
टेक्निकल राइटिंग में है बेहतर स्कोप Publish Date : 11/03/2026
टेक्निकल राइटिंग में है बेहतर स्कोप
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
टेक्नोलॉजी के इस दौर में जहां हर चीज ऑनलाइन मिल जाती हैं और इसी के चलते टेक्नोलॉजी से जुड़े ऐसा ही एक क्षेत्र में अपार नौकरियां मिल रही हैं। कुछ ऐस क्षेत्र है टेक्निकाल राइटिंग का जिसे टेक्निकल कम्युनिकेशन भी कहा जाता है। इस प्रक्रिया के जरिए लोगों को समझाते हुए तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश ला जाता है।
इसके अंतर्गत किया जाने जाने वाला लेखन मुख्यतः हाउ टूयूज, मैनुअल, प्रोजेक्ट रिपोर्ट इंस्ट्रक्शन गइड, ग्राफिकल प्रजेंटेशन तैबार करने, ब्रोशर्स, कंज्यूमर प्रोडक्ट, मेडिकल जर्नल्स आदि क्षेत्रों से संबंधित होता है।
क्या है टेक्निकल राइटिंग

ग्लोबलाइजेशन के दौर में जहां एक से बढ़कर एक चीजो का खुलासा हो रहा है वहीं पर कुछ ऐसी चीजें भी हैं जिनके बारे में कम लोगों को जानकारी होती है। ऐसे में कंपनियां उन लोगों को हायर कर रही हैं जो लोगों की उनकी चीजों के बारे में ज्यादा से ज्यादा बताएं, क्योंकि जब तक उनके बारे में लोग जानेंगे नहीं, तब तक उनका बाजार नहीं बन पाएगा।
इसीलिए खासतौर पर ऐसे प्रोफेशनल राइटर को हायर किया जाता है जो अपनी टेक्निकल समझ के जरिए लोगों तक उस चीज की जानकारी विभिन्न माध्यमों से पहुंचाते हैं। वह जो लिखते हैं उसी को 'टेक्निकल राइटिंग' नाम दिया जाता है।
आसानी से समझाने के लिए
सामान्यतः टेक्निकल राइटिंग टेक्निकल कम्युनिकेशन का ही एक हिस्सा है, जिसके जरिए कंप्यूटर हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर, कैमिस्ट्री, एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज, रोचोटिक्स, फाइनेंस, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं बायोटेक्नोलॉजी से संबंधी क्षेत्र को आसानी से समझा जा सकता है।
जिज्ञासा के साथ जानकारी भी

किसी भी विषय पर लिखने के लिए सबसे पहले उस विषय के बारे में जानकारी और लिखने के प्रति रुचि होनी चाहिए। क्योंकि विषय कोई भी हो, चाहे वह ततानीकी हो या गैर तकनीकी, उसके विषय में तब तक नहीं लिखा जा सकता, जब तक कि बेहतर समझ एवं तकनीक के प्रति जिज्ञासा न हो। साइंस एवं तकनीक की बढ़ती भागीदारी के चलते लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए सर्वप्रथम आपको उस तकनीक से अवगत होना पड़ेगा।
टेक्निकल ऑस्पेक्ट पर पकड़
टेक्निकल राइटिंग की जॉब में टेक्निकल अंऑस्पेक्ट होने के कारण इसमें ज्यादातर शब्द टेक्निकल ही प्रयोग में आते हैं। इसके लिए अंग्रेजी भाषा का समुचित ज्ञान सफलता दिला सकता है। इसमें ध्यान इस बात पर देना चाहिए कि जो भी लिखें यह स्पष्ट एवं रु समझने योग्य हो उससे संबंधित लिंक भी दिया गया हो।
ऑनलाइन सेवा
टीडब्ल्यूआईएन (टेक्निकल राइटर्स ऑफ इंडिया) व एसटीसी (सोसाइटी ऑफ टेक्निकल कम्युनिकेशन) ने दो ऑनलाइन सेवाएं शुरू की है, जिनसे इंडियन टेक्निकल राइटरों को मदद मिल रही है।
योग्यता
टेक्निकल राइटिंग के लिए, यूं तो कोई खास कोर्स नहीं बना है। पोस्ट ग्रेजुएट व जर्नलिज्म में डिप्लोमा डोल्डर व अंग्रेजी साहित्य, मिज्ञान स आईटी में उच्य डिग्री हासिल करने वाले टेक्निकल राइटर बन सकते हैं। साथ ही इसमें काम करने से पहले आपको कंप्यूटर की अच्छी जानकारी होनी चाहिए। तकनीकी क्षेत्र होने के कारण कई कंप्यूटर सॉफ्टवेयर जैसे एमएस वर्ड, पेजमेकर, फ्रेम मेकर व फ्रंट पेन आदि की जानकारी हासिल करनी होती है।
वेतनमान
टेनिनकल राइटर्स के तौर पर शुरुआत से ही ठीक-ठाक सैलरी मिलने लगती है। इनकी औसत सैलरी पैकेज 20 हजार से 25 रुपये प्रतिमाह से शुरू होता है। 2-3 वर्षों के अनुभव के बाद बाद यह पैकेज 140 हजार रुपए प्रतिमाह तक पहुंच जाता है। कुछ कंपनियां टेक्निकल राइटरों को प्रति घंटे के हिसाब से पैसा देती हैं जो कि काफी मोटी रकम होती है
मिलेंगे ये पद
• कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट
• प्रपोजल राइटर
• पब्लिकेशन स्पेशलिस्ट
• डाक्यूमेंटेशन स्पेशलिस्ट
• इन्फॉर्मेशन डेवलपर
• प्रोजेक्ट मैनेजर
• टेक्निकल एडिटर
• वेब एडिटर
• इन्फॉर्मेशन डिजाइनर
• मेडिकल ट्रांसक्रिप्शनिस्ट
• फॉल सेंटर एग्जिक्यूटिव
नौकरी की संभावना
डिजिटल बाजार बढ़ने के कारण अब कई पत्र-पत्रिकाओं एवं जर्नल्स से लेवार कई वेबसाइटें हैं, जो टेक्निकल राइटर्स को जॉब जॉब उ उपलब्ध कराती हैं। यहां तक कि जब भी बाजार में कोई नया प्रोडक्ट या सामान आता है तो तमाम विज्ञापन एजेंसियां भी पंचलाइन के लिए इन्हीं से लिखवाती है। प्रोडक्ट के बारे में प्रेस रीलीज लिखने का काम भी टेक्निल राइटर ही करता है।
प्रमुख कोर्स
• ऐंडवांस कोर्स इन टेक्निकलराइटिंग
• सर्टिफिकेट कोर्स इन टेक्निकलराइटिंग
• डिप्लोमा इन टेक्निकल राइटिंग
• फाउंडेशन कोर्स इन टेक्निकलराइटिंग
• पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इनटेक्निकल कम्युनिकेशन
•फास्ट ट्रैक सर्टिफिकेट कोर्स इन टेक्निकल राइटिंग
फ्रीलांसर भी बन सकते हैं
कॉल सेंटर, आईटी कंपनियां, न्यूज पेपर व मैग्जीन्स प्रोफेशनल्स की राह आसान बनाती हैं। जथिन होने पर घर से किसी संस्थान या वेबसाइट के लिए फ्रीलांसिंग भी की जा सकती है। फ्रीलंसिंग के तौर पर थी इसमें आप काम कर सकते हैं।
संस्थान
देश में ऐसे कम ही विश्वविद्यालय हैं, जो टेक्निकल राइटिंग का कोर्स कराते हैं। जर्नलिज्म ऐंड प्रोस कम्युनिकेशन का कोर्स कराने वाले संस्थान सर्टिफिकेट लेवल पर टेक्निकल राइटिंग का कोर्स कराते हैं।
• यूनिवर्सिटी ऑफ कालीकट, केरल वेबसाइट- www.universityofcalicat.info
• स्टेला मैरिस कॉलेज, चेन्नई वेबसाइट- www.stellamariscalinge.arg
• सिंवायोसिस सेंटर फॉर डिस्टेंस लर्निंग, पुणे वेबसाइट- www.scdl.net
• ब्लैक ऐंड वाइट टेक्निकल वटिंग सॉल्युशन बंग्लुरु, देव साइट www.bwtechwriting.com
• टेक्नोराइटर्स एकेडमी, पुणे वेबसाइट- www.technowriters.com
• टेक टोटल, हैदराबाद, वेबसाइट -www.techtotal.co.in
• यूनिवर्सिटी ऑफ कालीकट केरात वेबसाइट- www.universityofcalicut.info
• स्टेला मैरिस कॉलेज, चेन्न वेबसाइट- www.strilamariseollege.org
• सिंबायोसिस सेंटर फॉर डिस्टेंस लर्निंग, पुणे वेबसाइट- www.scdl.net
• ब्लैक ऐंड वाइट टेक्निकल राइटिंग सॉल्युशन बंग्लुरु, वेबसाइट- www.bwtechwriting.com
• टेक्नोराइटर्स एकेडमी, पुणे वेबसाइट www.technewriters.com
• टेक टोटल, हैदराबाद, www.techtotal.ca/in

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
