ताकि इंटरव्यू में कोई बाधा न रहे      Publish Date : 24/02/2026

        ताकि इंटरव्यू में कोई बाधा न रहे

                                                                                                    प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

वर्तमान समय में इंटरव्यू केवल सवाल-जवाब नहीं, बल्कि आपके चरित्र, स्पष्टता और सोच की परीक्षा का एक सशक्त जरिया भी बन चुका है। ऐसे में, अगर आप नौकरी की तलाश कर रहे हैं या उसे बदलने के बारे में सोच रहे हैं, तो एक छोटी-सी चूक आपके लिए घातक हो सकती है। खुद के प्रति जागरूकता और तैयारी में कमी, पेशेवर व्यवहार की कमी, पुराने नियोक्ताओं के साथ खराब संबंध और बार-बार नौकरी बदलना आदि कुछ ऐसे 'रेड फ्लैग्स' यानी चेतावनी संकेत होते हैं, जो इंटरव्यू को प्रभावित कर सकते हैं। अच्छी और मनपसंद नौकरी पाने के लिए साक्षात्कार देते वक्त आपको इनमें से किसी भी खतरे की घंटी से बचना चाहिए। ऐसा करने के कुछ तरीके यहां साझा किए जा रहे हैं।

आत्मविश्वास के साथ विनम्रता अपनाएं

                           

अक्सर कई युवा अपनी क्षमताओं को नहीं समझ पाते औरखुद को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं या आत्म-मूल्यांकन में कमी दिखाते हैं। आपसे ऐसी गलती न हो, इसके लिए अपने कौशल का गहनता से आकलन करें, अपने मजबूत व कमजोर क्षेत्रों को पहचानें और अनुभव से जुड़े उदाहरणों के जरिये अपनी सोच व निर्णय शैली स्पष्ट करें। कॉन्फिडेंस ह्युमिलिटी यानी आत्मविश्वास के साथ विनम्रता अपनाएं। इसी से आप एक बेहतर पेशेवर और प्रभावशाली इन्सान बन सकते हैं।

पहले से तैयार रहें

तैयारी की कमी किसी भी इंटरव्यू में सबसे बड़ी गलती जानकारी तक नहीं रखते। आपको चाहिए कि हर इंटरव्यू से पहले आप कंपनी की वेबसाइट, ग्लासडोर, बिजनेस जर्नल्स व पेशेवर नेटवर्क के जरिये संस्था के बारे में गहराई से शोध कर लें। भूमिका और संगठन की संस्कृति को समझकर खुद को पहले से तैयार करने से आपको लाभ मिलेगा।

केवल अपना हित न देखें

इंटरव्यू में शुरुआत से ही सिर्फ अपने हितों की बातें करने पर ध्यान न दें। सैलरी और अन्य लाभों के बारे में पूछना गलत नहीं है, लेकिन साक्षात्कार की शुरुआत में इन्हीं बातोंपर ध्यान केंद्रित करना आपका गैर-पेशेवर रवैया दर्शाता है। बेहतर है कि पहले भूमिका, जिम्मेदारियों और कंपनी से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दें। प्राथमिकताओं से जुड़ी बातचीत ऑफर आने के बाद करें।

थ्री 'सी' फैक्टर

आपको थ्री 'सी' फैक्टर को भी ध्यान में रखना चाहिए। पहला सी है क्लैरिटी (स्पष्टता) यानी आप क्या चाहते हैं और क्या दे सकते हैं। दूसरा सी कर्टसी (शालीनता) को दर्शाता है। इसका मतलब है कि आप दूसरों के साथ कैसे पेश आते हैं और तीसरा सी कोहेरेन्स (सामंजस्य) है, जिससे पता चलता है कि आपकी कहानी, आपके फैसले और आपके भविष्य की दिशा एक-दूसरे से कैसे जुड़ते हैं। अगर आप इन तीन गुणों को अपने व्यक्तित्व का हिस्सा बना लें, तो आपकी चयन की संभावनाएं काफी हद तक बढ़ जाएंगी।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।