सुनहरे अवसरों की मंजिल ईकोटूरिज्म      Publish Date : 18/02/2026

     सुनहरे अवसरों की मंजिल ईकोटूरिज्म

                                                                                               प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

“प्रकृति को करीब से समझने और पर्यटक स्थलों पर घूमने-फिरने के शौकीन ईकोटूरिज्म में अपना करियर बना सकते हैं। ईकोटूरिज्म के पेशेवर प्राकृतिक और सांस्कृतिक वातावरण की विविधता और संरक्षण को बनाए रखने के लिए तत्पर रहते हैं। साथ ही ये पर्यटकों की जानकारी और उनके मनोरंजन का माध्यम भी होते हैं। दरअसल एक ईकोटूरिज्म का मौलिक उद्देश्य ही पर्यावरण के प्रति लोगों जागरुक करना, वन्य जीवन का संरक्षण और लोगों का आदर- सम्मान करना है। ये पर्यटकों के शिक्षक होने के साथ-साथ विकासशील राष्ट्र के लिए धन एकत्रित करने का स्रोत भी है, जिसे पर्यावरण संरक्षण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा करके एक ईकोटूरिज्म पेशेवर देश के आर्थिक विकास में भी सहयोग करता है”।

ईकोटूरिज्म के पेशेवर पर्यटकों के लिए स्थानीय पर्यावरण स्थिरता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को दशति हैं। ये विदेशों में पर्यावरण के संवेदनशील इलाकों में योजनाबद्ध संरक्षण देने में भी सहयोग करते हैं। ईकोटूरिज्म से संबंधित पर्यटक स्थलों में आमतौर पर वनस्पति, जीव और सांस्कृतिक विरासतें शामिल होती हैं। चाहे अच्छे नेचर कैंप हो या दुर्लभ ट्रैकिंग ट्रिप एक ईकोटूरिज्म पेशेवर हमेशा पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में कार्य करता है। प्रकृति का जीवन-चक्र सुचारू रूप से चलता रहे, यही उसका लक्ष्य होता है। इतना ही नहीं ये पुनरावरण, ऊर्जा क्षमता, जल का पुनः प्रयोग और स्थानीय समुदाय के लिए आर्थिक जगत में सुनहरे अवसर पैदा करने में भी बड़ी भूमिका अदा करते हैं।

सुनहरे अबसर मिलने के आसार

टूरिज्म इंडस्ट्री में ईकोटूरिज्म का कारोबार बहुत तेजी से उभर रहा है। वर्ल्ड टूरिज्म ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार वैश्विक स्तर पर ये कारोबार 5 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। जबकि इसका वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद 6 प्रतिशत है।

भारतीयों के लिए अच्छा विकल्प

1980 तक पर्यावरणविद ईकोटूरिज्म को प्रकृति के लिए खतरा मानते थे। हालांकि एक बड़े भौगौलिक दृष्टिकोण और जैविक विविधता के कारण भारत में इसका काफी महत्व है। इससे जुड़े तमाम दिशा-निर्देश और नियम कानून भारत सरकार ने 1998 में जारी किए थे। इन समस्त दिशा-निर्देशों का आयोजकों, दूर ऑपरेटर, यात्रियों व अन्य एजेंसियों द्वारा पालन किया जाना अनिवार्य है। भारत में कई आकर्षक पर्यटके स्थल हैं, जहां लोग भ्रमण करना पसंद करते हैं। कई ऐसी शांत जगह हैं जहां यात्री तनावमुक्त रहते हैं। सदियों पुरानी विरासतें हैं जिनका यात्री आनंद लेते हैं। इनमें हिमालय, केरल, पूर्वोत्तर भारत, अंडमान- निकोबार द्वीप और लक्षद्वीप के अलावा और भी कई स्थल हैं जहां कई देशी-विदेशी यात्री घूमना पसंद करते हैं। भारत में पहली बार 1 जुलाई 1998 को ईकोटूरिज्म प्रोजेक्ट का लोकार्पण हुआ। तेनमालाईकोटूरिज्म नाम की ये परियोजना केरल में आयोजित की गई थी। ये पूर्ण रूप से ईकोटूरिज्म के कठोर सिद्धांतों पर आधारित थी। जम्मू और कश्मीर का वैष्णो देवी मंदिर और महाराष्ट्र में अजंता-एलोरा की गुफाएं दो ऐसे स्थल हैं जहां पर्यावरण संरक्षण में स्थानीय भागीदारी काफी अहम है। इसके अलावा देश में कई वनस्पति एवं पशु उद्यान भी हैं, जो इस पास्थितिकी तंत्र की दिशा में कार्य कर रहे हैं। देश में कई पशु एवं पादप अधिकार संगठन भी हैं, जो इनके अधिकार एवं संरक्षण संबंधी मुद्दे उठाते हैं। इसलिए भी भारत में ईकोटूरिज्म करियर बनाने के लिहाज से काफी बेहतर है।

रुचि के आधार पर चुनें कोर्स

इस पेशे को अपनाने वाले इच्छानुसार अपने कार्य- क्षेत्र का चयन कर सकते हैं। जैसे कि समुद्र विज्ञान, मत्स्य, मानव विज्ञान, कृषि, खाद्य संसाधन, दूध उत्पादन, ऊर्जा प्रबंधन, पशु चिकित्सा, आहार एवं पोषण, समुद्र इंजीनियरिंग, पर्यावरण इंजीनियरिंग, बागवानी, जैव प्रौद्योगिकी, पर्यावरण पत्रकारिता, भौगोलिक सूचना प्रणाली, वन्य जीव प्रबंधन, वन्य जीव फोटोग्राफी, समुद्र जीव विज्ञान, राष्ट्रीय एवं राज्य उद्यान प्रबंधन, पर्यावरण विज्ञान, महिला विकास, इतिहासकार एवं पुरातत्व विभाग आदि में अपना करियर बना सकते हैं। ईकोटूरिज्म की पढ़ाई करने केबाद आप किसी भी निजी कंपनी या सरकारी विभाग या सामान्य जन संस्थाएं जैसे कि राष्ट्रीय उद्यान व शिक्षा केंद्रों में कार्य कर सकते हैं। यदि आप इससे जुड़ा अपना कारोबार करना चाहते हैं, तब भी ये आपके लिए लाभदायक सिद्ध होगा। इस क्षेत्र में आने के बाद आपको कई विदेशी कंपनियों में काम करने का भी अवसर प्राप्त हो सकता है। इस क्षेत्र में अपना करियर बनाने वालों को यह मालूम होना चाहिए की यह मौसम के आधार पर चलने वाला पेशा है। इसका एक बहुत बड़ा फायदा भी है। जो लोग ऑफ सीजन में खाली रहते हैं, उन्हें किसी दूसरी जगह भी काम करने का पर्याप्त समय मिल जाता है।

जॉब टाइटल

• वन प्रभारी

• साहसिकप्रशिक्षक

• यात्रा प्रशिक्षक

• पर्यावरण अनुदेशक

• यात्रा प्रभारी

• समूह संयोजक

• जूनियर ट्रैवल काउंसलर

• समुदाय पर्यावरण शिक्षक

• पर्यावरण एवंसमुदाय पर्यटन सलाहकार

ये कोर्स हैं उपलब्ध

• ग्रुपं डायनेमिक फॉरईकोटूरिज्म

• ग्रीन ईवेंट प्लानिंग

• जोखिम प्रबंधन एवं कानूनी दायित्व

• अंतरसांस्कृतिक संचार

• बाहरी कौशल एवं कम प्रभाव तकनीक

• वन एवं दूरस्थ प्राथमिक चिकित्सा

• पर्यावरण शिक्षा

• पर्यटन विपणन

• प्राकृतिक संसाधनआकलन और योजना

• प्राकृतिक संसाधन, नीति एवं प्रशासन

• वन, संरक्षण और लोग

• सांस्कृतिक मानवशास्त्र

• अंतरराष्ट्रीय वानिकी

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ