिक्षण से आप बेहतर अवसरों का लाभ उता सकते हैं और अपनी सैलरी प्रत्ति महीने एक लाख के ऊपर भी पहुंचा सकते हैं। आइए जानें टीचिंग के क्षेत्र के इन विकल्पों के बारे में-

बीऐड से बढ़ाएं दायरा

बीऐड (बैचलर इन जुमान करने पर आप अच्छे सरकारी या प्राइवेट स्कूलों में नौकरी पा सकते हैं और सेकेंडरी तथा सीनियर सेकेंडरी के बच्चों को पढ़ा सकते हैं। बीऐड में एजुकेशन थ्योरी, सीखने का मनोविज्ञान, स्कूल मैनेजमेंट प्रैक्टिस, इन्फर्मिशन कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी, शिक्षण व्यवस्था के मूल्यांकन, लाइव प्रजेंटेशन जैसे विषयों के बारे में विस्तार से बताया जाता है। सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी टीचर बनने के लिए जरूरी है कि बीऐंड के साथ संबंधित विषय में आपने मास्टर्स, कर रखा हो। कुछ विश्वविद्यालय पढ़ा रहे टीचर्स के लिए पत्राचार के जरिए भी टीचर्स ट्रेनिंग का विकल्प उपलब्ध कराते हैं। सेकेंडरी एजुकेशन में सैलरी 1,000-25,000 रुपये के सीनियर आसपास मिलती है, वहीं सीनियर सेकेंडरी टीचर को 30,000 40,000 रुपये तक मिल जाते है। पे-कमीशन के अनुसार सैलरी 59,000-64,000 रुपये तक भी पहुंच जाती है, लेकिन यह टीचर के उजुर्वे, उसके स्थाई या अस्थाई होने पर भी निर्भर करता है।

उच्च शिक्षा में अवसर

लेक्चरर बनने के लिए कोमर्स, सावंत, कॉमर्स, सोशल साइंस, लॉ, फॉरेन लैंग्वेज और फिनिकल एजुकेशन जैसे विषयों विषयों में 55 फीसदी अंकों के साथ मास्टर्स की डिग्री होनी साहिए, साथ ही यूजीसी, सीएसआईआर की नेट परीक्षा पास करना भी अनिवार्य है। आठ साल का तजुर क्रसिल कर चुके लेक्चरर को सीनियर स्केल की पतों के लिए मौका लेक्चरर मिलता है। ऐसे लेक्चरर, जिनकी रिसर्च लगातार प्रकाशित होती है और जो कम से कम 10 साल पीजी टीचिंग कर लेते हैं, उन्हें प्रोफेसर चुनने का मौका हासिल होता है। एक लेक्चरर की शुरुआती सैलरी 40,000-45,000 से शुरू होती है और प्रोफेसर बनने पर यह 1 लाख लाख 10 हजार के लगभग पहुंचती है।

बीएलऐड और एमए इन एलिमेंटरी एजुकेशन

अगर आप विशेष रूप से ऐंडमिनिस्ट्रेशन में जाना चाहते हैं तो इग्नू इसके लिए डिप्लोय इन एजुकेशन कराता है। डीयू इसके लिए बीएलऐड (बैचलर इन एलिमेंट्री एजुकेशन) कराता है। एमऐड करने के बाद आप विशेष रूप से ऐंडमिनिस्ट्रेशन में जा सकते हैं।

शिक्षण सामग्री तैयार करने का काम

एजुकॉम्प, टाटा मैत्रोहिल, पियर्स एजुकेशन जैसे संस्थान स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली किताबें प्रकाशित करते हैं। इस सामग्री को विकसित करने के लिए विभिन्न विषयों के टीचर भर्ती किए जाते हैं।

शिक्षा विभाग/बोर्ड से जुड़ें

टीचिंग/एजुकेशन डिग्री के साथ शैक्षणिक कविभागों और बोर्ड्स जैसे कि सीबीएसई, राज्य शिधा बोड, आईसीएसई आदि के साथ काम कर शिक्षण लवस्था में सुधार करने में योगदान दे सकते हैं।

विकल्पों की कमी नहीं

• भूक-बधिर और मानसिक रूप से से कमजोर बच्चों के लिए संवेदनशील है तो डिप्लोमा इन स्पेशल एजुकेशान कर एनजीओ या इस तरह के स्कूलों में पढ़ा सकते हैं।

• आर्ट, काफ्ट, म्यूजिक जैसे विषयों के लिए भी स्पेशलाइज् ट्रेनिंग ली जा सकती है

• विदेशी भाषाओं में रुचि है तो इनमें मास्टर्स कर लेने पर लैंग्वेज टीचर के तौर पर नौकरी कर सकते हैं। वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स में लैंग्वेज टीचर्स की जरूरत होती है।

• अगर अंग्रेजी में आपको विशेष रुचि है जो लैंग्वेज प्रोग्राम अंग्रेजी पढ़ा सकते हैं। विशेष रूप से सूडान और मिस्र जैसे देशों में इसके लिए अच्छे मौके हैं, जहां अंग्रेजी प्राथमिक भाषा नहीं है।

• खेलों में विशेष रुचि है तो बैचलर्स ऑफ फिजिकल एजुकेशन, बीपीई) के बाद आप स्कूलों में फिजिकल एजुकेशन टीचर बन सकते है। इस कोर्स के बाद बीऐड करने की जरूरी नहीं होती।

• प्रेसोडियम और G. D. गोयनका जैसे प्राईवेट स्कूल अपने सकूलों में पढ़ाने के लिए मान्टेसरी का अलग प्रशिक्षण देते हैं। इस विशेष कोर्सेस को करने पर पे–पैकेज काफी बढ़ जाता है।

• कई स्कूलों में प्रोफेशनल करिकुलम प्लानर भी भर्ती किए जाते हैं, और अलग–अलग क्लास भी शैक्षणिक स्तर के हिसाब से पाठ्यक्रम तैयार करते हैं

आजमाएं कुछ हटकर

क्रिएटिव हैं तो टॉय डिजाइनिंग कर सकते है, यानी ऐसे खिलौनों की डिजाइनिंग कर सकते हैं जिनके जरिए बच्चे सीखते हैं। यह काम प्रोजेक्ट के आधार पर मिलता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।