डिग्री बनाम स्किल्स      Publish Date : 17/02/2026

                डिग्री बनाम स्किल्स

                                                                                               प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

आज के समय में विभिन्न क्षेत्रों में डिग्री लेने और देने की होड़ मची हुई है। लेकिन यह याद रखना होगा कि आज डिग्री होना ही सब कुछ नहीं है, क्योंकि डिग्री बड़ी है लेकिन नौकरी का ग्राफ उतनी तेजी से ऊपर नहीं गया है। अब कंपनी यह नहीं पूछता कि स्नातक में कितनी किताबें पड़ी है, आपका क्या प्रतिशत है, वह यह दिखती है कि आप समस्या कैसे समझते हैं टीम में कैसे काम करते हैं। कंप्यूटर और डिजिटल टूल्स का कितना इस्तेमाल कर पाते हैं।

लंबे समय तक समझ में यह धारणा मजबूत होती रही है की डिग्री ही सब कुछ है। माता-पिता ने बच्चों से कहा कि किसी भी तरह ग्रेजुएशन पूरी कर लो बाकी काम अपने आप बन जाएगा। दिक्कत या नहीं की पढ़ाई कम हुई दिक्कत यह है की पढ़ाई के साथ स्केल नहीं जोड़ी गई नौकरी अब उसी को मिलती है, जिसके पास स्किल होता है। कॉलेज प्रोस्पेक्टस में बड़े-बड़े दावे छापे रहते हैं। 100% प्लेसमेंट की बात कही जाती है, लेकिन असलियत अवसर यह निकलती है कि कुछ ही बच्चों का चयन वह भी कम पैकेज पर हो पता है।

इंटर्नशिप का अनुभव का पहला पड़ाव माना जाता है। कंपनियां स्पष्ट रूप से कह रही हैं कि उन्हें ऐसे उम्मीदवार चाहिए जो सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान न रखते हो बल्कि कार्यस्थल की वास्तविक परिस्थितियों को भी समझते हो। कंपनियां कहती हैं कि फ्रेशर्स चलेगा पर एक्सपीरियंस भी चाहिए।

                                   

गिग इकोनामी ने काम का चेहरा बदल दिया है जो काम पहले एक्स्ट्रा माना जाता था अब प्रमुख आई का साधन बन रहा है। ऑनलाइन ट्यूशन पढ़ने वाले, ग्राफिक डिजाइनर, कंटेंट क्रिएटर, युटुब,  फ्रीलांसर राइटर, स्वामी और जोमैटो के डिलीवरी एजेंट, ओला उबर के ड्राइवर यह सब हमारे आसपास जीवंत उदाहरण के रूप में मौजूद है। सरकार की योजनाएं जमीन पर पहुंचते पहुंचते तक जाती हैं और लाभकारी तक पहुंचने से पहले ही फाइलों में सो जाती है।

योजना से ज्यादा जरूरत ईमानदार क्रियान्वयन की है युवा डिग्री को नई माने इमारत स्किल से बनाएं यूट्यूब पर ऑनलाइन कोर्स इंटर्नशिप छोटा काम पार्ट टाइम प्रोजेक्ट्स कुछ भी सीखने पर खाली मत बैठिए। दुनिया उसी की सुनती है जो कुछ कर सकता है। इसलिए बात साफ है कि जमाना बदल चुका है। डिग्री जरूरी है पर काफी नहीं है जिस दिन युवाओं ने इस प्रश्न का ईमानदारी से उत्तर खोजना शुरू कर दिया। उस दिन बेरोजगारी केवल बहस का विषय नहीं रहेगी बल्कि सुलजाती हुई समस्या बन जाएगी और तब वास्तव में कहा जा सकेगा कि भारत की बड़ी ताकत उसकी युवा है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।