
भाषा संग सपनों को दें उड़ान Publish Date : 20/02/2026
भाषा संग सपनों को दें उड़ान
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
आज भाषा भादों और विचारों की अभिव्यक्ति का माध्यम ही नहीं, रोजगार का भी साधन है। एक ऐसे देश और समाज में जहां विभिन्न भाषाएं मौजूद हैं, लोगों का अपनी भाषा के प्रति अगाध प्रेम है। ऐसे माहौल में युवा इन भारतीय भाषाओं के संग कैसे अपनी जिंदगी भी संवार सकते हैं। हाल ही में शिक्षा मंत्रालय की ओर से उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर आओ सीखें एक और भारतीय भाषा नाम से एक अभियान शुरू किया गया है।
सरकार को इस पहल से कि आने वाले समय में इससे एक से अधिक भाषा सीखने की ललक के माना जा रहा है। साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के विभिन्न अवसर भी पैदा होंगे। जानकारों के अनुसार, जब लाखों युवा अपनी मातृभाषा के अलावा दूसरी भारतीय भाषाओं को सीखते, समझते हुए उसमें कुछ रचेंगे तो उसमें उन्हें विशेष आनंद भी मिलेगा। इंजीनियरिंग और डाक्टरी की पढ़ाई में ज्यादा रुचि लेने वाले इस देश में भले ही अभी तक यह क्षेत्र उपेक्षित रहा है, लेकिन अब इसकी कद्र होने लगी है।
भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की सरकार की यह पहल भी इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि इससे आने वाले समय में बेहतर नतीजे सामने आएंगे और उन युवाओं को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल सकेगी, जो भारतीय भाषाओं में अपना जीवन या रोजगार देखना चाहते हैं। ऐसे युवा इस क्षेत्र में भाषा ट्रेनर, लेखक, संपादक, कापी राइटर, अनुवादक, दुभाषिया, अध्यापक, भाषा विज्ञानी और टूरिस्ट गाइड आदि बन सकते हैं।

भारतीय भाषाओं के रंगः भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भारतीय भाषाएं हैं। इनमें असमिया, बंगाली,गुजराती, हिंदी, कन्नड, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, सिंधी, तमिल, तेलुगु, उर्दू, बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली शामिल हैं। इनमें कुछ भाषाओं को छोड़ दें तो अन्य में बोलने वालों की संख्या लाखों और करोड़ों में है। इन भाषायी समाज से जुड़ने के लिए, उनके करीब आने के लिए भाषा का ज्ञान जरूरी है। उनके साहित्य और संस्कृति को जानने से रिश्ते मजबूत होते हैं। इन भाषाओं की पढ़ाई विभिन्न स्कूलों और शिक्षण संस्थाओं में हो भी रही है।
संसद और विधानमंडल में ये भाषाएं बातचीत और विचारों की अभिव्यक्ति का माध्यम हैं, लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि कुछ भाषाओं को छोड़ दें तो अन्य में आज विद्वानों या विशेषज्ञों की बेहद कमी है। ऐसे लोगों की कमी और है, जो दो भारतीय भाषाएं जानते हैं। अगर आप हिंदी भाषी हैं और तमिल या तेलुगु भी अच्छे तरीके से लिख-पढ़ सकते हैं तो आपके लिए रोजगार के कई अवसर पैदा हो सकते हैं। इसी तरह तमिल और तेलुगु भाषी, जो हिंदी जानते हैं उनके लिए भी।
अनुवादक या दुभाषियाः भारतीय भाषाओं विशेषज्ञों के लिए अनुवाद का क्षेत्र सबसे बड़ा है। विभिन्न भारतीय भाषाओं में बहुत कुछ लिखा-पढ़ा जा रहा है। इन्हें गूगल ट्रांसलेटर की मदद से अनुवाद नहीं किया जा सकता है। एक भाषा के साहित्य को दूसरी भाषा में लाने के लिए विभिन्न प्रकाशन संस्थानों, सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं में आज ऐसे अनुवादकों की जरूरत है, जो यह काम मुकम्मल ढंग से कर सकें। इसके लिए अच्छी खासी रकम भी मिलती है। वेतन के रूप में भी सरकारी विभागों के अनुवादक का वेतन 80 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक है। फ्रीलांसिंग के रूप में अलग से कमाई कर सकते हैं। दुभाषिया जो एक भाषा को दूसरे भाषा में तत्काल रूपांतरण करता है, उसका वेतनमान और ज्यादा होता है।
अध्यापन के क्षेत्र में: आजकल स्कूल और कालेजों में भी विभिन्न भारतीय भाषाओं के विशेषज्ञों की मांग है, लेकिन उन्हें ऐसे जानकार लोग या अध्यापक मिल नहीं पा रहे हैं, जो एक से अधिक भाषाएं जानते हों। स्कूल और कालेजों में हिंदी के साथ तमिल या तेलुगु पढ़ाने वाले शिक्षकों की मांग है। कालेजों में बहुत सारी रिक्तियां भारतीय भाषा के विशेषज्ञों की हैं। इसी तरह, राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद के निदेशक प्रो. रवि टेकचंदानी के अनुसार, सिंधी भाषा और साहित्य के पद कालेजों और विश्वविद्यालयों में रिक्त पड़े हैं। यूं समझें कि ऐसे शिक्षक बहुत कम उपलब्ध हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में ही कई विभागों में भारतीय भाषा के विशेषज्ञों की कमी है। विज्ञापन जारी होने के बाद भी पद रिक्त पड़े हैं।
केंद्र और राज्य सरकार में अवसरः केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न संस्थाओं में ऐसे भारतीय भाषा विशेषज्ञों की अक्सर जरूरत पड़ती है, जो एक से अधिक भारतीय भाषाओं के जानकार हैं। उन्हें विभिन्न दस्तावेजों के पठन-पाठन और लेखन के लिए ऐसे लोगों की जरूरत पड़ती है। विभिन्न सरकारी अकादमियों में ऐसे विशेषज्ञों के पद खाली पड़े हैं। गैर सरकारी प्रकाशन संस्थानों भी ऐसे विशेषज्ञों की काफी मांग देखी जा रही है।
सर्टिफिकेट कोर्सेज की पढ़ाई
यूजीसी की ओर से सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को रोजगार की जरूरत के अनुसार भारतीय भाषाओं के सर्टिफिकेट जैसे कोर्स डिजाइन करने और उसकी पढ़ाई कराने के निर्देश दिए गए है। युवा जिस भाषा में पढ़ाई किए है, उसे छोड़कर कोई भी ऐसा कोर्स कर सकेंगे। नौकरी पेशा युवा भी भाषाई योग्यता बढ़ाने के लिए इसे कर सकेंगे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय भाषा को बढ़ावा
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी भभीभारतीय भाषा को बढ़ावा देने की बात प्राथमिक स्तर सेलेकर उच्च शिक्षा तक कही गई है। इस नीति के तहत सभी स्कूलों में भारतीय भाषा में पठन-पाठन हो। टेक्स्ट बुक और अन्य चीजें भी भारतीय भाषा में मुहैया कराई जाए।
सुजलोन स्कालरशिप प्रोग्राम 2025-26
यह स्कालरशिप आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा में सहायता के लिए है। योग्यता: कक्षा नौ की छात्राएं और बीई/बीटेक या इंजीनियरिंग डिप्लोमा के प्रथम वर्ष में नामांकित छात्र आवेदन के पात्र है। परिवार की वार्षिक आय सभी स्रोतों को मिलाकर छह लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। बीई/बीटेक या डिप्लोमा छात्रों के लिए 10वीं और 12वीं में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
