बैकअप प्लान रख बढ़ाएं कदम      Publish Date : 10/02/2026

                   बैकअप प्लान रख बढ़ाएं कदम

                                                                                                                                                      प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

वह अभी बीटेक फाइनल ईयर में हैं, लेकिन एक सीरियल एंटरप्रेन्योर के तौर पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुए हैं। 2018 में इन्होंने 'एक्सप्लॉयट एक्स' नाम से एक एडु टेकप्लेटफॉर्म शुरू किया, जो स्टूडेंट्स एवं प्रोफेशनल्स को साइबर सिक्युरिटी एआइ एवं ब्लॉकचेन में ट्रेन करता है। कंपनी के संस्थापक, 21 वर्षीय चैतन्य लक्ष्मण कहते हैं कि इसे शुरू करने का उद्देश्य यही है कि पैसे कमाने के लिए किसी डिग्री की जरूरत नहीं। अगर स्किल है, तो कहीं भी काम कर सकते हैं। जो लोग स्टार्टअप करना चाहते हैं, उनसे यही कहना चाहूंगा कि सिर्फ आइडिया होना काफी नहीं है और न ही किसी की देखादेखी कोई शुरुआत करनी चाहिए।

आज मार्केट में बहुत प्रतिस्पर्धा है, रिस्क फैक्टर काफी है। इसलिए जिस पर भरोसा हो, उसी आइडिया पर काम करें। मार्केट में उतरने से पहले पूरा होमवर्क कर लें और हमेशा एक बैकअप प्लान रखें।

मेरे पिता जी बैंक में सर्विस करते हैं। मां एजुकेशन ऑफिसर है। हम वैसे तो जयपुर से हैं। लेकिन मैं अभी पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक कर रहा हूं। मैंने देखा है कि जो युवा तकनीकी रूप से साउंड व कुशल होते हैं, जिनके पास अच्छे सर्टिफिकेशंस होते हैं, उनके रिक्रूटमेंट में ज्यादा दिक्कत नहीं आती। नौकरी मिलने पर कंपनी में आप एक बड़ी चेन का हिस्सा तो बनते हैं, रोजाना कड़ी मेहनत से काम भी करते हैं। लेकिन इससे लंबे समय के लिए उन्हें अधिक आर्थिक लाभ नहीं मिल पाता। वहीं, एंटरप्रेन्योरशिप हमें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाता है। हम कई सारी समस्याओं का समाधान निकाल पाते हैं। इसी सोच के साथ मैंने पढ़ाई के साथ ही एंटरप्रेन्योरशिप में हाथ आजमाने का फैसला लिया। वैसे, मैंने रोचेस्टर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से साइबर सिक्युरिटी, मेरीलैंड ग्लोबल कैंपस से क्लाउड कंप्यूटिंग एवं कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले से ब्लॉकचेन में माइक्रोमास्टर्स प्रोग्राम भी पूरे किए हैं।

                                                        

प्लेटफॉर्म से स्किल डेवलपमेंटः रिक्रूटमेंट सीजन में कॉलेज में कई कंपनियां आती हैं और अपने रिव्यूज देती हैं कि उन्हें किस तरह के स्किल्ड फोर्स की जरूरत है? जैसे आइबीएम ने एक रिपोर्ट में कहा था कि देश में 30 लाख के करीब साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट्स की जरूरत है, जबकि एक लाख भी नियुक्त नहीं हो पाते। इसी तरह चीन की एक प्रतिष्ठित टेक कंपनी टेनसेंट की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में तीन मिलियन के करीब एआइ एक्सपर्ट्स हैं, जबकि जरूरत इससे कहीं अधिक की है। अपने देश की भी बात करूं, तो हर साल लाखों इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स कॉलेजों से निकलते हैं, लेकिन स्किल डेवलप न कर पाने के कारण उन्हें काम मिलने में मुश्किल आती है। मुझे इस क्षेत्र में बिजनेस की एक संभावना नजर आई। इस तरह, थर्ड ईयर में आइडिया पर काम करना शुरू किया और फिर नींव पड़ी 'एक्सप्लॉयटएक्स' की। इस प्लेटफॉर्म के जरिये हम स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स को साइबर सिक्युरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन एवं बैकऐंड जॉब्स जैसेट्रैक्स में स्किल ट्रेनिंग देते हैं, जिससे कि उनका अच्छी कंपनी में रिक्रूटमेंट हो सके। कंपनियां भी सीधे हमारे प्लेटफॉर्म से हायर कर सकती हैं। इससे जहां रोजगार की दर बढ़ जाती है, वहीं कंपनियों द्वारा कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर होने वाला खर्च भी बच जाता है।

आइक्रिएट की मेंटरशिप आई कामः जहां तक कंपनी में निवेश या मेंटरशिप का प्रश्न है, तो फिलहाल यह बूटस्ट्रैप्ड है। शुरुआती निवेश परिवार वालों का ही रहा है। लेकिन इसे शुरू करने में आइक्रिएट (ऑटोनोमस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एंटरप्रेन्योरशिप ऐंड टेक्नोलॉजी) की अहम भूमिका रही है। दरअसल, मैंने स्टार्टअप इंडिया में अप्लाई किया था, जिसके बाद शीर्ष पांच स्टार्टअप्स में सेलेक्शन हुआ।

इनोवेटिव रहेंगे, तो बढ़ेंगे आगे

                                                        

निश्चित तौर पर एह टेक स्पेस में काफी प्रतिस्पर्धा है। ऐसे में वही कंपनियां ग्रो करेंगी या आगे बढ़ेंगी, जिनका कंटेंट अच्छा व यूनीक है। जो समय-समय पर इनोवेशन करती रहती हैं। मसलन, बायजू को ही लें। उसका लर्निंग प्लेटफॉर्म इतना इंटरैक्टिव एवं बच्चों के लिए उपयोगी है कि वह मार्केट में एक ब्रांड बन चुका है। लोग उसमें निवेश कर रहे हैं। फिलहाल, हमारा फोकस स्किल डेवलपमेंट पर है, तो उसमें ही बेहतर करने की कोशिश है। हां, मुमकिन है कि आने वाले 2-3 सालों में हम भी हार्डवेयर पर काम करें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।