कामयाबी को न बनाएं चुनौती      Publish Date : 07/02/2026

                     कामयाबी को न बनाएं चुनौती

                                                                                                                                                       प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

“हर इंसान हमेशा सफलता की तलाश में रहता है। पूरी दुनिया में शिक्षा तंत्र भी सफलता की धुन में लगा हुआ है। बचपन से लेकर प्रौढ़ आयु तक सफलता के लिए इंसान की तलाश उसे जिंदगी में आगे बढ़ाती रहती है। अगर आप एक बच्चे हैं, तो अच्छे अंक लाने का मतलब सफलता हो सकता है। अगर आप ग्रेजुएट हैं, तो आपके लिए सर्वश्रेष्ठ नौकरी हासिल करने का मतलब सफलता हो सकता है। अगर कलाकार हैं, तो संभवतः सफलता का मतलब किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर आपकी कलाकृति का चयन होना हो सकता है। दर असल, जब लोगों को सफलता मिलती है, तब वे इसकी और ज्यादा इच्छा करने लगते हैं। जब उन्हें सफलता नहीं मिलती है, तब वे तनाव में आ जाते हैं और सफलता के लिए बेवजह के उपायों तक को अपनाते हैं”-

अक्सर लोग सफलता को जोवन में बहुत बड़ी चुनौती समझ लेते हैं, जी सफल नहीं होने वाले लोगों के लिए सफलता के सफर को औरतकलीफदेह बना देता है। टोनी श्वार्ट्ज ने हार्वर्ड बिजनेस रिव्यूब्लॉग नेटवर्क में ऐसे एथलीट्स के उदाहरणों का जिक्र किया है, जो बहुत मामूली से अंतर के कारण प्रतियोगिता हार गए। श्वार्ट्ज यह सवाल पूछते हैं कि क्या ये सभी एथलीट 'तारीफ के हकदार' नहीं थे? क्या इन प्रतियोगिताओं के विजेता हारने वाले एथलीट्स से किसी अर्थपूर्ण तरीके से अलग थे? मैं ऐसे ढेर सारे लोगों को जानता हूं, जो केवल दूसरों के सामने यह साबित करने के लिए अपनी जिंदगी में संघर्ष करते हैं कि हां, ये भी यह कर सकते हैं। भले जिंदगी में आपकी तलाश कुछ भी हो, आप दूसरों के सामने साबित करने के लिए सफल होने की कोशिश मत कीजिए। यह एक निरर्थकतलाश होगी और अंत में आप असंतुष्ट रह जाएंगे। इसलिए यह जरूरी है कि हम समझें कि सफलता का हमारे लिए क्या अर्थ है और अपने खुद के मापदंड निर्धारित करें:

कामयावी की कसौटी

                                                      

सफलता का आपके लिए क्या मतलब है? क्या आप पैसा या शोहरत कमाने के लिए काम कर रहे हैं? क्या आप ऊंचा ओहदा चाहते हैं? क्या आप कोने के उस ऑफिस में बैठना चाहते हैं? आखिर सफलता की आपकी कसौटी क्या है? अक्सर लोग लुभावने सपनों का पीछा करते रहते हैं और फिर आखिर में उन्हें एहसास होता है कि यह यो नहीं था. जो वह वाकई चाहते थे। सफलता वह जगह नहीं है, जहां आप भविष्य में रहेंगे। यह वो दिशा है, जिसका सफर आपको संतुष्टि और सुख की अनुभूति कराएगा।

बनाएं अपने नियम

अगर आप एक विद्याथी है और आप प्रतियोगी परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल करना चाहते हैं, तो यह आपका अपना निजी लक्ष्य होना चाहिए। अपने माता-पिता था हमउम्र साथियों के दबाव को यह लक्ष्य तय मत करने दीजिए। अगर आप एक कारोबार जमाने की योजना बना रहे हैं, तो यह एक शानदार अवसर हो सकता है, आगे बढ़िये और उसे कीजिए। जब आप जिंदगी के निर्णयों की लगाम अपने हाथों में लेते हैं, तो प्रतिबद्धता सहज ही आती है।

भावनाओं में न बहें

जब आप अपने निर्णय ले चुके हैं और जब आप सलाह मांगते हैं, तब आप शायद प्रेरणादायक किताबें या प्रेरणादायक वार्ताएं पढ़ेंगे या सफर के दौरान सिखाने के लिए किसी कोच या परामर्शदाता से मुलाकात करेंगे। किसी कोच या परामर्शदाता से सलाह की लें, जो आपको मिल सकती है। उनसे प्रेरणा भी लें, लेकिन उनके आवेश में न बहें। 'सफलता की पहेली' में बहुत कुछ शामिल होता है, जो न तो किताबों में लिखा गया है. न कहाँ रिकॉर्ड किया गया है। इन किताबों या प्रसारणों में जो कुछ रिपोर्ट नहीं किया जाता है, वह 'एक्सपीरिशियल लर्निंग' का यह क्षेत्र बनता है, जहां कड़ी मेहनत, असफलताएं, बाधाएं, चिंतन, चुनौतियों आदि सभी आपको सफलता के लिए तैयार करते हैं।

खुद बनाएं अपनी परिभाषा

                                               

ढेर सारे लोग सफल अनुकरणीय व्यक्तियों के गुणों को ग्रहण और उनकी नकल करते हैं। हालांकि इसमें कुछ गलत नहीं है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि खुद को गंवाना नहीं है। जिन गुणों ने आपके अनुकरणीय व्यक्ति को सफल बनाया है, वे शायद आपको सफल न बनाएं। प्रेरणा लें, लेकिन अपनी मूल शख्सियत को बदलने के लिए कड़ा संघर्ष मत करें। दरअसल, जो गुग्ण हमारे निजी पहचान को मूर्त रूप देते हैं, अक्सर वे हमारी आनुवांशिक मानसिकता, हमारे बड़े होने की प्रक्रिया, हमारी विद्याप्राप्ति और सूक्ष्म पर्यावरणीय कारकों की एक अंतःक्रिया होते हैं। दूसरे सफल लोगों को देख और उनकी नकल करके इनमें से कुछ गुणों को बदलने से केवल एक बहुरुपिया हो पैदा होगा। अगर आप खूबसूरती तलाश रहे हैं और किसी दुकान के कॉस्मेटिक सेक्शन में जाते हैं, तो संभवतः वहां से आपके निग्राश लौटने की संभावना सबसे अधिक है। खूबसूरती श्रृंगार सामग्रियों में नहीं होती। यह दर्शक की आंखों में होती है। इसी तरह सफलता क्या है, इसे आपको परिभाषित करना चाहिए। खुद अपनी परिभाषा बनाइए और अपनी छोटी- बड़ी सभी उपलब्धियों पर गर्व कीजिए।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।