इंटीरियर डिजाइनर: लगातार बढ़ती मांग      Publish Date : 13/03/2026

   इंटीरियर डिजाइनर: लगातार बढ़ती मांग

                                                                                                  प्रोफसर आर. एस. सेंगर

मकान अब महज सिर छिपाने की जगह नहीं हैं बल्कि अब वे लाइफस्टाइल का जरिए स्थिती को दशनि का जरिया भी बन चुके हैं। कहने का मतलब है कि अब मकान ईट गारे की सिर्फ दीवार नहीं हैं बल्कि उनमें एक वैज्ञानिक कलात्मकता और सौंदर्यबोध का भी मिश्रण हो रहा है। इस सब के रराथ ही एक दूसरी सच्चाई यह है कि शहरों और महानगरों में हर दिन जनसंख्या दबाव बढ़ रहा है। जमीन घट रही है और मकानों की जरूरतें बढ़ रहीं है। नतीजा यह हुआ है कि मकान छोटे हो गए हैं। वे घर से फ्लेट बन गए हैं। इन तमाम संदों में एक प्रोफेशनल की हर जगह जरूरत बाड़ी है, बार है इंटीरियर डिजाइनर इंटीरियर डिजाइनर की मांग फिकले कुछ सालों में बहुत तेजी से बढ़ी है।

बढ़ रही है इंटीरियर डिजाइनरों की मांग

                              

पहले जब ज्यादातर मकान व्यक्तिगत रूप से खुद बनवाए जाते थे तब हर व्यक्ति अपने मकान का इंटीरियर डिजाइनर होता था। पर आज ऐसा नहीं है। आज भवन निर्माण कॉर्पोरेट गतिविधि है। बड़ी-बड़ी कंपनियां और डेवलपर्स व्यवस्थित ढंग से शानदार कॉलोनियां बना रहे हैं। जाहिर है जब बड़े पैमाने पर और व्यवस्थित रूप से काम होगा तो नतीजे को हासिल करने के लिए सभी तरह के सम्बंधित प्रोफेशनलों को भी जरूरत पड़ेगी। यही कारण है कि पिछले कुछ सालों में इंटीरियर डिजाइनरों की यकायक मांग बहुत ज्यादा बढ़ गई है। 1,45,000 करोड़ रुपए के वार्षिक टर्नओवर को पार कर चुके भवन निर्माण उद्योग में 20 से 25 फीसदी की दर से इंटीरियर डिजाइनरों की मांग बढ़ी है।

इंटीरियर डिजाइनर का काम परिश्रम और कल्पनाशीलता की मांग करता है। एक इंटीरियर डिजाइनर अपने क्लायंट के घर, ऑफिस या किसी भी परिवेश को डिजाइन करता है। डिजाइन करते समय उसका महज तकनीकी कौशल की दक्षता भर से ही काम नहीं चलता बल्कि उसके लिए यह समझ भी जजरूरी है कि उसके क्लायंट का परिवेश क्या है। वह जहां रहता है या जिस जगह को डिजाइन करा रहा है, वह कहां स्थित है उसके आसपास का वातावरण कैसा है, वहां की संस्कृति क्या है और मौसम वजलवायु का ध्यान तो रखना ही पड़ता है। इंटीरियर डिजाइनर पूरा घर या फ्लैट के अलग-अलग इस्तेमाल में आने वाले कमरे, दुकान, ऑफिस, शोरूम, रिटेल शोरूम, होटल, ऑडिटोरियम, स्कूल, एयरपोर्ट, मिनी कॉन्फ्रेंस हॉल, थिएटर, टीवी व फिल्म स्टूडियो तथा कमर्शियल सेटअप आदि तमाम जगहों की इंटीरियर डिजाइनिंग करता है।

                                 

इन सभी क्षेत्रों को डिजाइन करते समय उसे बिल्कुल मौलिक ढंग से सोचना पड़ता है। इस लिहाज से इंटीरियर डिजाइनर के काम में जितनी तकनीकी योग्यता की जरूरतहोती है उससे कही ज्यादा कल्पनाशीलता और तेजी से नए और ताजगी भरे विचार भी उसके लिए जरूरी होते हैं। यही वजह है कि जब कोई इंटीरियर डिजाइनर 500 गज में बने रहे मकान को डिजाइनिंग करता है तो जल्ने सोच का दायरा अलग होता है और जब 60 गज के फ्लैट की डिजाइनिंग करता है तो उसके सामने कुछ और ही चुनौतियां होती हैं।

इंटीरियर डिजाइनिंग के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए जहां तक शैक्षिक योग्यता की दरकार है, तो 10+2 की डिग्री से इस क्षेत्र में प्रवेश की योग्यता हासिल हो जाती है। 12वीं के बाद तीन वर्ष का इंटीरियर डिजायनिंग का डिप्लोमा कोर्स किया जा सकता है। कुछ संस्थान पांच वर्ष का इंटिग्रेटेड इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स कराते हैं। विभिन्न संकद्ध विषयों के अलावा वास्तु और फेरशुई की जानकारी भी यदि किसी इंटीरियर डिजाइनर को होती है तो उसके लिए काम का स्कोप और ज्यादा जब जाता है। जैसे साइंस विषय में, 12वीं उत्तीर्ण छात्रों के पास 60 फीसदी अंक होने चाहिए जो इस क्षेत्र में दाखिल होने की इच्छा रखते हों।

समझें इंटीरियर डिजाइनर और इंटीरियर डेकोरेटर में फर्क

कुछ लोग इंटीरियर डिजाइनर और इंटीरियर डेकोरेटर से कंफ्यूज हो जाते हैं। कई लोगों को लगता है कि यह दोनों एक हो पेशे हैं। मगर ऐसा नहीं है। इंटीरियर डिजाइनर औरइंटीरियर डेकोरेटर सुनने में भले एक ही जैसे लगें लेकिन दोनों में अच्छा खासा फर्क है। दोनों के काम भी अलग-अलग हैं। इंटीरियर डिजाइनर दरअसल आर्किटेक्ट के साथ मिलकर घर के मौजूदा स्पेस को ऐसी शेष देने में मदद करता है जिससे कि जगह का अधिक से अधिक उपयोग हो संके, उसकी सुंदरता निखरे और घर वैज्ञानिक कसौटियों पर खरा उतरे। एक तरह से इंटीरियर डिजाइनर वास्तव में स्पेस प्रबंधन का काम देखता है। हर आर्किटेक्ट अपने आप में एक शानदार इंटीरियर डिजाइनर भी होता है। जबकि इंटीरियर डेकोरेटर अलग-अलग जगहों की सिर्फ सजावट की जिम्मेदारी संभालता है। घर में कहां और किस कॉम्बीनेशन के साथ पेंटिंग्स लगानी चाहिए, टाइल्स का रंग क्या हो, लाइटिंग किस तरह की हों, पिलर्स की कैसे सजावट करें तथा सीलिंग डेकोरेशन जैसे काम इंटीरियर डेकोरेटर के होते हैं।

जहां तक इंटीरियर डिजाइनर के लिए नौकरी के अवसरों का सवाल है तो इस समय देश में 6,000 से ज्यादा विभिन्न किस्म की निर्माण कंपनियां कार्यरत हैं और जानकारों का मानना है कि अगले एक दशक में इस क्षेत्र में उकरीचन इतनी ही कंपनियां और शामिल हो जाएंगी। कहने का मतलब यह है कि आज की तारीख में इंटीरियर डिजाइनर के लिए नौकरियों की समस्या नहीं है। प्राइवेट लिमिटेड डेवलपर्स के यहां तो मौकरियां है ही, सरकारी और अर्थ-सरकारी क्षेत्रों में भी एक इंटीरियर डिजाइनर के लिए बड़े पैमाने पर नौकरियां उपलब्ध हैं। देश में 450 से ज्यादा छोटे और मंझोले शहर हैं जहां सरकारी और स्वायत्त निकाय के स्तर पर निर्माण कर कार्य तेजी से हो रहा है। इन सब शहरों में भी इंटीरियर डिजाइनरों की तेजी से मांग बढ़ी है। दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में तो इनकी भारी मांग है। जहां तक चेतन का सवाल है तो किसी भी अच्छे इंटीरियर डिजाइनर को प्रारंभ से ही 30 से 35 हजार रुपए मिल जाते हैं। बाद में यह वेतन आपकी योग्यता और आपकी प्रोग्रेस पर निर्भर करता है। इसं समय देश में कोई 13 से 15 हजार के बीच इंटीरियर डिजाइनर हैं और सन 2020 तक 2 लाख से ज्यादा डिजाइनरों की दरकार होगी। ।

यह जरूरत दर्शाती है कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आने वाले सालों में रोजगार उपलब्ध होगा। जहां तक इस क्षेत्र में जाने के लिए डिप्लोमा कोर्स कराने वाले संस्थानों का सवाल है, तो वे कुछ इस तरह से है-

  • इंडियन इंस्टीट्‌यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पवई, मुंबई।

  • इंस्टीट्यूट ऑफ इनवायरमेंटल डिजाइन, विद्यानगर, गुजरात।

  • एपीजे इंस्टीट्‌यूट ऑफ डिजाइन, 54, इंस्टीट्‌यूशनल एरिया तुगलकाबाद (बत्रा अस्पताल के नजदीक महरौली- बदरपुर रोड, नई दिल्ली।

  • साउथ दिल्ली पॉलिटेदिनक फॉर वुमन, लाजपत नगर, नई दिल्ली।

  • एनआईकडी कैंपस, 2बी,मध्य मार्ग, चंडीगढ।

  • क्रिएटिव आर्ट, गंगाधाम कॉलेज, लोला नगर, पुणे।

  • आर्किटेक्कर ऐंड एज्युकेशन, ई-314 ए सेक्टर 27, नोएडा।

  • सीईभीटी, कस्तूरभाई लालभाई कैम्पस, यूनिवर्सिटी रोड, अहमदाबाद।

  • आर्क इंस्टीट्‌यूट ऑपा फैशन ऐंड डिजाइनिग, लकोथी मार्ग, बापू नगर, जयपुर, राजस्थान।

  • सेंट फ्रांसिस इंस्टीट्‌यूट ऑफ आर्ट ऐंड डिजाइनिग बोरीवली (पश्चिम), एसवीपी रोड, मुंबई।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।