फुटवियर मैन्यूफैक्चरिंग में नई मांगों से बढ़ते मौके      Publish Date : 02/03/2026

      फुटवियर मैन्यूफैक्चरिंग में नई मांगों से बढ़ते मौके

                                                                                                               प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा फुटवियर उत्पादक देश है और इस उद्योग में 2030 तक 15% वृद्धि का अनुमान है। इस क्षेत्र में अब एआई और ऑटोमेशन का दौर है। मैटीरियल और मैन्यूफैक्चरिंग में नए चलन दिख रहे हैं। स्पोर्ट्स, हेल्थकेयर सेसंबंधित फुटवियर की मांग बढ़ी है। यहां टेक ग्रेजुएट से लेकर आईटीआई छात्रों के लिए मौके बन रहे हैं। भारतीय फुटवियर इंडस्ट्री में लगभग 45 लाख लोग भी काम करते हैं। काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के लेदर और फुटवियर उद्योग ने वित्त वर्ष 2024-25 में निर्यात में लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की है।

                                       

इसका लक्ष्य 2030 तक कुल कारोबार को 39 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय फुटवियर कंपनियों के साथ साझेदारी के लिए चीनी निवेशकों की रुचि भी तेजी से बढ़ रही है, जिससे इस क्षेत्र की भविष्य की संभावनाएं और मजबूत हो रही हैं। वहीं देश में नाइकी, प्यूमा, एडिडास, क्रॉक्स और स्केचर्स जैसी कंपनियां दक्षिण भारत में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। एक रिपोर्ट की मानें, तो 2027 तक सिर्फ तमिलनाडु में इससे संबंधित लगभग 1,35,000 कुशल कामगारों की जरूरत होगी, जिनमें से करीब 10% तकनीकी और प्रबंधन पदों के लिए होंगे।

फुटवियर इंडस्ट्रीः बदलती तस्वीर

भारतीय फुटवियर सेक्टर में तकनीक का समावेश कई गुणा बढ़ गया है। मैन्युफैक्चरिंग से लेकर डिजाइनिंग तकए आई, मशीन लर्निंग, ऑटोमेशन, थ्रीडी प्रिंटिंग और वर्चुअल ट्रायऑन जैसे ट्रेंड आ गए हैं। इनका प्रयोग बढ़ने से यहां करिअर अव ज्यादा टेक-आधारित और स्पेशलाइज्ड होते जा रहे हैं।

बायोमेकेनिक्स और एगोंनॉमिक्स विशेषज्ञ पैरों की चाल और दबाव का विश्लेषण कर स्पोर्ट्स, मेडिकल और आरामदायक फुटवियर डिजाइन कर रहे हैं, जिससे डिजाइन व शोध में मांग बढ़ी है। भारतीय डिजाइनरों को ग्लोबल ट्रेंड्स, पारंपरिक कारीगरी, किफायती प्रतिस्पर्धी उत्पाद बनाने पर ध्यान देना होगा। रचनात्मकता, डिजिटल तकनीक इस्तेमाल करने की क्षमता, निर्माण सामग्री की जानकारी होगी, तो इंडस्ट्री में फायदा मिलेगा। सस्टेनेबल तरीकों को समझना होगा।

एआई व डिजिटल भूमिकाएं

  • एआई फिटिंग स्पेशलिस्टः ऑनलाइन औरकस्टमाइज्ड जूतों के लिए पैर के आकार और आराम के हिसाब से जूतों के डिजाइन और फिटिंग सुनिश्चित करना। बायोमेकेनिक्स और स्पोर्ट्स साइंस में दक्ष हों।
  • 3डी प्रिंटिंग इंजीनियरः कस्टम सोल और जूते बनाने के लिए 3डी प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल। मैकेनिकल/फुटवियर टेक्नोलॉजी में विशेषज्ञ की मांग।
  • वर्चुअल ट्राय-ऑन डिजाइनरः ऑनलाइन जूतों का डिजिटल प्रोटोटाइप तैयार करते हैं। डिजाइन और डिजिटल टेक्नोलॉजी में कुशल।
  • स्मार्ट सेंसर फुटवियर रिसर्चरः स्मार्ट जूतों में सेंसर और बायोमेकेनिकल डाटा जोड़ते हैं। बायोमेकेनिक्स व फिजियोथेरेपी के जानकार।

करिअर कहां और कैसे

                             

  • डिजाइन और डेवलपमेंटः कस्टमाइजेशन, 3डीमॉडलिंग और एआई-आधारित स्मार्ट साइजिंग सिस्टम पर काम करना।
  • फुटवियर डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और क्वालिटी कंट्रोलःग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुसार प्रोडक्शन और गुणवत्ता तय करना।
  • ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंगः ऑनलाइन रिटेल, एसईओ, परफॉर्मेंस मार्केटिंग और सोशल मीडिया के जरिए ग्राहकों तक पहुंचना।
  • सस्टेनेबिलिटी और कंप्लायंसः ईमानदार सोर्सिंग और नियमों का पालन करना। फुटवियर ट्रेड एनालिस्टः मार्केट ट्रेंड और क्षमता का विश्लेषण करना।
  • फुटवियर टेक्निशियनः प्रोटोटाइप और प्रोडक्शन की फिटिंग और गुणवत्ता देखना। फुटवियर लाइन बिल्डरः नए उत्पादों की जानकारी लेना और डिजाइन/डेवलपमेंट ट्रीम के निर्देशों पर काम करना।

क्या हो तरक्की की राह

10वीं, 12वीं, डिप्लोमा या ग्रेजुएट छात्र फुटवियर टेक्नोलॉजी और डिजाइन से जुड़े लॉन्ग टर्म, मीडियम-टर्म और शॉर्ट-टर्म कोर्स कर सकते हैं। छात्रों को ट्रेनिंग के दौरान इंडस्ट्री का अनुभव और प्लेसमेंट के मौके भी मिलते हैं, खासकर सीएफटीआई जैसे संस्थानों में, जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों और भारतीय निर्माताओं के साथ साझेदारी में हैं।

  • आईटीआई छात्रों के लिए मौके: नेशनल अप्रेंटिसशिप सर्टिफिकेट और क्राफ्ट इंस्ट्रक्टर ट्रेनिंग स्कीम (सीआईटीएस) करने से टीचर या इंस्ट्रक्टर बनकर सरकारी या प्राइवेट आईटीआई में भी करिअर बना सकते हैं। फुटवियर मेकर, मशीन ऑपरेटर, फिंटर, पैकिंग स्टाफ और क्वालिटी रोल्स में तकनीकी ट्रेनिंग काम आती है।
  • अपस्किलिंग के लिए: कोर्सेरा और लिंक्डइन लर्निंग पर कैड डिजाइन, 3 डी मॉडलिंग, मैटीरियल साइंस, सस्टेनेबल फैशन, सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस जैसे कोर्स हैं, जो सीधे फुटवियर डिजाइन और प्रोडक्शन में काम आते हैं। उडेमी पर राइनो और क्लो उडी के जरिए शू डिजाइन, पैटर्न-मेकिंग, लेदर और टेक्सटाइल वर्क और प्रोडक्शन प्लानिंग का प्रशिक्षण उपलब्ध हैं।
  • वेतन: फुटवियर डिजाइनर शुरुआत में सालाना 2 से 3.5 लाख रुपये कमा सकते हैं, जो अनुभव बढ़ने पर 10 लाख रुपये तक हो सकता है। फैक्टरी/प्रोडक्शन के पदों पर 15,000 रुपये प्रति माह से शुरुआत संभव है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों में प्रबंधन, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और सप्लाई चेन में वेतन 4 लाख रुपये सालाना से शुरू होता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।