काउंसलिंग के जरिए बेहतर भविष्य का रोडमैप तैयार करें      Publish Date : 06/03/2026

काउंसलिंग के जरिए बेहतर भविष्य का रोडमैप तैयार करें

                                                                                                              प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

करियर की प्लानिंग में काउंसलिंग अहम भूमिका निभाती है। इससे छात्र का लक्ष्य स्पष्ट होता है और उसकी मंजिल आसान हो जाती है। अक्सर ऐसा देखा गया है कि छात्र परीक्षा में अव्वल नंबर से पास तो हो जाते हैं, परन्तु उन्हें आगे क्या चुनना है, इसे लेकर उनमें भ्रम की स्थिति बनी रहती है। उनके इसी भ्रम को दूर करती है काउंसलिंग। काउंसलिंग की जरूरत छात्रों को सिर्फ परीक्षा से पहले ही नहीं, बल्कि उसके बाद भी पड़ती है।

समय की मांग है

तेजी से सामने आती संभावनाओं के बीच छात्र अपने लिए विकल्प चुनने में खुद को असहज समझने लगते हैं। उन्हें यह डर सालता है कि कोर्स या कॉलेज चुनने के लिए उठाया गया उनका कदम आगे चल कर गलत न साबित हो जाए। कुछ हद तक यह परेशानी जायज भी है,

क्योंकि 17-18 साल की उम्र तक बच्चे इतने परिपक्व नहीं होते कि वे यह तय कर सकें कि उनके लिए कौन-सा प्लेटफॉर्म उपयुक्त होगा। पेरेन्ट्स यदि सक्रिय हैं तो इस परेशानी का इलाज निकल आता है, अन्यथा वह भंवर जाल में उलझ जाते हैं।

छात्रों की होती है परख

                              

काउंसलिंग को लेकर छात्रों के मन में कई तरह का भ्रम होता है। उन्हें लगता है कि इस प्रक्रिया के दौरान उनका टेस्ट लिया जाएगा और उत्तर न बता पाने की स्थिति में उनकी खिंचाई होगी या बेइज्जती होगी, जबकि हकीकत में होता कुछ और है। इसमें सबसे पहले छात्र से उसके मन की बात जानने की कोशिश की जाती है कि उसकी रुचि किस विषय में है, वह आगे क्या करना चाहता है, उसकी सोच किस तरह की है, उसकी विश्लेषणात्मक क्षमता कैसी है और वह कितनी फीस भर पाने में सक्षम है। कई बार बातचीत से काउंसलर किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाते तो वे बच्चे का एप्टिट्यूड टेस्ट लेते हैं। काउंसलर उसकी बातों और रुचियों का गंभीरता से आकलन करते हैं और उसके बाद ही किसी निष्कर्ष तक पहुंचते हैं।

कितना आता है खर्च

करियर काउंसलर का कहना है कि काउंसलिंग की फीस उसके स्वरूप पर निर्भर करती है। यदि छात्र फोन व इंटरनेट से काउंसलिंग करा रहा है तो उसका खर्चा इंटरनेट या फोन के खर्च तक ही सीमित होता है, लेकिन यदि छात्र काउंसलर के पास जाकर काउंसलिंग कराना चाहता है तो उसे करीब 1000-2000 रुपये तक भुगतान करना पड़ सकता है। इसमें एक प्रक्रिया टेस्टिंग की भी है। इसमें छात्रों का टेस्ट लेकर उन्हें बारीकी से परखा जाता है। ऐसे में उन्हें 1500-5000 रुपये तक भुगतान करना पड़ सकता है।

परखते हैं छात्र की क्षमता

                                 

जब भी छात्र बेहतर करियर चुनने पर सलाह मांगते हैं तो बतौर काउंसलर सबसे पहले मैं उनकी क्षमता को परखता हूं, क्योंकि यह जानना जरूरी है कि छात्र ने जिस क्षेत्र को चुना है, वास्तव में वह उसके फॉर्मेट में फिट बैठ पा भी रहा है कि नहीं। कहीं उसका फैसला किसी और से प्रेरित अथवा थोपा गया तो नहीं है। इस दौरान आम तौर पर हम यह पाते हैं कि अधिकतर बच्चे किसी के बताए या किसी और के फैसले पर कदम बढ़ाए हुए होते हैं।

काउंसलिंग से पहले रुचि जानें

कई बार छात्र सुनहरे सपने तो देखते हैं, लेकिन उन्हें पूरा करने की क्षमता और कोशिश उस स्तर की नहीं होती लिहाजा उन्हें निराशा हाथ लगती है। इसलिए छात्रों को यही सलाह दी जाती है कि सबसे पहले वे अपनी रुचि तलाशें। इसके बाद अपनी क्षमता परखते हुए काउंसलिंग में जाएं। इस मामले में बिना कोई जल्दबाजी दिखाए कई जगह अपनी जिज्ञासा का समाधान करें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।