गांव के रास्ते कामयाबी      Publish Date : 25/02/2026

                 गांव के रास्ते कामयाबी

                                                                                                              प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

“रूरल मैनेजमेंट में गांवों की तरक्की सुनिश्चित की जाती है। इस विकास में अपनी भागीदारी देकर आप अपना भविष्य भी बना सकते हैं यानी गांव के विकास के साथ-साथ कॅरियर ग्राफ का भी विकास तय है”।

ग्रामीण विकास आज एक मिशन बन चुका है। सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ प्राइवेट सेक्टर भी इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं, क्योंकि इन कंपनियों को यहां विकास की अब अधिक संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। इसमें ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार के साथ-साथ, कृषि, कुटीर उद्योग, हस्तकला, आर्थिक-सामाजिक ढांचा, कम्युनिटी सेवा और सबसे प्रमुख मानव संसाधन को शामिल किया जाता है। इसलिए रूरल डेवलपमेंट को एक बहुआयामी प्रक्रिया कहा जा सकता है, जिसमें आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था को री-ऑर्गनाइज किया जाता है।

इसलिए इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी लगातार बढ़ रहे हैं। ग्रेजुएशन कर चुके छात्र, रूरल मैनेजमेंट का कोर्स करके इस क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकते हैं। इस बार के बजट में भी ग्राम आधारित्त सभी योजनाओं के आवंटन में 228 फीसदी की बढ़ोतरी की गई। जाहिर है आने वाले समय में ऐसे प्रोफेशनल्स की मांग भी बढ़ेगी, जिन्होंने रूरल मैनेजमेंट में डिग्री हासिल की है।

कौन है रूरल मैनेजर

                                

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विकास के लिए तरह-तरह की योजनाएं बनाना और लागू करना रूरल मैनेजमेंट के अंतर्गत आता है। ग्रामीण विकास कार्यक्रमों को सही तरीके से लागू कराने की जिम्मेदारी रूरल मैनेजर की होती है। वह परंपरागत बाजार की परखकर लोगों से तालमेल बनाने का भी काम करता है। दरअसल, गांव के लोगों को समझे बिना कोई भी प्रोजेक्ट सफल नहीं हो सकता। ऐसे में रूरल मैनेजर अपनी तार्किक शैली से गांव के लोगों को प्रोजेक्ट की सही रूप-रेखा से अवगत कराता है और फिर पोजनाओं को लागू करवाता है।

योग्यता जो चाहिए

देश के कई प्रमुख मैनेजमेंट स्कूल में रूरल मैनेजमेंट में पीजी डिप्लोमा या एमबीए कोर्स उपलब्ध हैं। अगर आप ग्रेजुएशन (50 प्रतिशत अंकों के साथ) कर चुके हैं, तो इस कोर्स के लिए अप्लाई कर सकते हैं। इसमें सोशल साईस, पॉलिटिकल साइंस था सोशल वर्क जैसे विषयों में स्नातक होना विशेष फायदेमंद हो सकता है। प्रवेश परीक्षा के बाद अगला चरण ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू का होता है। इनमें मिले कुल अंकों के आधार पर ही कोर्स में दाखिला मिलता है।

यहां हैं अवसर

आज आर्थिक और सामाजिक स्तर पर ग्रामीण विकास को मिल रही पहचान को देखते हुए मैनेजमेंट स्टडी में रूरल मैनेजमेंट का चलन बढ़ गया है। भारत में रूरल मैनेजमेंट का क्रेज पिछले कुछ सालों में बड़ा है। इस विषय में स्पेशलाइजेशन करने वालों के लिए रोजगार के आकर्षक अवसर हैं। । इस क्षेत्र में कॅरियर बनाने के लिए अलग अलग सेक्टर से जुड़ा जा सकता है, जिनमें बैंक, सरकारी सेक्टर, एनजीओ, कॉरपोरेट कंपनियों के सोशल डेवलपमेंट और सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी विभाग, एफएमसीजी कंपनियों के मार्केटिंग विभाग शामिल हैं।

कॉरपोरेट कंपनियां अक्सर ही ग्रामीण विकास कार्यक्रमों को फंड देती हैं। इसलिए रूरल मैनेजमेंट प्रोफेशनल्या की मांग हमेशा बनी रहती है। इसी तरह यूनाइटेड नेशंस जैसी अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों में भी कॅरियर तलाश सकते हैं। इस कोर्स से स्वरोजगार के भी कई विकल्प हैं। मसलन रिसर्चर के तौर पर स्वतंत्र रूप से काम करना या ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए अपनी इकाई की शुरुआत करना। इन सभी क्षेत्रों में ट्रेनर, कंसल्टेंट, डेवलपमेंट ऑफिसर, प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर के तौर पर काम किया जा सकता है। जहां तक आत आय की है, तो यह देखना होगा कि आप किस संस्था के साथ काम कर रहे हैं। वैसे मैनेजमेंट के दूसरे विकल्पों के मुकाबले रूरल मैनेजमेंट में वेतन उतना आकर्षक नहीं है। फिर भी शुरुआत में 15-20 हजार रुपये प्रतिमाह कमार आ सकते हैं, लेकिन कुछ हतार साली के अनुभव के बाद बेहतर सैलरी का हकदार बना जा सकता है। हालांकि विदेशी संस्थाएं अच्छी तनख्वाह देती हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।