अब आर्कियोलॉजी में सफल बनेगा कॅरियर      Publish Date : 12/03/2026

 अब आर्कियोलॉजी में सफल बनेगा कॅरियर

                                                                                                     प्रोफेसेर आर. एस. सेंगर

यदि इतिहास में आपकी रुचि है और आपको इतिहास से जुड़ी बातों के बारे में जानना अच्छा लगता है तो आप अपनी इस हॉबी को अपना कॅरियर बना सकते है। आर्कियोलॉजिस्ट बनकर न सिर्फ आप बल्कि दूसरों को भी इतिहास की पुरानी बातों से रूबरू करवा सकते हैं।

इतिहास की डिग्री अपार संभावनाओं के द्वार खोलती है और इतिहास के ग्रेजुएट न केवल कई तरह के कॅरियर में जाते हैं, बल्कि शीर्ष पर भी पहुंचते हैं। एक ऐसा ही विषय है आर्कियोलॉजी। पुरानी चीजों को जांचने-परखने की शौक और उसे समझने की योग्यता रखने वालों के लिए आर्कियोलॉजी एक बेहतरीन कॅरियर ऑप्शन हो सकता है। इससे उनके कॅरियर को एक नई दिशा मिलती है और अपने शौक के कारण वह कॅरियर में आसानी से सफलता भी पाते हैं। आर्कियोलॉजी दो शब्दों आर्कियो यानि पुरानी चीजें और लॉगोज यानि विज्ञान से बना है। भारत जैसे सांस्कृतिक विरासत वाले देश में तो ये और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। यहां पर आर्कियोलॉजिस्ट की बहुत मांग है और यही मांग लोगों को इस ओर आर्कषित कर ही है।

अनिवार्य योग्यता

                            

आर्कियोलॉजी भारतीय सभ्यता को संजोने का काम करते हैं। वह लोगों को पुरानी चीजों सेजोड़ने का काम करते हैं। साथ ही एक बेहतरीन आर्कियोलॉजिस्ट अथवा म्यूजियम प्रोफेशनल बनने के लिए प्लोस्टोसीन पीरियड अथवा क्लासिकल लैंग्वेज, मसलन पाली संस्कृत, प्राकृत्त अरेबियन, पररियन भाषाओं में से किसी की जानकारी आपको कामयाबी की राह पर आगे ले जा सकती है।

आर्कियोलॉजी में आते हैं बहु विषय

आर्कियोलॉजी बहु विषयों वाला विषय है जिसमें मानव शाख, भूगोल और रसायन विज्ञान शामिल है। इसमें मानव संस्कृति और इतिहास का वैज्ञानिक और चरणबद्ध रूप से अध्ययनशामिल है। आर्कियोलॉजी की पढ़ाई के तीन प्रमुख अंग है।

  • न्यूमिस्मेटिक्स या मुद्रा शाख-इसमें सिक्कों की पढ़ाई होती है। सिक्को से लुप्त हो चुके इतिहास के बारे में जानने में बड़ी मदद मिलती है।
  • एपीग्राफी या पुरालेख विद्या- इसमें गूढ़लेखों, आज्ञापत्रों, पांडुलिपियों का अध्ययन होता है।

पर्सनल स्किलः आर्कियोलॉजी जहां एक दिलचस्प विषय है वहीं वह बेहद गंभीर भी है। इसमें कार्य करने वाले प्रोफशनल्स के लिए चुनौतियों में भरा क्षेत्र भी है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए अच्छी विश्लेषणात्मक क्षमता, तार्किक सोच, कार्य के प्रति समर्पण जैसे महत्वपूर्ण गुण जरूर होने चाहिए। कला की समझ और उसकी पहचान भी आपको औरों से बेहतर बनाने में मदद करेगा। साथ ही यदि आपके अंदर चीजों का ऑब्जरेवशन करने की क्षमता नहीं होगी तो आप आर्कियोलॉजी में अच्छे से काम नहीं कर पाएंगे।

कोर्स

                              

आर्कियोलॉजी से जुड़े रेगुलर कोर्स जैसे पोस्ट ग्रेजुएशन, एमफिल या पीएचडी देश के अलग- अलग संस्थानों में संचालित किए जा रहे हैं। हालांकि हेरिटेज मैनेजमेंट और आर्किटेक्चरल कंजरवेशन से जुड़े कोर्स केवल गिने-चुने संस्थानों में ही पढ़ाए जा रहे है। 12 वीं के बाद 55 फीसदी अंकों के साथ आप इसमें ग्रेजुएशन कर सकते हैं। आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया की फंक्शनल बॉडी इंस्टीट्यूट ऑफ आर्कियोलॉजी में दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स की पढ़ाई होती है।

सैलरी

आर्कियोलॉजिस्ट की जरूरत देखकर सरकारी और प्राइवेट दोनों जगह होती है। यहां तक कि अब तो कारपोरेट हाउसेज में भी आर्कियोलॉजिस्ट की नियुक्ति हो रही है। दरअसल कारपोरेट हाउसेज अपने रिकॉडर्स के रखरखाव के लिए एक्सपर्ट की नियुक्ति करते हैं। इसी तरह रिचर्स के लिए भी इसकी मांग रहती है। आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया में आर्कियोलॉजिस्ट पदों के लिए संघ लोक सेवा आयोग हर वर्ष परीक्षा आयोजित करता है।

आर्कियोलॉजी के टॉप कॉलेज

• नेशनल आर्कीजेस ऑफ इंडिया, नई दिल्ली।

• आकीओओलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया, नई दिल्ली।

• इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टॉरिकल रिर्सच, नई दिल्ली।

• बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, उत्तर प्रदेश।

• पटना यूनिवर्सिटी, बिहार।

• इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, उत्तर प्रदेश।

• जीबा जी यूनिवर्सिटी ग्वालियर, मध्य प्रदेश।

• दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटिज रिर्सच ऐंड मैनेजमेंट।

• गुरुकुल कंगडी हरिद्धार, उत्तराखंड।

• अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश।

• केरला यूनिवर्सिटी, तिरुवनंतपुरम।

• पंजाब यूनिवर्सिटी, सेक्टर 14, चंडीगढ़।

• दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी, गोरखपुर उत्तर प्रदेश।

• उस्मानिया यूनिवर्सिटी कैंपस, हैदराबाद।

• गुरू गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली।

• रांची यूनिवर्सिटी, रांची।

• इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गोवहाटी।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।